फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Uttarakhand was two years behind

दो साल पीछे गया उत्तराखंड

Sun, 30 Jun 2013 12:28 PM IST
सुधाकर भट्ट
सुधाकर भट्ट Updated Sun, 30 Jun 2013 12:28 PM IST
विज्ञापन
Uttarakhand was two years behind

जलप्रलय से उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के दो साल पीछे खिसक जाने की आशंका पैदा हो गई है। छोटे और कुटीर उद्योगों पर तो मार पड़ी ही है, प्रदेश का सर्विस सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यही क्षेत्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।

विज्ञापन


ऐसे में 12वीं पंचवर्षीय योजना के तहत छह प्रतिशत विकास दर छूने की उत्तराखंड की कोशिशों को भी झटका लग सकता है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि बदरी-केदार घाटी में हुई तबाही से चारधाम यात्रा की ब्रांडिंग प्रभावित हुई है और इसका असर प्रदेश पर पड़ना तय है।
विज्ञापन


यात्रा दो साल तक के लिए अटकती है तो यह तय है कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था भी दो साल पीछे खिसक जाएगी। चारधाम यात्रा से यात्रा मार्ग पर हजारों लोगों की साल भर की रोजी-रोटी चलती है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र का योगदान 53 प्रतिशत है।
विज्ञापन
विज्ञापन


उत्तराखंड आपदा की पल-पल अपडेट होती खबरों के लिए यहां क्लिक करें

होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, गाइड, यात्रा व्यवस्था, बुकिंग, सूचनाओं का आदान-प्रदान, यात्रियों के लिए बस, कार आदि की व्यवस्था आदि तमाम ऐसे काम हैं, जो सेवा क्षेत्र में आते हैं। इस बार की वार्षिक योजना में उत्तराखंड ने सेवा क्षेत्र में करीब 15 प्रतिशत विकास की संभावना जताई थी। लेकिन आपदा के बाद ऐसा संभव नहीं दिखता।

यात्री जब चारधाम यात्रा के लिए निकलता है तो उसके 15 दिन से लेकर एक माह केउत्तराखंड प्रवास में तमाम छोटी बड़ी जरूरतों को यह सेवा क्षेत्र ही पूरी करता है। कहीं बुरांस का जूस बिकता है तो कोई फोन से बात कराता है। कोई कार, टैक्सी, गाड़ी का इंतजाम करता है तो कोई ठहरने और खाने का इंतजाम करता है।

तीर्थयात्रियों से जुड़ी थी रोटी
हर साल लाखों की संख्या में आने वाले तीर्थयात्रियों से ही चारधाम मार्ग से जुड़े गांव, कस्बों, शहरों की रोजी रोटी चलती है। यह भी उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है। चार धाम यात्रा पर पड़ी चोट से यही रोजी रोटी प्रभावित हुई है। ऋषिकेश की परिवहन कंपनियों की कमाई चार धाम पर है।

देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार जैसे शहरों की ट्रैवल्स एजेंसियों की कमाई भी इसी पर निर्भर है। चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और टिहरी के कुटीर उद्योगों के लिए माल का खपाने का समय ही यह है।

उद्यमियों को चाहिए रिवाइवल पैकेज, पीएम को लिखी चिट्ठी
उत्तराखंड के उद्यमियों ने राहत के लिए रिवाइवल पैकेज मांगा है। इंडस्ट्रीज एसोसिएशन आफ उत्तराखंड की तरफ से इस संबंध में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चिट्ठी लिखी गई है।


इसमें आपदा में तबाह हुए राज्य के छोटे-मंझोले उद्योगों को फिर खड़ा करने के लिए वित्तीय पैकेज घोषित करने की बात उठाई गई है। उद्यमियों ने राज्य के छह जिलों में हुई बर्बादी का हवाला देते हुए होटल, फूड प्रोसेसिंग, राफ्टिंग, ट्रेकिंग, टूर एंड ट्रेवल और खादी उद्योग पर फर्क पड़ने की बात कही है।

ये हैं प्रमुख्ा मांगें-
- छोटे मंझोले उद्यमियों को व्यवसाय को वित्तीय मदद
- तीन साल तक बिजली दर में रियायत
- वैट, ट्रेड टैक्स में तीन साल तक छूट
- प्रभावित इलाकों में हिल सब्सिडी मिले
- बैंक ब्याज दर में तीन साल तक 5 फीसदी छूट
- दो साल तक बैंक लोन रि-शेड्यूल किया जाए
- मनोरंजन और रेस्टोरेंट टैक्स में राहत दी जाए

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed