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आपदा में भूमिहीन लोगों को पट्टे पर मिलेगी भूमि
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उत्तरकाशी के सीमांत आराकोट बंगाण क्षेत्र का जायजा लेने पहुंचे डीएम मयूर दीक्षित।
- फोटो : UTTER KASHI
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जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने सीमांत क्षेत्र आराकोट क्षेत्र का निरीक्षण कर दो वर्ष पूर्व आपदा में हुए नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने जल्द पुनर्निर्माण का आश्वासन दिया, जो आपदा में भूमिहीन हुए हैं उन्हें सरकार पट्टे पर भूमि देगी।
शनिवार को आराकोट क्षेत्र में पहुंचे डीएम ने आराकोट चिवां मोटर मार्ग की स्थिति का जायजा लिया। डीएम ने क्षतिग्रस्त पैदल मार्ग, टूटे हुए मोटर पुल व झूला पुलों का भी निरीक्षण किया। डीएम ने आपदा में ध्वस्त हुए जीआईसी टकोची और एलोपैथिक चिकित्सालय टिकोची के भवनों का भी निरीक्षण किया। आराकोट बंगाण संघर्ष समिति के अध्यक्ष राजेंद्र नौटियाल ने बताया कि आपदा के दो वर्ष बाद भी आराकोट- टिकोची-चिवां-मोंड़ा-बलावट मोटर मार्ग की हालत नहीं सुधरी है। जबकि करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए हैं। ग्रामीण मनमोहन चौहान, उपेंद्र चौहान, जगदीश राणा व जितेंद्र सिंह ने आपदा से तबाह हुए सैकड़ों हेक्टेयर कृषि व बागवानी भूमि का मुआवजा दो से तीन हजार मिलने पर आक्रोश जताया। इस दौरान पुरोला के उपजिलाधिकारी सोहन सिंह सैनी, सीएचओ डॉ. रजनीश सिंह, लोनिवि पुरोला के अधिशासी अभियंता धीरेंद्र कुमार, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल, एसीएमओ डॉ. आरसी आर्य, एसओ मोरी दीनदयाल सिंह, पूर्व ग्राम प्रधान हरेंद्र सिंह, राजेंद्र नौटियाल, शूरवीर सिंह, ग्राम प्रधान किरौली चमन सिंह, सदर राणा, मोहन लाल आदि मौजूद थे।
आराकोट पहुंचने वाले दूसरे डीएम हैं दीक्षित
आराकोट क्षेत्र जनपद का सीमांत क्षेत्र है। यह जनपद मुख्यालय से करीब 200 किमी दूर है। डीएम मयूर दीक्षित यहां पहुंचने वाले दूसरे डीएम हैं। इससे पहले आशीष चौहान यहां आए थे। जो आपदा के दौरान करीब एक माह तक यहीं रहे थे।
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शनिवार को आराकोट क्षेत्र में पहुंचे डीएम ने आराकोट चिवां मोटर मार्ग की स्थिति का जायजा लिया। डीएम ने क्षतिग्रस्त पैदल मार्ग, टूटे हुए मोटर पुल व झूला पुलों का भी निरीक्षण किया। डीएम ने आपदा में ध्वस्त हुए जीआईसी टकोची और एलोपैथिक चिकित्सालय टिकोची के भवनों का भी निरीक्षण किया। आराकोट बंगाण संघर्ष समिति के अध्यक्ष राजेंद्र नौटियाल ने बताया कि आपदा के दो वर्ष बाद भी आराकोट- टिकोची-चिवां-मोंड़ा-बलावट मोटर मार्ग की हालत नहीं सुधरी है। जबकि करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए हैं। ग्रामीण मनमोहन चौहान, उपेंद्र चौहान, जगदीश राणा व जितेंद्र सिंह ने आपदा से तबाह हुए सैकड़ों हेक्टेयर कृषि व बागवानी भूमि का मुआवजा दो से तीन हजार मिलने पर आक्रोश जताया। इस दौरान पुरोला के उपजिलाधिकारी सोहन सिंह सैनी, सीएचओ डॉ. रजनीश सिंह, लोनिवि पुरोला के अधिशासी अभियंता धीरेंद्र कुमार, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल, एसीएमओ डॉ. आरसी आर्य, एसओ मोरी दीनदयाल सिंह, पूर्व ग्राम प्रधान हरेंद्र सिंह, राजेंद्र नौटियाल, शूरवीर सिंह, ग्राम प्रधान किरौली चमन सिंह, सदर राणा, मोहन लाल आदि मौजूद थे।
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आराकोट पहुंचने वाले दूसरे डीएम हैं दीक्षित
आराकोट क्षेत्र जनपद का सीमांत क्षेत्र है। यह जनपद मुख्यालय से करीब 200 किमी दूर है। डीएम मयूर दीक्षित यहां पहुंचने वाले दूसरे डीएम हैं। इससे पहले आशीष चौहान यहां आए थे। जो आपदा के दौरान करीब एक माह तक यहीं रहे थे।
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