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मंदिरों से जोड़कर निकाले जा सकते हैं रोजगार के अवसर: डा. अनिल जोशी
Updated Sun, 15 Oct 2017 09:58 PM IST
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बड़कोट। पर्यावरणविद पद्मश्री डा. अनिल जोशी की ओर से प्रदेश के मंदिरों व तीर्थों को स्थानीय युवाओं के रोजगार से जोड़ने की मुहिम शुरू की गई है। इसके तहत उन्होंने यमुनोत्री धाम पहुंचकर युवाओं व तीर्थ पुरोहितों से बात कर इस मुहिम में साथ देने की बात कही। उन्होंने कहा कि योजना के लिए वे सीएम त्रिवेंद्र रावत से भी सरकारी स्तर पर सहयोग करने का आग्रह करेंगे।
डा. जोशी ने बताया कि रोजगार के लिए पढ़े-लिखे ग्रामीणों को पलायन करना पड़ रहा है। जब तक स्थानीय स्तर पर स्थानीय उत्पादों पर आधारित रोजगार को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा, तब तक प्रदेश की आर्थिकी मजबूत नहीं होगी। वैष्णों देवी के निकटस्थ गांव परथल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इसी मुहिम के तहत वहां के युवाओं को मंदिर के प्रसाद से जोड़ा गया था, जिससे गांव की आर्थिकी की तस्वीर बदली है। इसी तर्ज पर चारों धामों व हरिद्वार, ऋषिकेश सहित प्रदेश में मौजूद 685 मंदिरों में यह योजना लागू की जा सकती है। इनमें स्थानीय उत्पाद आधारित प्रसाद का वितरण किया जाए, तो श्रद्धालुओं से करोड़ों की आय अर्जित की जा सकती है। इसमें मंदिर के भीतर दिए जाने वाल प्रसाद से कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
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डा. जोशी ने बताया कि रोजगार के लिए पढ़े-लिखे ग्रामीणों को पलायन करना पड़ रहा है। जब तक स्थानीय स्तर पर स्थानीय उत्पादों पर आधारित रोजगार को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा, तब तक प्रदेश की आर्थिकी मजबूत नहीं होगी। वैष्णों देवी के निकटस्थ गांव परथल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इसी मुहिम के तहत वहां के युवाओं को मंदिर के प्रसाद से जोड़ा गया था, जिससे गांव की आर्थिकी की तस्वीर बदली है। इसी तर्ज पर चारों धामों व हरिद्वार, ऋषिकेश सहित प्रदेश में मौजूद 685 मंदिरों में यह योजना लागू की जा सकती है। इनमें स्थानीय उत्पाद आधारित प्रसाद का वितरण किया जाए, तो श्रद्धालुओं से करोड़ों की आय अर्जित की जा सकती है। इसमें मंदिर के भीतर दिए जाने वाल प्रसाद से कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
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