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भूस्खलन से सहमे 60 परिवारों ने ली छानियों में शरण
ब्यूरो/अमर उजाला, उत्तरकाशी
Updated Sun, 03 Jul 2016 08:42 PM IST
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उत्तरकाशी मनेरी के सिलकुरा गांव में गदेरे में पानी बढ़ने से कटाव की जद में आए मकान।
- फोटो : Amar Ujala
मानसून की शुरुआती बारिश में हुई तबाही का मंजर देखकर असी गंगा घाटी के लोग 2012-13 की आपदा की तबाही दोबारा होने की आशंका से सहमे हुए हैं। सक्रीय भूस्खलन और गदेरे के कटाव से डरे ढासड़ा गांव के 60 परिवार मवेशियों के साथ तीन किमी दूर स्याली व बैरा तोक में बनी छानियों में चले गए हैं।
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यहां के कई गांव और छानियों की पैदल सड़क व पुलिया बहने से बच्चे भंकोली इंटर कालेज नहीं जा पा रहे हैं। पेयजल योजनाएं बहने से लोगों को पीने के पानी के लिए तीन किमी दूर जाना पड़ रहा है।
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ढासड़ा गांव के ऊपर बरसात में पत्थर गिरने से लोग छानियों में शरण लेते हैं। पेयजल लाइन टूटने से ग्रामीणों को तीन किमी दूर से पानी ढो रहे हैं। भंकोली इंटर कालेज में पढ़ने वाले बच्चे रास्ता नहीं होने से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। भंकोली गांव के नीचे भूस्खलन सक्रीय होने से संगमचट्टी से आवाजाही के रास्ते बंद हो गए हैं। गांव के कई परिवार सिलकोरिया छानियों में रहते हैं, लेकिन पुलिया बहने से इनका संपर्क गांव से टूट गया।
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असी गंगा घाटी के सात गांवों में पेयजल किल्लत बनी हुई है। ढासणा की प्रधान संगीता, भंकोली के धनीराम, पूर्व जिला पंचायत सदस्य रूप सिंह रावत का कहना है कि बरसात में संगमचट्टी तक यातायात चालू रखने की व्यवस्था नहीं की गई है।