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जनता को ध्यान रखकर बनाएं जल नीति

Wed, 16 Nov 2016 10:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ उत्तरकाशी।
अमर उजाला ब्यूरो/ उत्तरकाशी। Updated Wed, 16 Nov 2016 10:32 PM IST
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Keeping people make water policy.
पानी - फोटो : getty

पर्यावरणविद् सुरेश भाई ने प्रदेश सरकार को लोक जल नीति का ड्राफ्ट सौंपा है। उन्होंने सीएम हरीश रावत, सिंचाई मंत्री यशपाल आर्य और सचिव, सिंचाई विभाग आनंद वर्द्धन को ड्राफ्ट और सुझाव की कॉपी भेजी है।       

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सुरेश भाई का कहना है कि चुनाव नजदीक है और राज्य सरकार लोगों की मांग पर मरहम लगाने के लिए पुन: जल नीति का एक ड्राफ्ट बनाने जा रही है। ऐसे में उत्तराखंड लोक जल नीति के मसौदे को राज्य सरकार को भेजा गया है। जल नीति बनाने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर राज्य को ध्यान देना जरूरी है। जल नीति का उद्देश्य पहले स्वच्छ पेयजल फिर सिंचाई और इसके बाद छोटे उद्योगों को जलापूर्ति करने का होना चाहिए।
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नदियों के बहाव को अविरल रखने के लिए सुरंग बांधों के निर्माण पर प्रतिबंध हो। ऐसे बांध बने जिनकी ऊंचाई 15 मीटर से अधिक न हो और सिंचाई की क्षमता 10 हजार हेक्टेयर से अधिक न हो। राज्य में जल शोषण की जितनी योजनाएं चलाई जाती है, उससे 10 गुना जल उत्पादन करने की होनी चाहिए। सरकार ने 16 सितंबर 2003 को जल नीति में बनाए गए मसौदे में जल को प्राकृतिक नहीं, बल्कि सरकारी संपति के रूप में योजना बनाई थी।
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लोगों ने इस मसौदे का विरोध किया। इस पर राज्य ने विचार भी किया और तत्कालीन कृषि एवं जलागम मंत्री महेंद्र सिंह माहरा की अध्यक्षता में एक मंत्री स्तरीय उप समिति बनाई थी। इसके बावजूद राज्य की जल नीति निजी कंपनियों के इशारे पर रोकी गई है। 

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