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हरकीदून घाटी के गांवों में जड़ी-बूटी कृषिकरण को बढ़ावा देने की कवायद
Updated Sun, 16 Sep 2018 10:28 PM IST
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पुरोला (उत्तरकाशी)। एचएनबी गढ़वाल विवि के उच्च शिखरीय पादप शोध केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा हाल ही में नेशनल मिशन ऑन हिमालय अध्ययन परियोजना के तहत हरकीदून घाटी का सर्वेक्षण किया गया था, जिसमें उन्होंने पाया कि कई जड़ी-बूटी विलुप्त हो रही हैं। ऐसे में घाटी के ओसला, पवाणी, गंगाड़ एवं ढाटमीर गांव में जड़ी-बूटी की कृषि की जा सकती है।
हैप्रेक के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. वीके पुरोहित ने कहा कि जड़ी-बूटियों का अंधाधुंध विदोहन हिमालय के पर्यावरण संतुलन के लिहाज से खतरनाक हो सकता है। अध्ययन में पता चला है कि ग्रामीण जड़ी-बूटियों का विदोहन कर बिचौलियों के हाथों औनेपौने दामों पर बेचकर अपनी आजीविका चलाते हैं, जबकि यदि ग्रामीण इन जड़ी-बूटियों का कृषिकरण करें तो अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। कार्यशाला में वैज्ञानिकों ने ग्रामीणों को कुटकी, जटामासी एवं अतीस की दस हजार पौध बांटी। इस मौके पर डा. बीएस मेगवाल, विक्रम रावत, राजीव रंजन, शुभम भट्ट आदि मौजूद रहे।
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हैप्रेक के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. वीके पुरोहित ने कहा कि जड़ी-बूटियों का अंधाधुंध विदोहन हिमालय के पर्यावरण संतुलन के लिहाज से खतरनाक हो सकता है। अध्ययन में पता चला है कि ग्रामीण जड़ी-बूटियों का विदोहन कर बिचौलियों के हाथों औनेपौने दामों पर बेचकर अपनी आजीविका चलाते हैं, जबकि यदि ग्रामीण इन जड़ी-बूटियों का कृषिकरण करें तो अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। कार्यशाला में वैज्ञानिकों ने ग्रामीणों को कुटकी, जटामासी एवं अतीस की दस हजार पौध बांटी। इस मौके पर डा. बीएस मेगवाल, विक्रम रावत, राजीव रंजन, शुभम भट्ट आदि मौजूद रहे।
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