{"_id":"852be89a-de4a-11e2-8462-d4ae52bc57c2","slug":"uttarakhand-disaster-and-heavy-rain","type":"story","status":"publish","title_hn":"केदारनाथ के जल प्रलय का मातम अब गांवों में पसरा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
केदारनाथ के जल प्रलय का मातम अब गांवों में पसरा
गोपेश्वर/राजा तिवारी
Updated Wed, 26 Jun 2013 03:54 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केदरानाथ जल प्रलय के बाद अब गांवों में मातम पसरने लगा है। चमोली, रुप्रयाग और पौड़ी जनपदों के युवा बेरोजगार रोजगार की चाह में केदारनाथ, गोविंदघाट और घांघरिया क्षेत्र में छह माह तक डंडी-कंडी, घोड़ा-खच्चर के संचालन के साथ ही अपना छोटा-मोटा व्यवसाय करते हैं।
विज्ञापन
इस अवधि में ये युवा अच्छी खासी कमाई भी कर लेते थे। लेकिन आपदा की इस विभीषिका ने स्थानीय युवाओं को ही लील लिया है। 11 दिन बीत जाने के बाद भी इन युवाओं के घर न पहुंचने से गांवों में मातम पसरने लगा है।
विज्ञापन
जिस गांव में भी देखों रोने और चिल्लाने की आवाजें सुनाई दे रही हैं। जो युवा घर लौटकर आए, वे भी कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं। कुछ अपनी आपबीती सुना रहे हैं तो रौंगटे खडे़ हो रहे हैं।
विज्ञापन
'उत्तराखंड में कहर' अपडेट के लिए क्लिक करें
घाट क्षेत्र का 21 वर्षीय मदन का कहना है कि मेरे साथ क्षेत्र के सात लोग अन्य गौरीकुंड से केदारनाथ तक खच्चरों का संचालन करते थे। 17 जून की सुबह मौसम खराब होते देख हम एक वड्यार (पत्थरों से बनी गुफा) में बैठ गए। लेकिन अचानक केदारनाथ की ओर से आए सैलाब से हमें संभलने का मौका भी नहीं किया।
जैसे ही हम बाहर आए मलबे में मुझे पहाड़ी की ओर धकेल दिया और मेरे अन्य छह साथियों का कहीं पता नहीं चल पाया। मैं अपनी जान बचाकर बुग्याल क्षेत्र की ओर निकल गया। गौरीकुंड से अभी भी लापता चल रहे निजमुला घाटी के धूम सिंह की मां का रो-रोकर बुरा हाल है।
घर पर नाते-रिश्तेदारों के आने का तांता लगा हुआ है। पोखरी क्षेत्र के 20 युवा अभी भी लापता चल रहे हैं। यहां हर किसी के दिल में एक पल अपने लाडले के लौटने की आस जगती है, तो दूसरे ही पल ग्यारह दिन गुजर जाने से वापसी की उम्मीद टूट जाती है।
जनपद चमोली के दशोली, घाट, पोखरी, निजमुला, लुहां, बछेर, सोनला, देवलधार, बैरासकुंड आदि क्षेत्रों के कई युवा गौरीकुंड, रामबाड़ा और केदारनाथ से लापता चल रहे हैं। जिला आपदा केंद्र चमोली में अपने बेटे राहुल की खोजबीन करने आया दशोली क्षेत्र के मोहन लाल का कहना है कि जब गरीबी के दिन थे तब नहीं मरा, अब पालपोष कर 18 साल का हो गया था, अब भगवान ने उसे हमसे छीन लिया है।
राहुल मेरा सबसे मेहनती बेटा था। पढ़ाई के साथ ही वह मेहनत, मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण भी कर रहा था। लेकिन भगवान ने हमें जिंदा ही मार दिया है। चमोली जनपद में निजमुला के 3, पोखरी के 20, घाट के 12 और दशोली के 5 युवा अभी भी लापता चल रहे हैं।