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जर्जर बना है आयुर्वेदिक अस्पताल का भवन
ब्यूरो /अमर उजाला
Updated Tue, 02 Jun 2015 07:28 PM IST
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अटल आदर्श ग्राम साल्ड का आयुर्वेदिक अस्पताल भवन जर्जर बना है। निर्माण के 28 साल बाद भी विभाग ने भवन की सुध नहीं ली। जिला मुख्यालय के नजदीकी गांव के अस्पताल की बदहाली से ग्रामीणों में रोष है।
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वरुणा घाटी क्षेत्र के 12 गांवों में चिकित्सा सेवाओं के लिए वर्ष 1987 में साल्ड गांव में आयुर्वेदिक अस्पताल खोला गया था। अस्पताल के मुख्य भवन के साथ ही यहां डाक्टर, फार्मेसिस्ट आदि कर्मचारियों के लिए आवासीय भवन भी बनाए गए।
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देखरेख के अभाव में आज स्थिति यह है कि अस्पताल की छत जर्जर होकर गिरने को है। डाक्टर बरामदे में बैठकर ही मरीजों का उपचार कर रहे हैं। अस्पताल की बिजली-पानी का कनेक्शन भी कटा हुआ है।
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गांव के मंशाराम नौटियाल ने बताया कि भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र में यदि समय रहते अस्पताल भवन को दुरुस्त नहीं कराया गया, तो भूकंप आने पर अस्पताल ही जानलेवा बन जाएगा।
अस्पताल भवन बेहद जर्जर हालत में होने के कारण मरीजों को यहां भर्ती करने की स्थिति नहीं है। मरीजों को जरूरी दवाएं और प्राथमिक उपचार ही दिया जा रहा है।
डा. रतनमणी भट्ट, चिकित्साधिकारी आयुर्वेदिक अस्पताल साल्ड।
भवन की स्थिति वास्तव में खराब है। लोनिवि से भवन का निरीक्षण कर इसकी रिपोर्ट मांगी गई है। ताकि इसकी मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण कराया जा सके।
डा. डीडी बधानी, जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा अधिकारी।