{"_id":"5a106bd94f1c1b86698bc7b2","slug":"151102573310-utter-kashi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दूसरे दिन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ वॉलीबाल और कबड्डी खेल रहा आकर्षण का केंद्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दूसरे दिन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ वॉलीबाल और कबड्डी खेल रहा आकर्षण का केंद्र
Updated Sat, 18 Nov 2017 10:50 PM IST
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मोरी (उत्तरकाशी)। मोरी में अमर उजाला के सहयोग से आयोजित देवांशी मेले का दूसरा दिन खेलों के नाम रहा। इस दौरान कबड्डी एवं वॉलीबाल प्रतियोगिताएं हुई, जिनमें सभी टीमों ने अपना दमखम दिखाया। देवांशी स्कूल के बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर मेले में पहुंचे दर्शकों का मन मोह लिया। मेले में सीनर्जी अस्पताल देहरादून से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने ग्रामीणों के स्वास्थ्य की नि:शुल्क जांच की और दवाएं भी बांटी। मेले में आयोजकों की ओर से मोरी ब्लॉक के सुदूरवर्ती क्षेत्र की समस्याओं को लेकर केंद्र एवं प्रदेश सरकार को अवगत कराने का निर्णय भी लिया गया।
राजकीय इंटर कॉलेज मोरी परिसर में आयोजित देवांशी खेल एवं सांस्कृतिक मेले में दूसरे दिन कबड्डी एवं वालीबॉल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इस दौरान देवांशी स्कूल के बच्चों ने परंपरागत पहनावे में लोकगीतों पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर मेले में आए लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
मेला निदेशक पूर्व मंत्री नारायण सिंह राणा ने कहा कि मेले का उद्देश्य एसटी, ओबीसी क्षेत्र रवॉई जौनपुर एवं जौनसार बावर की प्रतिभाओं की पहचान कर उनको राष्ट्रीय स्तर पर उभारने का प्रयास किया जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता दुर्गेश लाल ने कहा कि मेले का आयोजन निश्चित ही मोरी के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। मेले में सीनर्जी अस्पताल देहरादून के विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. एसके वरुण के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने सुदूरवर्ती गांवों से पहुंचे ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांचकर नि:शुल्क दवाएं बांटी। इनमें अधिकांश ग्रामीण खांसी, दमा और हृदय रोग से पीड़ित थे। दूसरे दिन मंच से विजेंद्र सिंह रावत, बवीता पुंडीर, डा शिल्पा ने भी विचार व्यक्त किए।
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खिलाड़ियों को सर्टिफिकेट देगी क्रीड़ा भारती
तृतीय देवांशी मेले में प्रतिभाग कर रहे करीब 500 खिलाड़ियों को सरकारी विभागों में नौकरी पाने का सुनहरा अवसर मिल गया है। कब्बड्डी, वॉलीबाल आदि प्रतियोगिताओ में भाग ले रहे सभी युवाओं को क्रीड़ा भारती सर्टिफिकेट देगी। इसके आधार पर इन खिलाड़ियों को भविष्य में सरकारी विभागों में नौकरी मिलना संभव होगा।
क्रीड़ा भारती के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नारायण सिंह राणा ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा क्रीड़ा भारती को खेल विभाग के एक महत्वपूर्ण अंग का दर्जा दिया गया है। इसके तहत पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को खोजा जाएगा जिन्हें क्रीड़ा भारती द्वारा सर्टिफिकेट दिया जाएगा। ये सर्टिफिकेट खेल विभाग के सर्टिफिकेट के बराबर ही महत्व के हैं।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। इनमें नर्सरी से यूनिवर्सिटी शिक्षा तक खेल शिक्षा अनिवार्य होगी। हर सरकारी विभाग में 4 प्रतिशत स्पोर्ट्स कोटा होगा। इंटरनेशनल प्रतियोगिता में मेडल जीतने वालों को प्रशासनिक पद दिया जाएगा। साथ ही स्नातक पूरी करने के लिए 4 साल का समय भी मिलेगा। जिला, राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर खेलने वालों को क्रमश: 1, 3 व 5 लाख रुपये मिलेंगे। देवांशी मेले में कलसी, चकराता, मोरी, पुरोला, नौगॉव, जौनपुर तथा बिंहार के खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। यह सभी एससी व ओबीसी में आते हैं। भविष्य में राज्य के अन्य पिछड़े व जनजाति क्षेत्र के युवाओं को भी मेले से जोड़ा जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों ने सिखाए युवाओं को खेल के गुर
मोरी क्षेत्र के पारंपरिक ठोड़ा (धनुष बाण) खेल को ओलंपिक स्तर की आर्चरी खेल का रूप देने का प्रयास किया जा रहा है। तृतीय देवांशी मेले में पहुंचे अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों ने स्थानीय युवाओं को आर्चरी के गुर सिखाए। अंतरराष्ट्रीय मंच में कई पदक जीत चुके देहरादून निवासी जय सिंह तथा उनके गुरु जसप्रीत सिंह ने बताया कि धनुष बाण के खेल में एकाग्रता और निशाना को परखने का हुनर होना चाहिए जिसमें ग्रामीण अपने पारंपरिक खेल की वजह से माहिर हैं। इन्हें अगर थोड़ा प्रशिक्षण मिले तो ये राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और आर्चरी एसोसिएशन को इसमें सहयोग देना होगा। बता दें कि जय सिंह मूलत: हरियाणा के रहने वाले हैं, जो अब देहरादून में बस गए हैं और जसपाल राणा शूटिंग रेंज में प्रशिक्षण ले रहे। 2017 मार्च में ओडिशा में हुई सब जूनियर नेशनल में ब्रांज मेडल जीता है ।
2017 अक्तूबर में गोवा में यूनाइटेड इंडिया गेम्स में गोल्ड जीता है। अब 2 दिसंबर को थाईलैंड में इंटरनेशनल ओपन गेम में प्रतिभाग करने जाएंगे।
दरअसल, ठोड़ा खेल मोरी और हिमाचल के पर्वतीय क्षेत्र का पुराना खेल है। इसमें दो टीम धनुष बाण लेकर एक दूसरे के पैर पर निशाना लगाते हैं। इसके आधार पर अंक मिलते हैं। चोट से बचने के लिए पैर पर चमड़े का कवच लगाया जाता है। मान्यता के अनुसार यह खेल युद्ध कला और शिकार की कला को बेहतर करने के लिए शुरू किया गया है, जिसने आज पारंपरिक खेल का रूप ले लिया।
शासन-प्रशासन ने बनाई दूरी
लोक संस्कृति और स्थानीय प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए आयोजित देवांशी मेले से शासन प्रशासन की दूरी कई सवाल खड़े करती है। मेले के उद्घाटन समारोह में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के न आने तथा बिजली, पानी आदि सुविधाओं में कमी पर मेला आयोजक समिति ने नाराजगी जाहिर की है। मेले के संरक्षक नारायण सिंह राणा ने कहा कि मेले को मोरी में कराने का उद्देश्य मंत्रियों तथा अधिकारियों को यहां की समस्याओं से अवगत कराना था। इसके लिए हमनेे मुख्यमंत्री को मेले में आने के लिए कई बार आमंत्रित किया, लेकिन वह नहीं आए। पर्यटन मंत्री को हेलीकॉप्टर से आना था लेकिन मौसम खराब होने की वजह से नहीं आ पाए, जबकि वह चाहते तो सड़क मार्ग से आ सकते थे। वहीं, जिला प्रशासन की तरफ से भी न तो जिलाधिकारी आए और ना ही उपजिलाधिकारी आए। इससे मेला समिति सहित आम जनता को भी काफी निराशा हुई है। उन्होंने कहा कि रवाईं घाटी की हमेशा से ही शासन प्रशासन द्वारा अनदेखी की जाती रही है। इस वजह से यह क्षेत्र पिछड़ गया है और यहां की जनता की समस्या दूर नहीं हो रही है।
कबड्डी : खिताब के लिए भिड़ेंगी कालसी-जौनपुर की टीमें
मोरी। सीनियर बालकों की कबड्डी में कालसी और जौनपुर की टीम फाइनल में पहुंच गई है। सेमीफ ाइनल मुकाबले में कालसी ने बिंहार को 50-13 से हराया। जौनपुर ने चकराता को 25-19 से हराया। जूनियर बालकों की कबड्डी में कालसी ने नौगांव को 38-14 से हराया। जौनपुर ने बिंहार को 26-21 से हराया। मोरी ने पुरोला को 20-18 से हराया। इस तरह कालसी, जौनपुर, मोरी और चकराता सेमीफ ाइनल में पहुंचे। बालिकाओं की ओपन स्पर्धा में चकराता ने मोरी को 30-14 से शिकस्त दी। कालसी ने नौगांव को 24-8 से हराया।
वहीं वॉलीबाल में कालसी और पुरोला फ ाइनल खेला जाएगा। सेमीफ ाइनल में कालसी ने मोरी को 25-13 और 25-16 से हराया। पुरोला ने जौनपुर को 25-18 और 15-25 और 15-11 से हराया। तीसरे स्थान में मोरी ने कब्जा किया।
देवांशी मेले में पहुंचे सीएम के ओएसडी
मोरी। तृतीय देवांशी मेले के दूसरे दिन मुख्यमंत्री के ओएसडी धीरेंद्र पंवार पहुंचे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में जहां भी भाजपा के विधायक नहीं है उन क्षेत्रों का जिम्मा स्वयं सीएम ने उठाया है। उन्होंने कहा कि पलायन आज पहाड़ों की मुख्य समस्या बन गई है, जिसे लेकर सरकार युद्ध स्तर पर कार्य कर रही है। मोरी क्षेत्र की समस्याओं व मांगों के बारे में उन्होंने सीएम को अवगत कराने की बात कही।
देवांशी मेले के आयोजन व संस्कृति बचाने के लिए नारायण सिंह राणा की प्रशंसा करते हुए उन्होंने भविष्य में हर संभव सहयोग का वादा किया। सीएम के कार्यक्रम में न पहुंचने पर उन्होंने बताया कि कुछ जरूरी काम की वजह से सीएम को अन्यत्र जाना पड़ा था।
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राजकीय इंटर कॉलेज मोरी परिसर में आयोजित देवांशी खेल एवं सांस्कृतिक मेले में दूसरे दिन कबड्डी एवं वालीबॉल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इस दौरान देवांशी स्कूल के बच्चों ने परंपरागत पहनावे में लोकगीतों पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर मेले में आए लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
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मेला निदेशक पूर्व मंत्री नारायण सिंह राणा ने कहा कि मेले का उद्देश्य एसटी, ओबीसी क्षेत्र रवॉई जौनपुर एवं जौनसार बावर की प्रतिभाओं की पहचान कर उनको राष्ट्रीय स्तर पर उभारने का प्रयास किया जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता दुर्गेश लाल ने कहा कि मेले का आयोजन निश्चित ही मोरी के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। मेले में सीनर्जी अस्पताल देहरादून के विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. एसके वरुण के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने सुदूरवर्ती गांवों से पहुंचे ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांचकर नि:शुल्क दवाएं बांटी। इनमें अधिकांश ग्रामीण खांसी, दमा और हृदय रोग से पीड़ित थे। दूसरे दिन मंच से विजेंद्र सिंह रावत, बवीता पुंडीर, डा शिल्पा ने भी विचार व्यक्त किए।
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खिलाड़ियों को सर्टिफिकेट देगी क्रीड़ा भारती
तृतीय देवांशी मेले में प्रतिभाग कर रहे करीब 500 खिलाड़ियों को सरकारी विभागों में नौकरी पाने का सुनहरा अवसर मिल गया है। कब्बड्डी, वॉलीबाल आदि प्रतियोगिताओ में भाग ले रहे सभी युवाओं को क्रीड़ा भारती सर्टिफिकेट देगी। इसके आधार पर इन खिलाड़ियों को भविष्य में सरकारी विभागों में नौकरी मिलना संभव होगा।
क्रीड़ा भारती के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नारायण सिंह राणा ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा क्रीड़ा भारती को खेल विभाग के एक महत्वपूर्ण अंग का दर्जा दिया गया है। इसके तहत पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को खोजा जाएगा जिन्हें क्रीड़ा भारती द्वारा सर्टिफिकेट दिया जाएगा। ये सर्टिफिकेट खेल विभाग के सर्टिफिकेट के बराबर ही महत्व के हैं।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। इनमें नर्सरी से यूनिवर्सिटी शिक्षा तक खेल शिक्षा अनिवार्य होगी। हर सरकारी विभाग में 4 प्रतिशत स्पोर्ट्स कोटा होगा। इंटरनेशनल प्रतियोगिता में मेडल जीतने वालों को प्रशासनिक पद दिया जाएगा। साथ ही स्नातक पूरी करने के लिए 4 साल का समय भी मिलेगा। जिला, राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर खेलने वालों को क्रमश: 1, 3 व 5 लाख रुपये मिलेंगे। देवांशी मेले में कलसी, चकराता, मोरी, पुरोला, नौगॉव, जौनपुर तथा बिंहार के खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। यह सभी एससी व ओबीसी में आते हैं। भविष्य में राज्य के अन्य पिछड़े व जनजाति क्षेत्र के युवाओं को भी मेले से जोड़ा जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों ने सिखाए युवाओं को खेल के गुर
मोरी क्षेत्र के पारंपरिक ठोड़ा (धनुष बाण) खेल को ओलंपिक स्तर की आर्चरी खेल का रूप देने का प्रयास किया जा रहा है। तृतीय देवांशी मेले में पहुंचे अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों ने स्थानीय युवाओं को आर्चरी के गुर सिखाए। अंतरराष्ट्रीय मंच में कई पदक जीत चुके देहरादून निवासी जय सिंह तथा उनके गुरु जसप्रीत सिंह ने बताया कि धनुष बाण के खेल में एकाग्रता और निशाना को परखने का हुनर होना चाहिए जिसमें ग्रामीण अपने पारंपरिक खेल की वजह से माहिर हैं। इन्हें अगर थोड़ा प्रशिक्षण मिले तो ये राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और आर्चरी एसोसिएशन को इसमें सहयोग देना होगा। बता दें कि जय सिंह मूलत: हरियाणा के रहने वाले हैं, जो अब देहरादून में बस गए हैं और जसपाल राणा शूटिंग रेंज में प्रशिक्षण ले रहे। 2017 मार्च में ओडिशा में हुई सब जूनियर नेशनल में ब्रांज मेडल जीता है ।
2017 अक्तूबर में गोवा में यूनाइटेड इंडिया गेम्स में गोल्ड जीता है। अब 2 दिसंबर को थाईलैंड में इंटरनेशनल ओपन गेम में प्रतिभाग करने जाएंगे।
दरअसल, ठोड़ा खेल मोरी और हिमाचल के पर्वतीय क्षेत्र का पुराना खेल है। इसमें दो टीम धनुष बाण लेकर एक दूसरे के पैर पर निशाना लगाते हैं। इसके आधार पर अंक मिलते हैं। चोट से बचने के लिए पैर पर चमड़े का कवच लगाया जाता है। मान्यता के अनुसार यह खेल युद्ध कला और शिकार की कला को बेहतर करने के लिए शुरू किया गया है, जिसने आज पारंपरिक खेल का रूप ले लिया।
शासन-प्रशासन ने बनाई दूरी
लोक संस्कृति और स्थानीय प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए आयोजित देवांशी मेले से शासन प्रशासन की दूरी कई सवाल खड़े करती है। मेले के उद्घाटन समारोह में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के न आने तथा बिजली, पानी आदि सुविधाओं में कमी पर मेला आयोजक समिति ने नाराजगी जाहिर की है। मेले के संरक्षक नारायण सिंह राणा ने कहा कि मेले को मोरी में कराने का उद्देश्य मंत्रियों तथा अधिकारियों को यहां की समस्याओं से अवगत कराना था। इसके लिए हमनेे मुख्यमंत्री को मेले में आने के लिए कई बार आमंत्रित किया, लेकिन वह नहीं आए। पर्यटन मंत्री को हेलीकॉप्टर से आना था लेकिन मौसम खराब होने की वजह से नहीं आ पाए, जबकि वह चाहते तो सड़क मार्ग से आ सकते थे। वहीं, जिला प्रशासन की तरफ से भी न तो जिलाधिकारी आए और ना ही उपजिलाधिकारी आए। इससे मेला समिति सहित आम जनता को भी काफी निराशा हुई है। उन्होंने कहा कि रवाईं घाटी की हमेशा से ही शासन प्रशासन द्वारा अनदेखी की जाती रही है। इस वजह से यह क्षेत्र पिछड़ गया है और यहां की जनता की समस्या दूर नहीं हो रही है।
कबड्डी : खिताब के लिए भिड़ेंगी कालसी-जौनपुर की टीमें
मोरी। सीनियर बालकों की कबड्डी में कालसी और जौनपुर की टीम फाइनल में पहुंच गई है। सेमीफ ाइनल मुकाबले में कालसी ने बिंहार को 50-13 से हराया। जौनपुर ने चकराता को 25-19 से हराया। जूनियर बालकों की कबड्डी में कालसी ने नौगांव को 38-14 से हराया। जौनपुर ने बिंहार को 26-21 से हराया। मोरी ने पुरोला को 20-18 से हराया। इस तरह कालसी, जौनपुर, मोरी और चकराता सेमीफ ाइनल में पहुंचे। बालिकाओं की ओपन स्पर्धा में चकराता ने मोरी को 30-14 से शिकस्त दी। कालसी ने नौगांव को 24-8 से हराया।
वहीं वॉलीबाल में कालसी और पुरोला फ ाइनल खेला जाएगा। सेमीफ ाइनल में कालसी ने मोरी को 25-13 और 25-16 से हराया। पुरोला ने जौनपुर को 25-18 और 15-25 और 15-11 से हराया। तीसरे स्थान में मोरी ने कब्जा किया।
देवांशी मेले में पहुंचे सीएम के ओएसडी
मोरी। तृतीय देवांशी मेले के दूसरे दिन मुख्यमंत्री के ओएसडी धीरेंद्र पंवार पहुंचे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में जहां भी भाजपा के विधायक नहीं है उन क्षेत्रों का जिम्मा स्वयं सीएम ने उठाया है। उन्होंने कहा कि पलायन आज पहाड़ों की मुख्य समस्या बन गई है, जिसे लेकर सरकार युद्ध स्तर पर कार्य कर रही है। मोरी क्षेत्र की समस्याओं व मांगों के बारे में उन्होंने सीएम को अवगत कराने की बात कही।
देवांशी मेले के आयोजन व संस्कृति बचाने के लिए नारायण सिंह राणा की प्रशंसा करते हुए उन्होंने भविष्य में हर संभव सहयोग का वादा किया। सीएम के कार्यक्रम में न पहुंचने पर उन्होंने बताया कि कुछ जरूरी काम की वजह से सीएम को अन्यत्र जाना पड़ा था।