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जोशियाड़ा बैराज जलाशय में धड़ल्ले से खनन जारी
ब्यूरो/अमर उजाला, उत्तरकाशी
Updated Sun, 13 Mar 2016 10:37 PM IST
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ज्ञानसू एवं जोशियाड़ा की ओर सुरक्षा दीवार निर्माण के लिए 28 फरवरी को मनेरी भाली स्टेज टू परियोजना में विद्युत उत्पादन बंद कर जोशियाड़ा बैराज जलाशय को खाली कर दिया गया था। इसके बाद से जलाशय क्षेत्र में दर्जनों डंपर और जेसीबी धड़ल्ले से खनन कर रही हैं।
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प्रशासन के अधिकारी बिजली परियोजना के लिए हानिकारक होने की वजह से इसे खनन के बजाय मलबा निस्तारण का नाम दे रहे हैं, जबकि तटवर्ती आबादी के लिए खतरा बना मलबा हटाने का प्रस्ताव पर्यावरणीय कानूनों के चलते दो साल से शासन स्तर पर लंबित पड़ा है।
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आबादी के लिए खतरा बने मलबे को हटाने में कोई रुचि न लेने और बैराज जलाशय में में जमा मलबा आनन-फानन में नियमों को ताक पर रखकर हटाए जाने से इसमें भारी गोलमाल की आशंका जताई जा रही है।
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एडीएम अशोक पांडेय का कहना है कि जल विद्युत निगम ने लिखित तौर इस मलबे से परियोजना को नुकसान की सूचना दी है। इसी आधार पर मलबे का निस्तारण कराया जा रहा है। मलबा उठाने वालों से निर्धारित मानकों के अनुसार उपखनिज रेत बजरी की रायल्टी भी वसूली जा रही है।
वहीं जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल का कहना है कि तटवर्ती आबादी के लिए खतरा बने भागीरथी में जमा मलबे के निस्तारण का प्रस्ताव दो साल से शासन स्तर पर लंबित है। तटवर्ती आबादी की सुरक्षा के लिए नदी में जमा मलबा हटाना जरूरी है।