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स्वीकृति के बाद भी सड़के नहीं बनने से जनता में पनप रहा रोष
Updated Sun, 11 Feb 2018 11:08 PM IST
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उत्तरकाशी। जिले के दर्जनों गांव आजादी के दशकों बाद भी सड़क मार्ग से अछूते हैं। स्वीकृति के बाद भी कई गांवों की सड़क नहीं बन पाने से ग्रामीणों का सब्र अब टूटने लगा है। जगह-जगह ग्रामीण सड़क के लिए आंदोलन करने को मजबूर हैं। स्वीकृति के बाद भी मामूली विवाद एवं तकनीकी अड़चनों में उलझी सड़कों का निर्माण शुरू नहीं करा पाने से प्रशासन एवं इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों की क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं।
निम बैंड से पोखरी गांव तक महज 800 मीटर सड़क बनवाने के लिए पोखरी के ग्रामीण बीते 18 दिन से कलक्ट्रेट में धरने पर डटे हैं, जबकि इस सड़क के विरोध में डांग के ग्रामीण बीते दस दिन से सड़क निर्माण स्थल पर ही धरना दे रहे हैं। दोनों गांवों का विवाद हाईकोर्ट तक पहुंचा। जहां से पूर्व में चिह्नित पेड़ों के कटान कर सड़क निर्माण को हरी झंडी मिली थी। इसके बावजूद अभी तक सड़क का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। अब यह लड़ाई विकास बनाम पर्यावरण का रूप लेती जा रही है। चिन्यालीसौड़ ब्लाक के उलण गांव तक सड़क की मांग पर ग्रामीण बीते 40 दिन से क्रमिक अनशन पर डटे हैं। कोई सुनवाई नहीं होने पर ग्रामीणों ने 26 फरवरी से संबंधित विभागों के दफ्तरों पर तालाबंदी की चेतावनी दी है।
ब्रह्मखाल क्षेत्र में मांडियासारी गांव के लिए स्वीकृत सड़क का निर्माण शुरू नहीं होने पर ग्रामीणों ने 15 फरवरी के बाद गांव में ही धरना शुरू करने की चेतावनी दी है। इधर, धनारी क्षेत्र में माज्यासारी से भिनौली मोटर मार्ग का निर्माण शुरू नहीं होने पर ग्रामीणों ने 15 दिन बाद देवीधार में गंगोत्री हाईवे पर चक्काजाम का अल्टीमेटम प्रशासन को दिया है। इनके अलावा भी कई अन्य गांवों में स्वीकृत सड़कों का निर्माण अधर में लटका होने से ग्रामीणों में रोष है।
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कोट...
शांति व्यवस्था भंग न हो इस वजह से पोखरी गांव की सड़क बनने में कुछ विलंब हो रहा है। उलण गांव की सड़क के लिए वन भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। अन्य सड़कों के लिए एसडीएम डुंडा को मौके पर जाकर पड़ताल करने के निर्देश दिए गए हैं।
डा. आशीष चौहान, डीएम उत्तरकाशी।
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निम बैंड से पोखरी गांव तक महज 800 मीटर सड़क बनवाने के लिए पोखरी के ग्रामीण बीते 18 दिन से कलक्ट्रेट में धरने पर डटे हैं, जबकि इस सड़क के विरोध में डांग के ग्रामीण बीते दस दिन से सड़क निर्माण स्थल पर ही धरना दे रहे हैं। दोनों गांवों का विवाद हाईकोर्ट तक पहुंचा। जहां से पूर्व में चिह्नित पेड़ों के कटान कर सड़क निर्माण को हरी झंडी मिली थी। इसके बावजूद अभी तक सड़क का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। अब यह लड़ाई विकास बनाम पर्यावरण का रूप लेती जा रही है। चिन्यालीसौड़ ब्लाक के उलण गांव तक सड़क की मांग पर ग्रामीण बीते 40 दिन से क्रमिक अनशन पर डटे हैं। कोई सुनवाई नहीं होने पर ग्रामीणों ने 26 फरवरी से संबंधित विभागों के दफ्तरों पर तालाबंदी की चेतावनी दी है।
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ब्रह्मखाल क्षेत्र में मांडियासारी गांव के लिए स्वीकृत सड़क का निर्माण शुरू नहीं होने पर ग्रामीणों ने 15 फरवरी के बाद गांव में ही धरना शुरू करने की चेतावनी दी है। इधर, धनारी क्षेत्र में माज्यासारी से भिनौली मोटर मार्ग का निर्माण शुरू नहीं होने पर ग्रामीणों ने 15 दिन बाद देवीधार में गंगोत्री हाईवे पर चक्काजाम का अल्टीमेटम प्रशासन को दिया है। इनके अलावा भी कई अन्य गांवों में स्वीकृत सड़कों का निर्माण अधर में लटका होने से ग्रामीणों में रोष है।
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शांति व्यवस्था भंग न हो इस वजह से पोखरी गांव की सड़क बनने में कुछ विलंब हो रहा है। उलण गांव की सड़क के लिए वन भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। अन्य सड़कों के लिए एसडीएम डुंडा को मौके पर जाकर पड़ताल करने के निर्देश दिए गए हैं।
डा. आशीष चौहान, डीएम उत्तरकाशी।