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कई गांवों हो जाएंगे अलग-थलग
Updated Sat, 09 Jan 2016 10:42 PM IST
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सर्दियां शुरू होने के साथ ही जिले के ऊंचाई वाले गांवों पर अलग-थलग पड़ने का खतरा मंडराने लगा है। यमुनोत्री एवं गंगोत्री हाईवे के साथ ही जिले की आधा दर्जन सड़कें भारी बर्फबारी के दौरान अवरुद्ध हो जाती हैं। सालों से यह स्थिति पैदा होने के बावजूद संबंधित विभाग अभी तक सड़कों पर पूरे समय यातायात बहाली के इंतजाम नहीं कर पाए हैं।
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हर साल सर्दियों में गंगोत्री हाईवे सुक्की टॉप, दिल्ली-यमुनोत्री राजमार्ग स्यानाचट्टी से आगे, धरासू-यमुनोत्री हाईवे राड़ी टॉप, उत्तरकाशी-लंबगांव मोटर मार्ग चौरंगीखाल, पुरोला-मोरी मोटर मार्ग जरमोला में अवरुद्ध होता है।
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इन सड़कों पर तो जेसीबी के माध्यम से बर्फ हटाकर कुछ समय में यातायात बहाल कर लिया जाता है, लेकिन सांकरी-तालुका, सांकरी-जखोल, नैटवाड़-धौला-दोणी भीतरी, राड़ी-कफनौल-बर्नीगाड आदि सड़कें बर्फबारी के दौरान कई दिनों तक अवरुद्ध रहती हैं।
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इनके अलावा ढाई हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले गांवों के पैदल रास्ते भी बर्फ से ढकने पर दर्जनों गांव अलग-थलग पड़ जाते हैं।
सड़कें खुली रहें तो बढ़ेगा पर्यटन और रुकेगा पलायन
उत्तरकाशी। धराली निवासी जय भगवान पंवार, शैलेंद्र, हर्षिल निवासी डा. नागेंद्र रावत आदि का कहना है कि सरकार शीतकालीन यात्रा के दावे तो कर रही है, लेकिन हर साल सुक्की टॉप पर बर्फबारी से अवरुद्ध होने वाले गंगोत्री हाईवे पर यातायात बहाली के ठोस इंतजाम नहीं हो पाई है।
सड़क सालभर खुली रहे, तो यहां तीर्थयात्री एवं पर्यटक भी पहुंचेंगे और पलायन भी रुकेगा। दोणी क्षेत्र के पूर्व सैन्य अधिकारी हरबन सिंह चौहान का कहना है कि आम दिनों में सड़क बंद होने पर विभाग सुध नहीं लेता, बर्फबारी में तो उनके पास बहाना भी रहता है।
कोट...
बर्फबारी के दौरान अवरुद्ध होने वाली सड़कों पर यातायात बहाल रखने के लिए संबंधित विभागों को दिशा-निर्देश दिए गए हैं। जेसीबी आदि मशीनें तथा श्रमिक तैनात रखकर चौबीस घंटे के भीतर यातायात सुचारु करने को कहा गया है। इस बार अभी तक कहीं बर्फबारी से सड़क अवरुद्ध होने की स्थिति नहीं आई है।
विनय शंकर पांडेय, डीएम उत्तरकाशी।