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शोषण के खिलाफ सड़कों पर उतरे सिडकुल के श्रमिक

Tue, 05 Jan 2016 11:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/ रुद्रपुर
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/ रुद्रपुर Updated Tue, 05 Jan 2016 11:59 PM IST
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Workers took to the streets against exploitation Sidcul

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 सिडकुल में कार्यरत 27 फैक्ट्रियों की ट्रेड यूनियनों ने छंटनी, संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन और शोषण को लेकर विशाल रैली निकाली। उन्होंने प्रशासन पर उद्योगों से सांठगांठ करने का आरोप लगाते हुए कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। उन्होंने मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया।
मंगलवार सुबह साढ़े दस बजे सिडकुल में कार्यरत 27 ट्रेडयूनियनों के श्रमिक अंबेडकर पार्क में हजारों की संख्या में एकत्र हुए। यहां से उन्होंने कलक्ट्रेट तक विशाल जुलूस निकाला। जुलूस के दौरान श्रमिकों ने नारेबाजी करते हुए पर्चे बांटे। जुलूस कलक्ट्रेट में पहुंचकर एक जनसभा में तब्दील हो गया। यहां श्रमिकों ने प्रशासन और उद्योगों पर सांठगांठ का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की।

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सभा को संबोधित करते हुए एआईसीसीटीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजा बहुगुणा ने कहा कि मोदी सरकार उद्योगों का मुनाफा बढ़ाने के लिए श्रमिकों के अधिकारों का हनन करने पर तुली है। श्रम कानूनों को खत्म किया जा रहा है। भारत में मजदूरों के ऊपर हमले बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सिडकुल में खुलेआम श्रम कानूनों का उल्लंघन हो रहा है। सिडकुल को उद्योगपतियों ने खुली जेल में तब्दील कर दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को यह खुद नहीं भूलना चाहिए कि वह खुद ट्रेड यूनियन में रह चुके हैं।
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उन्होंने कहा कि हरीश रावत सरकार माफियाओं को बढ़ावा दे रही है।
आईएनटीयूसी के राज्य महामंत्री जनार्दन सिंह ने कहा कि यूनियन बनाना श्रमिकों का हक है, यह मजदूरों का संवैधानिक अधिकार भी है, लेकिन सिडकुल के उद्योग यूनियन बनाने मात्र से ही सभी पदाधिकारियों को कंपनी से निलंबित कर रहे है। यह सरासर गलत है। वहीं बीएमएस के राज्य मंत्री दीपक अमिया ने कहा कि उत्तराखंड के सिडकुल में मजदूरों का शोषण-उत्पीड़न हो रहा है। इसे संगठित होकर ही जीता जा सकता है। एआईटीयूसी के एएम खान ने कहा कि श्रमिक को अपने हक के लिए लंबी लड़ाई लड़नी होगी।
 वहीं श्रमिकों ने निर्णय लिया कि प्रबंधन वर्ग उनकी मांगें नहीं मानता है, तो इसके बाद वह हड़ताल जैसे कड़े कदम उठाने को बाध्य होंगे। श्रमिकों ने मुख्यमंत्री को प्रेषित ज्ञापन की कॉपी एसडीएम अनिल शुक्ला को सौंपी।

 जिसमें सिडकुल में संवैधानिक अधिकारों कानूनों का पालन सुनिश्चित करना, मित्तर फास्टनर्स की बंदी पर रोक लगाने, डेल्फी टीवीएस की उत्तराखंड से पंजीकृत यूनियन को मान्यता ही जाए और यूनियन के 18 दिसंबर के नोटिस पर वार्ता, बीएचबी के पांच श्रमिकों की कार्यबहाली, पारले श्रमिक यूनियन पर मांग पत्र पर वार्ता कर समझौता सहित कई मांग की गई है। इस दौरान केके बोरा, कैलाश भट्ट, टीवीएस डेल्फी के नवीन सिंह, मित्तर फास्टनर के  सुदर्शन, पारले के प्रमोद तिवारी, रानेमद्रास के दिनेश तिवारी, अनिल शर्मा, राजदीप, प्रकाश भट्ट, नरेंद्र, सूरज, दिनेश आर्या सहित 27 यूनियनों के पदाधिकारी और श्रमिक मौजूद रहे।

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