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आपदा की रोमांचक कहानी, 100 किमी चलकर दिया बच्चे को जन्म
उत्तरकाशी/पंकज गुप्ता
Updated Wed, 26 Jun 2013 07:24 PM IST
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पांच दिन की प्रसव पीड़ा झेलते हुए कुर्सी पर बंधे हुए टुकड़ों-टुकड़ों में 100 किमी पहाड़ी रास्ते पर सफर करके स्याबा गांव की ललिता ने 26 जून को एक बेटे को जन्म दिया। कठिन विषम परिस्थितियों को जीत कर इस संसार में आंख खोलने वाले इस बालक को लोग प्रलय कुमार और मृत्युंजय का नाम दे रहे हैं। लेकिन पहाड़ की त्रासदी यह है कि ऐसी कई महिलाएं सुदूर और दुर्गम इलाकों में फंसी हैं जो ललिता जितनी खुशनसीब नहीं हैं।
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आइए आपको रूबरू कराते हैं प्रलय कुमार के इस दुनिया में आगमन की रोमांचक कहानी। उत्तरकाशी का स्याबा गांव वैसे तो जिला मुख्यालय से सिर्फ पांच किलोमीटर की दूरी पर है। लेकिन कुदरती कहर से यह पूरी तरह कट गया है।
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21 जून को गांव के बाशिंदे सुनील कुमार की पत्नी ललिता चौहान को प्रसव पीड़ा हुई। परिजनों के हाथपांव फूल गए। क्या करें कुछ सूझ नहीं रहा था। संकट की इस घड़ी में गांव वाले एकजुट हुए और शुरू हुआ प्रलय कुमार के सकुशल जन्म का मिशन।
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ललिता को गांव वालों ने कुर्सी से बांधा और पहाड़ी पगदंडियों पर होते हुए तीन किमी दूर सालू लाए। और वहां से फिर दो किमी सौरा गांव। कुर्सी पर बंधी ललिता को यहां तक पहुंचाने के लिए उफनते गदेरों पर लकड़ी डालकर अस्थायी पुल बांधे गए। इसके बाद दुर्गम रास्तों से होते हुए यहां से दो किमी दूर लाटा पहुंचाया गया।
यहां से ललिता को कंधे पर लेकर गांव वाले कई किमी दूर पैदल चले। फिर गाड़ी में लाद कर पांच किमी दूर भटवाड़ी के प्राथमिक अस्पताल पहुंचे। यहां तीन दिनों तक ललिता प्रसव पीड़ा से तड़पती रही। हालत बिगड़ती देख रेस्क्यू में लगे लोगों से मदद मांगी।
आपदा में फंसे लोगों ने नंबर न होने के बावजूद ललिता की हालत को देखते हुए उसे प्राथमिकता के आधार पर हेलीकॉप्टर से जाने की इजाजत दे दी। वहां से 65 किमी दूर चिन्यालीसौड़ ललिता को उतारा गया। लेकिन परिजनों को यहां मायूसी का सामना करना पड़ा क्योंकि यहां के सामुदायिक अस्पताल में चिकित्सकों ने हाथ खड़े दिए और उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
आखिरकार 26 जून बुधवार को ललिता ने सकुशल बेटे को जन्म दे दिया। स्याबा गांव की ललिता तो आपदा में फंसी एक प्रसूता का एक उदाहरण है। मुख्य सड़कों और तमाम जरूरी सहूलियतों से महरूम उत्तराखंड के सैकड़ों गांवों में ऐसी ही ललिताएं हैं जो शायद इस ललिता जितनी खुशनसीब नहीं हैं।