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काश्तकारों को नहीं मिल रहे टमाटर के सही दाम

Wed, 01 Sep 2021 09:20 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 01 Sep 2021 09:20 PM IST
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farmers are not getting the right price of tomatoes
रवाईं क्षेत्र के काश्तकारों को टमाटर की फसल का सही दाम नहीं मिल रहा है, जिससे काश्तकारों ने टमाटर को मंडियों में भेजना बंद कर दिया है। सही दाम न मिलने से काश्तकारों के समक्ष आर्थिक संकट गहरा गया है। काश्तकारों ने क्षेत्र में मंडी समिति स्थापित किए जाने की मांग की है।
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घाटी के विकासखंड नौगांव, पुरोला व मोरी में सेब के बाद टमाटर दूसरे नंबर की नकदी फसल है। तीनों विकास खंडों में प्रत्येक वर्ष करीब आठ हजार मीट्रिक टन टमाटर का उत्पादन होता है, जिसे दिल्ली, सहारनपुर, देहरादून, रुड़की की मंडियों में बिक्री के लिए भेजा जाता है। विकास खंडों में दो दशक पहले काश्तकारों ने टमाटर की नकदी फसल को अपनी आजीविका का साधन बना कर उत्पादन शुरू किया था, लेकिन बीते एक दशक में पहली बार काश्तकारों को टमाटर के सबसे कम दाम मिल रहे हैं।
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यमुना घाटी किसान जन कल्याण समिति के अध्यक्ष जयेंद्र राणा का कहना है कि शुरुआती समय में काश्तकारों को प्रतिकिलो सात आठ रुपये की शुद्ध बचत मिलती थी, जो अब घटकर दो से तीन रुपये तक पहुंच गई। राणा का कहना है कि पहली पहली बार किसानों को टमाटर की फसल से बड़ा नुकसान हुआ है। इस सीजन में सिर्फ आढ़ती को आढ़त, ट्रांसपोर्टर को भाड़ा और स्थानीय एजेंट को उसकी कमीशन मिल पाई है। किसान बीज और दवाई की कीमत भी नहीं उठा पाया है। रवाईं घाटी फल एवं सब्जी उत्पादक एसोसिएशन के अध्यक्ष जगमोहन चंद का कहना है कि जब तक क्षेत्र में मंडी समिति की स्थापना नहीं की जाती काश्तकार को उसकी फसल का सही दाम नहीं मिल पाएगा।
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