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धार्मिक पर्यटन का केंद्र बन सकता है गंगनाणी कुंड गंगा-यमुना का प्रथम संगम

Thu, 15 Feb 2018 10:20 PM IST
Updated Thu, 15 Feb 2018 10:20 PM IST
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धार्मिक पर्यटन का केंद्र बन सकता है गंगनाणी कुंड गंगा-यमुना का प्रथम संगम
बड़कोट (उत्तरकाशी)। धार्मिक आध्यात्मिक महत्व के बावजूद गंगनाणी का कुंड उपेक्षा का शिकार होकर रह गया है। यहां गंगा एवं यमुना का प्रथम संगम और निकट में थान गांव स्थित परशुराम भगवान के पिता महर्षि जमदग्नि के आश्रम में कल्पवृक्ष की मौजूदगी जैसे पौराणिक तथ्यों से आमजन एवं तीर्थयात्री अनभिज्ञ हैं।
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कुंड के पुजारी हरीश डिमरी ने बताया कि स्कंद पुराण के अनुसार यहां थान गांव में भगवान परशुराम के पिता जमदग्नि ऋषि का आश्रम था। वह अपनी पत्नी रेणुका के स्नान के लिए रोजाना गंगा भागीरथी से गंगा जल लेकर आते थे। वृद्धावस्था में कठिनाई होने पर उन्होंने तप से गंगा की धारा को गंगनाणी में अवतरित किया था। थान गांव स्थित आश्रम में आज भी कल्पवृक्ष मौजूद है, जो वर्षभर फलों से लदा रहता है। हर वर्ष फाल्गुन संक्रांति के अवसर पर यहां वसंत मेला (कुंड की जातर) का आयोजन भी किया जाता है। लोगों का मानना है कि यदि सरकार इन स्थलों का विकास एवं प्रचार-प्रसार करे, तो यात्रा सीजन में यमुनोत्री यात्रा मार्ग पर यह धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकता है।
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