{"_id":"5717a8424f1c1b13538b46d4","slug":"despite-the-tourism-possibilities-neglected","type":"story","status":"publish","title_hn":"संभावनाओं के बावजूद पर्यटन उपेक्षित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संभावनाओं के बावजूद पर्यटन उपेक्षित
ब्यूरो/अमर उजाला उत्तरकाशी
Updated Wed, 20 Apr 2016 09:33 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले में अपार संभावनाओं के बावजूद पर्यटन व्यवसाय को अपेक्षित बढ़ावा नहीं मिल पा रहा है। ढांचागत सुविधाओं के अभाव के साथ ही सरकार की अजीबोगरीब नीतियों को इसका कारण माना जा रहा है। नीतियों में सुधार हो तो पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
विज्ञापन
सर्वाधिक चढ़ी जाने वाली चोटियां, गंगा का उद्गम गोमुख, उच्च हिमालयी पड़ाव तपोवन, नंदनवन, केदारताल, गंगोत्री नेशनल पार्क में दुर्लभ वन्य जीवों के दर्शन, कालिंदी आदि उच्च हिमालयी ट्रैक के चलते गंगोत्री हिमालय क्षेत्र वर्षों से देशी-विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है।
विज्ञापन
मार्च से ही यहां मौसम अनुकूल है, लेकिन पार्क प्रशासन गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के बाद ही पर्यटकों को इन क्षेत्रों में जाने की अनुमति देने की बात कह रहा है। हर्षिल में विदेशी पर्यटक घूम सकते हैं, लेकिन रात को ठहरना चाहें तो इनर लाइन की बंदिश के चलते उन्हें अनुमति नहीं है।
विज्ञापन
हिमाचल प्रदेश की ओर से तो विदेशी पर्यटक लमखागा पास होते हुए उच्च हिमालयी ट्रैकिंग कर उत्तरकाशी की ओर आते हैं, लेकिन उत्तरकाशी की ओर से इनर लाइन की बंदिश के चलते उन्हें अनुमति नहीं दी जाती।
जिला पंचायत गोमुख, डोडीताल आदि ट्रैक पर जाने वाले पर्यटकों के मजदूरों से भी शुल्क तो वसूलती है, लेकिन कोई सुविधा नहीं देती। बीते साल सरकार ने भारत-चीन सीमा से लगी नेलांग घाटी को पर्यटकों के लिए खोला तो है, लेकिन सिंगल विंडो सिस्टम न होने से अनुमति के लिए पर्यटकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
गोमुख क्षेत्र में दें प्रवेश की अनुमति
हिमालयन ट्रैकिंग एंड माउंटेनियरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष मदन गुसाईं, सचिव जयेंद्र राणा ने बताया कि पहले ही आपदा के चलते कम संख्या में पर्यटक यहां आ रहे हैं। उन्होंने डीएम से मिलकर गोमुख क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति देने, इनर लाइन की बंदिश हटाने, जिला पंचायत द्वारा वसूले जा रहे शुल्क को समाप्त करने तथा पर्यटकों को प्रवेश की अनुमति के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने की मांग की है।