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अपनों के शव छोड़कर आने को तैयार नहीं लोग
धीरज कनोजिया
Updated Fri, 21 Jun 2013 12:36 AM IST
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आसमान से गिरी तबाही के बाद चल रहे राहत और बचाव में सेना को कुदरती आपदा का ही नहीं बल्कि सबसे ज्यादा मानवीय जज्बातों की कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
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दरअसल, जिन लोगों के परिजन मारे गए हैं। वे अपनों का शव छोड़कर आने के लिए तैयार नहीं हैं, जबकि सेना की पहली प्राथमिकता मुश्किल में फंसे जीवित लोगों को लाने की है। यही नहीं कई लोग तो अपनी कार या गाड़ी छोड़कर आने के लिए तैयार नहीं हैं।
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कैबिनेट सचिवालय में बृहस्पतिवार शाम कैबिनेट सचिव अजीत सेठ की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में सेना और राहत ऑपरेशन में जुड़ी तमाम एजेंसियों ने इस मानवीय दिक्कतों को लेकर अपनी चुनौतियों को साझा किया।
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इस बात पर सहमति बनी है कि लोगों को मनाने की कोशिश जाए। घटनास्थल पर मजिस्ट्रेट भेजा जाए।
कैबिनेट सचिव के साथ बैठक में रक्षा, गृह, स्वास्थ्य, पेट्रोलियम, सेना समेत उत्तराखंड सरकार के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए।
सेना ने कहा कि सबसे बड़ी समस्या मानवीय स्तर पर उसे हो रही है। बैठक में माना गया कि इस समस्या चुनौतीपूर्ण है। फिर भी इसका मानवीय हल निकाला जाए।
बताया गया कि अब देहरादून और सरसावा के अलावा धरासू और गोचर से भी हेलीकॉप्टर के उड़ान भरने की अस्थायी व्यवस्था की गई है।
एयरफोर्स को एटीएफ मिलने की दिक्कत को दूर करने पर सहमति बनी है। वहीं बताया गया है कि एनडीआरएफ ने रामबाड़ा में भी चार सौ से पांच सौ फंसे लोगों को ढूंढा है।
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वहीं केदारनाथ के ऊपर गरुढ़शक्ति में भी 400-500 लोगों के फंसे होने का पता चला है। गौरी गांव में एनडीआरएफ की टीम शुक्रवार सुबह पांच बजे तक पहुंचेगी।
वहीं बैठक में उत्तराखंड के अधिकारियों ने यह बात उठाई की कि कई इलेक्ट्रॉनिक मीडियाकर्मी हेलीकॉप्टर से प्रभावित इलाकों का दौरा करने के लिए प्रशासन पर दबाव बना रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि ऐसे में हेलीकाप्टर में दो लोगों की जगह खराब होती है। उन्हें लेकर जाना और वापस भी लाना होता है।
उत्तराखंड सरकार और सेना ने बैठक में कहा है कि उनकी प्राथमिकता लोगों को बचाना है। मीडिया उनकी प्राथमिकता नहीं है।
तीन दिन में बहाल होगी संचार सेवा
संचार व्यवस्था बहाल करने के लिए बीएसएनएल ने वादा किया है कि तीन दिनों में केदारनाथ और नारायणबगढ़ को छोड़ सभी जगह फोन सेवाएं सामान्य कर देगा। बीएसएनएल के 270 मोबाइल टावर क्षतिग्रस्त बताए जा रहे हैं।