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देव-डोलियों के साथ श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
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उत्तकाशी के रामलीला मैदान में मकर संक्रांति पर्व पर देव डोली का स्वागत करते जिपं अध्यक्ष दीपक बि?
- फोटो : UTTER KASHI
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मणिकर्णिका घाट पर देव-डोलियों के साथ श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए पहुंचे, जिन्होंने कड़ाके की ठंड के बावजूद गंगा नदी में डुबकी लगाई।
बृहस्पतिवार को मकर संक्रांति पर्व की शुरूआत रणसिंघा की गूंज, ढोल-दमाऊं की थाप और शंखनाद के साथ हुई। पौराणिक मणिकार्णिका घाट पर तड़के तीन बजे से ही दूर-दराज के क्षेत्रों से देव-डोलियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। पर्व पर बाड़ाहाट क्षेत्र के आराध्य कंडार देवता, बाड़ागड्डी के हरिमहाराज, खंडद्वारी माता, कैलापीर, नाग देवता, बाल कंडार, घंडियाल देवता, धनारी क्षेत्र से नागराजा, चंदणनाग, नागणी देवी, रनाड़ी के कचड़ू देवता, डुंडा की रिंगाली देवी, गाजणा क्षेत्र से भैरव, चौरंगी नाथ, नागराजा, बरसाली के नागराजा, रेणुका देवी, चिन्यालीसौड़ की राजराजेश्वरी, टिहरी से सुरकंडा देवी आदि दर्जनों देवी-देवताओं की डोलियां, ढोल, निशान आदि के साथ हजारों श्रद्धालु उत्तरकाशी पहुंचे। जिन्होंने मणिकर्णिका घाट के साथ जड़भरत, केदार व लक्षेश्वर में गंगा स्नान किया। साथ ही काशी के प्राचीन गंगा मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, भैरव मंदिर, हनुमान मंदिर, कंडार देवता मंदिर, परशुराम मंदिर, अन्नपूर्णा मंदिर, दत्तात्रेय भगवान के मंदिर में दर्शन और पूजा-पाठ कर मनौतियां मांगी।
चमाला की चौंरी पर देव-डोलियों का नृत्य बना आकर्षण
भैरव चौक स्थित चमाला की चौंरी पर देव डोलियों का नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा। यहां प्रशासन ने बाड़ाहाट और बाड़ागड्डी क्षेत्र के देवताओं के लिए अलग-अलग समय निर्धारित किया था, जिसके अनुसार ही सुबह बाड़ाहाट के आराध्य कंडार देवता और दिन में बाड़ागड्डी क्षेत्र के हरि महाराज के ढोल ने पहुंचकर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया।
गंगनानी कुंड में श्रद्धालुओं ने किया स्नान
बड़कोट। मकर संक्रांति पर्व पर रर्वाइं क्षेत्र के पौराणिक धार्मिक गंगा-यमुना के संगम स्थल गंगनानी कुंड में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। यहां सुबह चार बजे से ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था। कई देव-डोलियां भी यहां कुंड में स्नान करने पहुंची।
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बृहस्पतिवार को मकर संक्रांति पर्व की शुरूआत रणसिंघा की गूंज, ढोल-दमाऊं की थाप और शंखनाद के साथ हुई। पौराणिक मणिकार्णिका घाट पर तड़के तीन बजे से ही दूर-दराज के क्षेत्रों से देव-डोलियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। पर्व पर बाड़ाहाट क्षेत्र के आराध्य कंडार देवता, बाड़ागड्डी के हरिमहाराज, खंडद्वारी माता, कैलापीर, नाग देवता, बाल कंडार, घंडियाल देवता, धनारी क्षेत्र से नागराजा, चंदणनाग, नागणी देवी, रनाड़ी के कचड़ू देवता, डुंडा की रिंगाली देवी, गाजणा क्षेत्र से भैरव, चौरंगी नाथ, नागराजा, बरसाली के नागराजा, रेणुका देवी, चिन्यालीसौड़ की राजराजेश्वरी, टिहरी से सुरकंडा देवी आदि दर्जनों देवी-देवताओं की डोलियां, ढोल, निशान आदि के साथ हजारों श्रद्धालु उत्तरकाशी पहुंचे। जिन्होंने मणिकर्णिका घाट के साथ जड़भरत, केदार व लक्षेश्वर में गंगा स्नान किया। साथ ही काशी के प्राचीन गंगा मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, भैरव मंदिर, हनुमान मंदिर, कंडार देवता मंदिर, परशुराम मंदिर, अन्नपूर्णा मंदिर, दत्तात्रेय भगवान के मंदिर में दर्शन और पूजा-पाठ कर मनौतियां मांगी।
चमाला की चौंरी पर देव-डोलियों का नृत्य बना आकर्षण
भैरव चौक स्थित चमाला की चौंरी पर देव डोलियों का नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा। यहां प्रशासन ने बाड़ाहाट और बाड़ागड्डी क्षेत्र के देवताओं के लिए अलग-अलग समय निर्धारित किया था, जिसके अनुसार ही सुबह बाड़ाहाट के आराध्य कंडार देवता और दिन में बाड़ागड्डी क्षेत्र के हरि महाराज के ढोल ने पहुंचकर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया।
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गंगनानी कुंड में श्रद्धालुओं ने किया स्नान
बड़कोट। मकर संक्रांति पर्व पर रर्वाइं क्षेत्र के पौराणिक धार्मिक गंगा-यमुना के संगम स्थल गंगनानी कुंड में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। यहां सुबह चार बजे से ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था। कई देव-डोलियां भी यहां कुंड में स्नान करने पहुंची।
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