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खतरे की जद में मां यमुना और शनिदेव का मंदिर
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खरसाली में भू-धंसाव की जद में आया मां यमुना का मंदिर।
- फोटो : UTTER KASHI
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यमुनोत्री धाम के शीतकालीन पड़ाव खरसाली स्थित मां यमुना व शनिदेव का मंदिर खतरे की जद में है। जिला प्रशासन की ओर से यमुना मंदिर के बाहर सुरक्षात्मक कार्य के लिए बजट देने के तीन माह बाद भी सुरक्षा कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं। वहीं दशकों पुराने ऐतिहासिक व पौराणिक शनिदेव के मंदिर की सुध भी नहीं ली जा रही है।
पुरोहित महासभा के अध्यक्ष पुरुषोत्तम उनियाल ने बताया कि मां यमुना का शीतकालीन मंदिर परिसर भूधंसाव की चपेट में है। डेढ़ साल पूर्व सक्रिय हुए भू-धंसाव के खतरे को देखते हुए पुरोहित समाज की अपील पर जिला प्रशासन ने सुरक्षात्मक कार्य करने के लिए लोनिवि को बजट दिया था। तीन महीने गुजरने के बाद भी मंदिर की सुरक्षा का काम शुरू नहीं हो पाया है। समेश्वर शनिदेव मंदिर समिति के सचिव सूरज तोमर ने बताया कि करीब 200 साल पुराने ऐतिहासिक शनिदेव मंदिर की सुरक्षा दीवार ध्वस्त होने से मंदिर के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है। दो माह बाद भी इसकी सुध नहीं ली जा रही है जबकि प्रशासन को इसकी लिखित सूचना भेजी गई है।
भाई-बहन के रूप में जाने जाते हैं यमुना और शनि देव
मां यमुना के शीतकालीन पड़ाव स्थित मां यमुना व शनि देव भाई-बहन के रूप में जाने जाते हैं। यमुना को शनिदेव की बहन कहा जाता है। हर साल जब यमुनोत्री धाम के कपाट खुलते हैं तो शनि देव की डोली बहन यमुना को यमुनोत्री धाम तक छोड़ने आती है। वहीं कपाटबंदी के समय भी शनि देव बहन को लेने के लिए धाम पहुंचते हैं। दोनों ही मंदिरों के प्रति स्थानीय व देश-विदेश के श्रद्धालुओं में अटूट श्रद्धा है। मां यमुना शनि देव के साथ यम की भी बहन हैं।
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मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। ऐसा कुछ है तो इसे जल्द दिखाकर आवश्यक कार्रवाई कराई जाएगी।
-शालिनी नेगी, एसडीएम बड़कोट
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पुरोहित महासभा के अध्यक्ष पुरुषोत्तम उनियाल ने बताया कि मां यमुना का शीतकालीन मंदिर परिसर भूधंसाव की चपेट में है। डेढ़ साल पूर्व सक्रिय हुए भू-धंसाव के खतरे को देखते हुए पुरोहित समाज की अपील पर जिला प्रशासन ने सुरक्षात्मक कार्य करने के लिए लोनिवि को बजट दिया था। तीन महीने गुजरने के बाद भी मंदिर की सुरक्षा का काम शुरू नहीं हो पाया है। समेश्वर शनिदेव मंदिर समिति के सचिव सूरज तोमर ने बताया कि करीब 200 साल पुराने ऐतिहासिक शनिदेव मंदिर की सुरक्षा दीवार ध्वस्त होने से मंदिर के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है। दो माह बाद भी इसकी सुध नहीं ली जा रही है जबकि प्रशासन को इसकी लिखित सूचना भेजी गई है।
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भाई-बहन के रूप में जाने जाते हैं यमुना और शनि देव
मां यमुना के शीतकालीन पड़ाव स्थित मां यमुना व शनि देव भाई-बहन के रूप में जाने जाते हैं। यमुना को शनिदेव की बहन कहा जाता है। हर साल जब यमुनोत्री धाम के कपाट खुलते हैं तो शनि देव की डोली बहन यमुना को यमुनोत्री धाम तक छोड़ने आती है। वहीं कपाटबंदी के समय भी शनि देव बहन को लेने के लिए धाम पहुंचते हैं। दोनों ही मंदिरों के प्रति स्थानीय व देश-विदेश के श्रद्धालुओं में अटूट श्रद्धा है। मां यमुना शनि देव के साथ यम की भी बहन हैं।
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मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। ऐसा कुछ है तो इसे जल्द दिखाकर आवश्यक कार्रवाई कराई जाएगी।
-शालिनी नेगी, एसडीएम बड़कोट