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पुस्तक संस्कृति को विकसित करने पर दिया जोर
Updated Fri, 13 Apr 2018 10:40 PM IST
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उत्तरकाशी। युवा संघर्षशील समिति की ओर से ‘पुस्तकालय की आवश्यकता’ विषय पर एक शिक्षक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं की ओर से डिजिटल युग में पुस्तकों के अस्तित्व को जीवंत बनाए रखने को लेकर चिंतन किया गया।
अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सीईओ अनुराग बेहर ने कहा कि डिजिटल माध्यम जानकारी का भंडार बन सकते हैं, लेकिन एक पुस्तक इन बिखरी हुई जानकारियों का सार होती है। इस दौरान उपखंड शिक्षा अधिकारी हर्षा रावत ने अपने घरों, विद्यालयों आदि स्थानों पर पुस्तकालय विकसित कर पुस्तक संस्कृति को फिर से जीवित करने की अपील की। कार्यक्रम में करन सिंह, मोहन स्नेही, संजय सेमवाल, विशालमणी भट्ट, मनोरमा कश्यप, अनूप दूबे, स्वराज देवी, ममता शाह, नरेश कुमार, उदय सिंह रावत, लोकेंद्र सेमवाल आदि मौजूद रहे।
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अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सीईओ अनुराग बेहर ने कहा कि डिजिटल माध्यम जानकारी का भंडार बन सकते हैं, लेकिन एक पुस्तक इन बिखरी हुई जानकारियों का सार होती है। इस दौरान उपखंड शिक्षा अधिकारी हर्षा रावत ने अपने घरों, विद्यालयों आदि स्थानों पर पुस्तकालय विकसित कर पुस्तक संस्कृति को फिर से जीवित करने की अपील की। कार्यक्रम में करन सिंह, मोहन स्नेही, संजय सेमवाल, विशालमणी भट्ट, मनोरमा कश्यप, अनूप दूबे, स्वराज देवी, ममता शाह, नरेश कुमार, उदय सिंह रावत, लोकेंद्र सेमवाल आदि मौजूद रहे।
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