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अब उत्तराखंड से सटी सीमा पर चीन की घुसपैठ

Sat, 27 Jul 2013 08:30 PM IST
देहरादून/अरुणेश पठानिया
देहरादून/अरुणेश पठानिया Updated Sat, 27 Jul 2013 08:30 PM IST
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Uttarakhand govt confirms incursion of Chinese troops at Barahoti

लद्दाख के चुमार और नार्थ ईस्ट में चल रही चीन सेना के घुसपैठ अब उत्तराखंड के विवादस्पद बाड़ाहोती क्षेत्र में दर्ज हुई है। आईटीबीपी ने सीमा पार से पीएलए की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए अपनी गश्त बढ़ा दी है।

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अकसर अगस्त में बाड़ाहोती में देखी जाने वाली चीन सेना की गश्त इस बार जुलाई में शुरू होने से सुरक्षा एजेंसियां भी चौकस हो गई हैं।

आईटीबीपी ने चीन सेना की गतिविधियों को लेकर गृह मंत्रालय और राज्य सरकार को अवगत करवा दिया है। हालांकि सीमा पुलिस इसे घुसपैठ न मानते हुए हर वर्ष होने वाली गश्त के दौरान की घटना मान रही है।
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जुलाई के मध्य में चीन सेना ने चुमार, सिक्कम और अरुणाचल प्रदेश के साथ उत्तराखंड के बाड़ाहोती में भी अपनी गतिविधियां तेज की हैं। हालांकि बाड़ाहोती अन्य विवादस्पद सीमांत क्षेत्रों से कम संवेदनशील माना जाता है।
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राज्य की साढ़े तीन सौ किलोमीटर लंबी चीन सीमा पर केवल बाड़ाहोती क्षेत्र में ही पीएलए मानसून सीजन में तेजी से बर्फ पिघलने के दौरान अपने गश्ती दल रवाना करता है।

आईटीबीपी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पीएलए के जवान बर्फ पिघलने के साथ सीमा पर गश्त करते, इस दौरान सीमा रेखा को पार करने की वारदातें रिपोर्ट होती हैं।

अकसर यह घटना अगस्त में होती है, लेकिन इस जुलाई में चीन ने अधिकांश सीमांत क्षेत्रों की पेट्रोलिंग शुरू कर दी। बाड़ाहोती में ऐसे कोई घटना नहीं हुई है कि कुछ मील अंदर पीएलए घुस आई हो। गश्त के दौरान हमारे जवान भी वहां जाते हैं।

गौरतलब है कि इस क्षेत्र की सुरक्षा का जिम्मा पूरी तरह है आईटीबीपी के हाथ है। भारतीय सेना ने आज तक प्रत्यक्ष तौर पर कभी दखल नहीं दिया है।

मानसून में खुलते हैं चारागाह
जिस विवादस्पद हिस्से में अकसर घुसपैठ होती है वहां पहाड़ पर चारागाह हैं जहां लंबे समय से पशुपालक अपने जानवरों को चराने के लिए आते हैं।

अकसर चीन की ओर से हरी घास की तलाश में भेड़ बकरियों का आना अधिक होता है। चारागाहों में मानसून के सीजन के दौरान दोनों और से पशुपालक समुदाय के लोग डेरा डालते हैं।

6 वर्षों में 37 बार घुसपैठ
बाड़ाहोती एक विवादस्पद क्षेत्र है जिसे चीन भी अपना क्षेत्र बताता है। 15 अगस्त को आईटीबीपी जब इस क्षेत्र में ध्वजारोहण की समारोह आयोजित करती है तो उससे पहले चीन सेना यहां अकसर घुसपैठ करती है।


हालांकि राज्य सरकार बीते 6 वर्षों में 37 बार बाड़ाहोती में घुसपैठ का मामला केंद्र के समक्ष उठा चुकी है, जिसमें पैदल जवानों से लेकर पीएलए के घोड़ों पर गश्त के दौरान घुसपैठ की वारदात है।

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