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जलाशय से हो रहे रिसाव से निचली ज्ञानसू बस्ती पर खतरा
ब्यूरो/अमर उजाला उत्तरकाशी
Updated Mon, 06 Jun 2016 09:44 PM IST
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ज्ञानसू
- फोटो : amarujala
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मनेरी भाली स्टेज टू परियोजना के जोशियाड़ा बैराज जलाशय से ज्ञानसू बस्ती की ओर हो रहा रिसाव बड़े खतरे का संकेत दे रहा है। बस्ती के लोग घरों और खेतों में हो रहे पानी के रिसाव से भयभीत हैं। जलाशय के किनारे करीब 63 करोड़ रुपये लागत से मजबूत सुरक्षा दीवार बनाने के बाद भी रिसाव जारी रहने पर अब जल विद्युत निगम बस्ती की ओर गहरी नाली खुदवा कर रिस रहे पानी की निकासी के इंतजाम में जुटा है। दीवार बनने के बाद भी रिसाव होने पर अब क्षेत्र में विस्थापन की मांग भी उठने लगी है।
वर्ष 2008 में बनकर तैयार हुई 304 मेगावाट की मनेरी भाली स्टेज टू परियोजना के जोशियाड़ा बैराज जलाशय से ज्ञानसू बस्ती की ओर रिसाव की समस्या शुरू से बनी हुई है। शुरूआत में तो लोगों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन वर्ष 2012 और 2013 की बाढ़ में बस्ती की ओर कटाव के साथ रिसाव बढ़ने पर लोग भयभीत हैं।
जल विद्युत निगम द्वारा इस हिस्से में जलाशय के किनारे करीब 63 करोड़ रुपये लागत से सुरक्षा दीवार बनाए जाने से लोगों को रिसाव रुकने की उम्मीद थी, लेकिन आजकल भी जलाशय को समुद्र सतह से 1104 मीटर लेबल से ऊपर भरे जाने पर रिसाव की समस्या आ रही है।
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बस्ती में हो रहे रिसाव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चार फिट तक घरों की बुनियाद खोलने पर ही भारी भर जा रहा है। घरों के सेफ्टी टेंक पानी से लबालब भर गए हैं। ऐसे में यहां धंसाव का खतरा पैदा हो गया है।
बस्ती के लोगों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जल विद्युत निगम ने अब बस्ती की ओर करीब दो मीटर गहरी नाली खुदवा रहा है। ताकि रिस रहा पानी इस नाली के रास्ते बाहर निकाला जा सके। बस्ती के लोगों को डर है कि जलाशय को डिजाइन के अनुरूप 1108 मीटर लेबल तक भरने पर कहीं समस्या ज्यादा भयावह न हो जाए।
जलाशय भरने पर ही होता है रिसाव
रिसाव से जूझ रही निचली ज्ञानसू बस्ती के लक्ष्मण चौहान, अखिलानंद भट्ट, गोपेश्वर भट्ट, मोर सिंह रावत, अवतार बिष्ट, कुशलानंद नौटियाल, दिनेश भंडारी, बचन सिंह कैंतुरा आदि ने बताया कि जब जलाशय खाली रहता है तब रिसाव नहीं होता।
जलाशय को 1104 मीटर से ज्यादा भरने पर रिसाव बढ़ने लगता है। यहां नए मकान तो लोग छह से सात फिट ऊंची बुनियाद पर बना रहे हैं, लेकिन शौचालय के सेफ्टी टैंक के गड्ढों में पानी भर रहा है। उन्होंने जल विद्युत निगम से शीघ्र रिसाव की समस्या से निजात दिलाने की मांग की है।
जलाशय से नहीं है पानी का रिसाव
नाम न छापने की शर्त पर निगम के अधिकारी बताते हैं कि जलाशय से रिसाव की संभावना कम ही है। यह पानी बस्ती के घरों का ही है। जलाशय भरने पर इसकी निकासी न होने से यह पानी बस्ती में ही भर रहा है।
फिलहाल बस्ती के किनारे करीब दो मीटर गहरी दो सौ मीटर लंबी नाली का निर्माण कराया जा रहा है। इसके माध्यम से बस्ती में रिस रहे पानी की निकासी होने से समस्या हल हो जाएगी। इसके बाद भी यदि रिसाव नहीं रुका तो इसकी पड़ताल करायी जाएगी।
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वर्ष 2008 में बनकर तैयार हुई 304 मेगावाट की मनेरी भाली स्टेज टू परियोजना के जोशियाड़ा बैराज जलाशय से ज्ञानसू बस्ती की ओर रिसाव की समस्या शुरू से बनी हुई है। शुरूआत में तो लोगों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन वर्ष 2012 और 2013 की बाढ़ में बस्ती की ओर कटाव के साथ रिसाव बढ़ने पर लोग भयभीत हैं।
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जल विद्युत निगम द्वारा इस हिस्से में जलाशय के किनारे करीब 63 करोड़ रुपये लागत से सुरक्षा दीवार बनाए जाने से लोगों को रिसाव रुकने की उम्मीद थी, लेकिन आजकल भी जलाशय को समुद्र सतह से 1104 मीटर लेबल से ऊपर भरे जाने पर रिसाव की समस्या आ रही है।
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बस्ती में हो रहे रिसाव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चार फिट तक घरों की बुनियाद खोलने पर ही भारी भर जा रहा है। घरों के सेफ्टी टेंक पानी से लबालब भर गए हैं। ऐसे में यहां धंसाव का खतरा पैदा हो गया है।
बस्ती के लोगों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जल विद्युत निगम ने अब बस्ती की ओर करीब दो मीटर गहरी नाली खुदवा रहा है। ताकि रिस रहा पानी इस नाली के रास्ते बाहर निकाला जा सके। बस्ती के लोगों को डर है कि जलाशय को डिजाइन के अनुरूप 1108 मीटर लेबल तक भरने पर कहीं समस्या ज्यादा भयावह न हो जाए।
जलाशय भरने पर ही होता है रिसाव
रिसाव से जूझ रही निचली ज्ञानसू बस्ती के लक्ष्मण चौहान, अखिलानंद भट्ट, गोपेश्वर भट्ट, मोर सिंह रावत, अवतार बिष्ट, कुशलानंद नौटियाल, दिनेश भंडारी, बचन सिंह कैंतुरा आदि ने बताया कि जब जलाशय खाली रहता है तब रिसाव नहीं होता।
जलाशय को 1104 मीटर से ज्यादा भरने पर रिसाव बढ़ने लगता है। यहां नए मकान तो लोग छह से सात फिट ऊंची बुनियाद पर बना रहे हैं, लेकिन शौचालय के सेफ्टी टैंक के गड्ढों में पानी भर रहा है। उन्होंने जल विद्युत निगम से शीघ्र रिसाव की समस्या से निजात दिलाने की मांग की है।
जलाशय से नहीं है पानी का रिसाव
नाम न छापने की शर्त पर निगम के अधिकारी बताते हैं कि जलाशय से रिसाव की संभावना कम ही है। यह पानी बस्ती के घरों का ही है। जलाशय भरने पर इसकी निकासी न होने से यह पानी बस्ती में ही भर रहा है।
फिलहाल बस्ती के किनारे करीब दो मीटर गहरी दो सौ मीटर लंबी नाली का निर्माण कराया जा रहा है। इसके माध्यम से बस्ती में रिस रहे पानी की निकासी होने से समस्या हल हो जाएगी। इसके बाद भी यदि रिसाव नहीं रुका तो इसकी पड़ताल करायी जाएगी।