पेश हुआ उत्तराखंड का बजट, मातृ शक्ति पर खास फोकस
विभागीय योजनाओं में महिलाओं की अधिकतम भागीदारी का पूरा ध्यान।
महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के दृष्टिकोण से दो वर्गों में विभाजित किया गया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राज्य सरकार की ओर से विधानसभा में पेश सालाना बजट में मातृ सशक्तिकरण पर पूरा जोर दिया गया है। जेंडर बजट में न सिर्फ 132.30 करोड़ का इजाफा किया गया बल्कि विभागीय योजनाओं में महिलाओं की अधिकतम भागीदारी हो इसका पूरा ध्यान रखा गया है। स्वास्थ्य, शिक्षा, श्रम और सेवायोजन जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की विशिष्ट आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए इन मदों में बढ़ोत्तरी की गई है।
वित्तीय वर्ष 2015-16 में जेंडर बजट में 3434.90 करोड़ का प्रावधान किया गया था जबकि वित्तीय वर्ष 2016-17 के सालाना बजट में यह आंकड़ा बढ़कर 3567.20 करोड़ हो गया।
बजट के तहत विभागीय योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के दृष्टिकोण से दो वर्गों में विभाजित किया गया है।
दो श्रेणी में योजनाओं को बांटा
शत प्रतिशत महिलाओं के लिए बजट निर्धारण करने वाली योजनाओं को श्रेणी-एक और 20 प्रतिशत से अधिक वाली योजनाओं को श्रेणी-दो में रखा गया है। सरकार ने जेंडर बजट के माध्यम से महिलाओं को समानता के अवसर मुहैया कराने की पहल की है।
किस मद में कितना बजट
वित्त कर, नियोजन, सचिवालय एवं अन्य सेवाएं -- 221.20 करोड़
पुलिस एवं जेल --------------- 66,000 रुपये
शिक्षा, खेल, युवा, कल्याण एवं संस्कृति -- 2165.46 करोड़
चिकित्सा एवं परिवार कल्याण -- 135.99 करोड़
कल्याण योजनाएं -- 289.26 करोड़
श्रम एवं रोजगार -- 9.51 करोड़
कृषि -- 109.64 करोड़
ग्राम्य विकास -- 200.33 करोड़
खाद्य -- 21.97 करोड़
अनुसूचित जातियों के कल्याण -- 267.38 करोड़
पर्यटन -- 5.19 करोड़
औद्योनिक विकास -- 53.41 करोड़