{"_id":"5b97ef89867a557ed04912bd","slug":"15366838977-utter-kashi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"भरत सिंह के प्रयास से हिमरौल गांव में खुले विलेज टूरिज्म के रास्ते","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भरत सिंह के प्रयास से हिमरौल गांव में खुले विलेज टूरिज्म के रास्ते
Updated Tue, 11 Sep 2018 10:08 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नौगांव (उत्तरकाशी)। हिमरौल गांव में विलेज टूरिज्म की कवायद रंग ला रही है। गांव में पहली बार पहुंचे पर्यटकों का स्वागत कर ग्रामीणों ने उन्हें क्षेत्र के पर्यटन स्थलों की सैर कराई और अपने घरों में ठहराकर पारंपरिक व्यंजन परोसे।
बता दें कि हिमरौल गांव के प्रगतिशील किसान भरत सिंह राणा ने लंबी तैयारी के बाद इसी माह से ग्रामीण पर्यटन की शुरूआत की है। बीते हफ्ते राजस्थान के छह पर्यटकों का दल गांव में पहुंचा। गांव में पहली बार पर्यटकों के पहुंचने पर उत्साहित ग्रामीणों ने उनका पारंपरिक रीति रिवाज के साथ स्वागत किया। सभी पर्यटकों को पारंपरिक काष्ठकला से निर्मित घरों में ठहरा कर क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति की जानकारी दी गई। इसके साथ ही मंडुवे की रोटी, लाल चावल, झंगोरे की खीर, सेब का आचार, अरसा, तिल की चटनी आदि पारंपरिक व्यंजन भी परोसे गए। इसके बाद उन्हें पैदल ट्रैक के जरिए देवराणा स्थित रुद्रेश्वर देवता के प्राचीन मंदिर के दर्शन कराए गए।
इन पर्यटकों ने गांव में बनाए गए आदर्श उद्यान में हर्बल चाय, जड़ी बूटी, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, सेब के बागीचे आदि को नजदीक से देखकर इस बारे में जानकारी हासिल की। दल में शामिल मधु गुप्ता, गौरी खेतान, विक्की गुप्ता आदि पर्यटकों ने बताया कि वह लोग नाग टिब्बा घूमने आए थे, जहां पर्यटन कारोबारी ओम प्रकाश के माध्यम से उन्हें हिमरौल गांव की जानकारी मिली थी। उन्होंने कहा कि हिमरौल गांव की लोक संस्कृति व प्राकृतिक सौंदर्य के साथ ही ग्रामीणों के अतिथि सत्कार से मिले सुखद अहसास को वह जीवन भर याद रखेंगे। उन्होंने राजस्थान लौटकर अपने मित्रों व परिजनों को भी उत्तरकाशी में विलेज टूरिज्म का आनंद लेने की सलाह देने की बात कही।
विज्ञापन
विज्ञापन
बता दें कि हिमरौल गांव के प्रगतिशील किसान भरत सिंह राणा ने लंबी तैयारी के बाद इसी माह से ग्रामीण पर्यटन की शुरूआत की है। बीते हफ्ते राजस्थान के छह पर्यटकों का दल गांव में पहुंचा। गांव में पहली बार पर्यटकों के पहुंचने पर उत्साहित ग्रामीणों ने उनका पारंपरिक रीति रिवाज के साथ स्वागत किया। सभी पर्यटकों को पारंपरिक काष्ठकला से निर्मित घरों में ठहरा कर क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति की जानकारी दी गई। इसके साथ ही मंडुवे की रोटी, लाल चावल, झंगोरे की खीर, सेब का आचार, अरसा, तिल की चटनी आदि पारंपरिक व्यंजन भी परोसे गए। इसके बाद उन्हें पैदल ट्रैक के जरिए देवराणा स्थित रुद्रेश्वर देवता के प्राचीन मंदिर के दर्शन कराए गए।
विज्ञापन
इन पर्यटकों ने गांव में बनाए गए आदर्श उद्यान में हर्बल चाय, जड़ी बूटी, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, सेब के बागीचे आदि को नजदीक से देखकर इस बारे में जानकारी हासिल की। दल में शामिल मधु गुप्ता, गौरी खेतान, विक्की गुप्ता आदि पर्यटकों ने बताया कि वह लोग नाग टिब्बा घूमने आए थे, जहां पर्यटन कारोबारी ओम प्रकाश के माध्यम से उन्हें हिमरौल गांव की जानकारी मिली थी। उन्होंने कहा कि हिमरौल गांव की लोक संस्कृति व प्राकृतिक सौंदर्य के साथ ही ग्रामीणों के अतिथि सत्कार से मिले सुखद अहसास को वह जीवन भर याद रखेंगे। उन्होंने राजस्थान लौटकर अपने मित्रों व परिजनों को भी उत्तरकाशी में विलेज टूरिज्म का आनंद लेने की सलाह देने की बात कही।
विज्ञापन