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जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण के लिए मुखर होने लगी क्षेत्र की जनता
Updated Thu, 08 Feb 2018 10:28 PM IST
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उत्तरकाशी। जनपद में जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण के लिए क्षेत्र की जनता लामबंद होने लगी है। पहले 50 फीसद से अधिक बन चुकी लोहारीनाग-पाला एवं पाला मनेरी परियोजना को बंद करने और फिर ईको सेंसिटिव जोन के नोटिफिकेशन में 2 मेगावाट से अधिक क्षमता की जल विद्युत परियोजनाओं पर रोक लगाया जाना स्थानीय लोगों के गले नहीं उतर रहा है।
वर्ष 2010 में सरकार ने 600 मेगावाट की लोहारीनाग-पाला, 480 मेगावाट की पाला-मनेरी तथा 391 मेगावाट की भैरोंघाटी जल विद्युत परियोजना को बंद करने का निर्णय लिया था। तब तक लोहारीनाग-पाला और पाला-मनेरी परियोजना का काफी निर्माण कार्य हो चुका था। अब भी लोहारीनाग-पाला परियोजना की खुदी और अधूरी पड़ी कई किमी सुरंगें खतरा बनी हुई हैं। वर्ष 2012 में ईको सेंसिटिव जोन का गजट नोटिफिकेशन जारी होने के बाद तो यहां 2 मेगावाट से अधिक क्षमता की परियोजनाओं पर भी पाबंदी लगा दी गई है। ऐसे में बिजली परियोजनाओं के माध्यम से पैदा होने वाले रोजगार के अवसर एवं तरक्की के रास्ते छिन जाने से क्षेत्र की जनता ठगा हुआ महसूस कर रही है।
इस संबंध में गंगोत्री, हर्षिल क्षेत्र की जनता ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव को ज्ञापन प्रेषित कर बंद परियोजनाएं दोबारा शुरू कराने व गंगा भागीरथी की सहायक नदियों पर 25 मेगावाट क्षमता तक की परियोजनाओं के निर्माण की अनुमति की मांग की है। स्थानीय लोगों ने पूर्व में स्वीकृत रन ऑफ द रीवर वाली ककोड़ागाड पर 12.5 मेगावाट, सियांगाड (11.5 मेगावाट) तथा जालंधरी (24 मेगावाट) लघु जल विद्युत परियोजनाओं का निर्माण शीघ्र शुरू कराने की मांग की है। ज्ञापन पर गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल, भटवाड़ी के कनिष्ठ उपप्रमुख संजय पंवार, माधवेंद्र रावत, जयवीर नेगी, राजेश रौतेला, बीना देवी, विमला पंवार आदि के हस्ताक्षर हैं।
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वर्ष 2010 में सरकार ने 600 मेगावाट की लोहारीनाग-पाला, 480 मेगावाट की पाला-मनेरी तथा 391 मेगावाट की भैरोंघाटी जल विद्युत परियोजना को बंद करने का निर्णय लिया था। तब तक लोहारीनाग-पाला और पाला-मनेरी परियोजना का काफी निर्माण कार्य हो चुका था। अब भी लोहारीनाग-पाला परियोजना की खुदी और अधूरी पड़ी कई किमी सुरंगें खतरा बनी हुई हैं। वर्ष 2012 में ईको सेंसिटिव जोन का गजट नोटिफिकेशन जारी होने के बाद तो यहां 2 मेगावाट से अधिक क्षमता की परियोजनाओं पर भी पाबंदी लगा दी गई है। ऐसे में बिजली परियोजनाओं के माध्यम से पैदा होने वाले रोजगार के अवसर एवं तरक्की के रास्ते छिन जाने से क्षेत्र की जनता ठगा हुआ महसूस कर रही है।
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इस संबंध में गंगोत्री, हर्षिल क्षेत्र की जनता ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव को ज्ञापन प्रेषित कर बंद परियोजनाएं दोबारा शुरू कराने व गंगा भागीरथी की सहायक नदियों पर 25 मेगावाट क्षमता तक की परियोजनाओं के निर्माण की अनुमति की मांग की है। स्थानीय लोगों ने पूर्व में स्वीकृत रन ऑफ द रीवर वाली ककोड़ागाड पर 12.5 मेगावाट, सियांगाड (11.5 मेगावाट) तथा जालंधरी (24 मेगावाट) लघु जल विद्युत परियोजनाओं का निर्माण शीघ्र शुरू कराने की मांग की है। ज्ञापन पर गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल, भटवाड़ी के कनिष्ठ उपप्रमुख संजय पंवार, माधवेंद्र रावत, जयवीर नेगी, राजेश रौतेला, बीना देवी, विमला पंवार आदि के हस्ताक्षर हैं।
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