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सड़क व पुल की मांग को लेकर दिलसौड़ के ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन
Updated Tue, 11 Sep 2018 10:08 PM IST
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उत्तरकाशी। वर्षों बाद भी आपदा पुनर्निर्माण कार्य नहीं होने से आक्रोशित दिलसौड़ व चामकोट क्षेत्र के ग्रामीणों ने मंगलवार को कलक्ट्रेट परिसर में उग्र प्रदर्शन किया। जुलूस के रूप में पहुंचे ग्रामीणों ने शासन प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए जल्द ही दिलसौड़-चामकोट मोटर मार्ग तथा झूलापुल बनाने की मांग की।
मंगलवार को जुलूस के रूप में कलक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों ने दिलसौड़ व चामकोट क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान ग्रामीणों ने डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर बताया कि वर्ष 2013 की आपदा में दिलसौड़-चामकोट मोटर मार्ग ध्वस्त हो गया था, जिसके चलते चामकोट गांव अलग-थलग पड़ गया है। सरकार ने चामकोट में झूला पुल बनाने और क्षतिग्रस्त सड़क का नवनिर्माण कराने की घोषणा की थी, लेकिन आपदा के पांच साल बाद भी मोटर मार्ग व झूला पुल का निर्माण शुरू नहीं हुआ है। चामकोट के ग्रामीण ट्राली के सहारे जोखिम भरी आवाजाही करने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2016 में दिलसौड़ ग्राम सभा के पंचायती चौक का पुश्ता भी क्षतिग्रस्त हो गया था, जिससे गांव के चौक और कुछ भवनों पर खतरा मंडरा रहा है। आक्रोशित ग्रामीणों ने कहा कि अगर 15 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण सरकार के खिलाफ उग्र आंदोलन करेंगे। 25 सितंबर को धरना प्रदर्शन कर लोनिवि कार्यालय में तालाबंदी भी की जाएगी। प्रदर्शन करने वालों में विजयपाल महर, हरि सिंह, जशोदा देवी, धूम सिंह, शारदा देवी, भुवनेश्वरी देवी, प्रेम सिंह, लक्ष्मण सिंह, संगीता देवी, राजेंद्री देवी आदि ग्रामीण शामिल थे।
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मंगलवार को जुलूस के रूप में कलक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों ने दिलसौड़ व चामकोट क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान ग्रामीणों ने डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर बताया कि वर्ष 2013 की आपदा में दिलसौड़-चामकोट मोटर मार्ग ध्वस्त हो गया था, जिसके चलते चामकोट गांव अलग-थलग पड़ गया है। सरकार ने चामकोट में झूला पुल बनाने और क्षतिग्रस्त सड़क का नवनिर्माण कराने की घोषणा की थी, लेकिन आपदा के पांच साल बाद भी मोटर मार्ग व झूला पुल का निर्माण शुरू नहीं हुआ है। चामकोट के ग्रामीण ट्राली के सहारे जोखिम भरी आवाजाही करने को मजबूर हैं।
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ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2016 में दिलसौड़ ग्राम सभा के पंचायती चौक का पुश्ता भी क्षतिग्रस्त हो गया था, जिससे गांव के चौक और कुछ भवनों पर खतरा मंडरा रहा है। आक्रोशित ग्रामीणों ने कहा कि अगर 15 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण सरकार के खिलाफ उग्र आंदोलन करेंगे। 25 सितंबर को धरना प्रदर्शन कर लोनिवि कार्यालय में तालाबंदी भी की जाएगी। प्रदर्शन करने वालों में विजयपाल महर, हरि सिंह, जशोदा देवी, धूम सिंह, शारदा देवी, भुवनेश्वरी देवी, प्रेम सिंह, लक्ष्मण सिंह, संगीता देवी, राजेंद्री देवी आदि ग्रामीण शामिल थे।
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