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वरुणावत से खतरे के बावजूद तलहटी में धड़ल्ले से हो रहे अवैध निर्माण
Updated Sun, 24 Jun 2018 10:36 PM IST
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उत्तरकाशी। एक ओर तो वरुणावत भूस्खलन से खतरा बताते हुए सरकार यहां फिर से करोड़ों रुपये खर्च करने की तैयारी में है, तो दूसरी ओर वरुणावत की तलहटी में बफर जोन वाले हिस्से में धड़ल्ले से अवैध निर्माण चल रहा है। साथ ही वरुणावत के रामलीला मैदान वाले सूट के नीचे जियो ग्रिड वाल के पीछे सब्जी मंडी शिफ्ट करने पर भी सवाल उठ रहे हैं।
वर्ष 2003 में वरुणावत भूस्खलन ने नगर में भारी तबाही मचाई थी। तब करीब 70 करोड़ रुपये की लागत से वरुणावत पर्वत का ट्रीटमेंट करने के साथ ही पहाड़ की तलहटी में तांबाखानी से लेकर मस्जिद मोहल्ले तक के हिस्से को बफर जोन घोषित कर यहां किसी भी तरह के निर्माण पर प्रतिबंध लगाया गया था। इसके बावजूद इन 15 सालों में यहां बड़े पैमाने पर निर्माण हुए और अब भी धड़ल्ले से हो रहे हैं। इस अवधि में यहां नए पट्टे तो जारी नहीं हुए, लेकिन पांच अवैध कब्जों को प्रशासन द्वारा फ्रीहोल्ड कर दिया गया। तांबाखानी वाले छोर पर बरसात में भूस्खलन का दायरा बढ़ने से शीर्ष पर हुआ करोड़ों का ट्रीटमेंट कार्य भी क्षतिग्रस्त होने से नीचे आबाद बस्ती पर खतरा अभी बरकरार है। इसीलिए तांबाखानी वाले हिस्से में अब 6.62 करोड़ रुपये लागत से ट्रीटमेंट की तैयारी चल रही है।
वरुणावत ट्रीटमेंट के तहत बस अड्डे के पास जियो ग्रिड वाल का निर्माण भी कराया गया था। यहां जमा होने वाले मलबे की निकासी के लिए छोड़ा गया रास्ता कब्जा कर लोगों ने अवैध निर्माण कर डाले और अब प्रशासन द्वारा नगर से अतिक्रमण हटाने के नाम पर प्रभावित व्यापारियों को जियो ग्रिड वाल के पीछे वाली जमीन पर शिफ्ट करने की तैयारी भी हैरान करने वाली है।
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कोट..
वरुणावत की तलहटी में हो रहे अवैध निर्माणों को पूर्व में ढहाया गया था। इसके बाद भी यदि अवैध निर्माण हो रहे हैं, तो इन्हें दिखवाया जाएगा। जियो ग्रिड वाल के पीछे सिर्फ अस्थायी व्यवस्था करने की बात हो रही है।
-देवेंद्र नेगी, एसडीएम भटवाड़ी उत्तरकाशी।
उत्तरकाशी से पंकज गुप्ता।
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वर्ष 2003 में वरुणावत भूस्खलन ने नगर में भारी तबाही मचाई थी। तब करीब 70 करोड़ रुपये की लागत से वरुणावत पर्वत का ट्रीटमेंट करने के साथ ही पहाड़ की तलहटी में तांबाखानी से लेकर मस्जिद मोहल्ले तक के हिस्से को बफर जोन घोषित कर यहां किसी भी तरह के निर्माण पर प्रतिबंध लगाया गया था। इसके बावजूद इन 15 सालों में यहां बड़े पैमाने पर निर्माण हुए और अब भी धड़ल्ले से हो रहे हैं। इस अवधि में यहां नए पट्टे तो जारी नहीं हुए, लेकिन पांच अवैध कब्जों को प्रशासन द्वारा फ्रीहोल्ड कर दिया गया। तांबाखानी वाले छोर पर बरसात में भूस्खलन का दायरा बढ़ने से शीर्ष पर हुआ करोड़ों का ट्रीटमेंट कार्य भी क्षतिग्रस्त होने से नीचे आबाद बस्ती पर खतरा अभी बरकरार है। इसीलिए तांबाखानी वाले हिस्से में अब 6.62 करोड़ रुपये लागत से ट्रीटमेंट की तैयारी चल रही है।
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वरुणावत ट्रीटमेंट के तहत बस अड्डे के पास जियो ग्रिड वाल का निर्माण भी कराया गया था। यहां जमा होने वाले मलबे की निकासी के लिए छोड़ा गया रास्ता कब्जा कर लोगों ने अवैध निर्माण कर डाले और अब प्रशासन द्वारा नगर से अतिक्रमण हटाने के नाम पर प्रभावित व्यापारियों को जियो ग्रिड वाल के पीछे वाली जमीन पर शिफ्ट करने की तैयारी भी हैरान करने वाली है।
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वरुणावत की तलहटी में हो रहे अवैध निर्माणों को पूर्व में ढहाया गया था। इसके बाद भी यदि अवैध निर्माण हो रहे हैं, तो इन्हें दिखवाया जाएगा। जियो ग्रिड वाल के पीछे सिर्फ अस्थायी व्यवस्था करने की बात हो रही है।
-देवेंद्र नेगी, एसडीएम भटवाड़ी उत्तरकाशी।
उत्तरकाशी से पंकज गुप्ता।