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ई-वेस्ट के निस्तारण को अधिक संस्थाओं को अधिकृत किए जाने की मांग की
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केजीसीसीआई की ओर से आयोजित वेबिनार में अध्यक्ष अशोक बंसल ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालयों से कंसेन्ट जारी किए जाने के लिए पांच करोड़ निवेश की सीमा को बढ़ाकर 25 करोड़ किया जाना चाहिए। उद्योगों के हजार्ड्स एवं ई-वेस्ट के निस्तारण के लिए विभाग की ओर से मात्र एक ही संस्था को अधिकृत किया गया है।
इस एकाधिकार प्राप्त संस्था की ओर से इकाइयों के कचरे का निस्तारण मनमानी दरों पर करने के कारण उत्तराखंड की इकाइयों को अन्य राज्यों की अपेक्षाकृत ई-वेस्ट का बहुत कम मूल्य प्राप्त होता है। इसलिए हजार्ड्स एवं ई-वेस्ट के निस्तारण को और अधिक संस्थाओं को अधिकृत किया जाना चाहिए।
शनिवार को उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) के सदस्य सचिव एसपी सुबुद्धि के साथ केजीसीसीआई की ओर से वेबिनार का आयोजन किया गया। इस दौरान अध्यक्ष बंसल ने कहा कि जब किसी उद्यमी की ओर से अपनी इकाई में कुछ बदलाव किया जाता है या जेनरेटर या बॉयलर की क्षमता बढ़ाई जाती है तो बोर्ड में संशोधन किए जाने के लिए संपूर्ण स्थापना अनुमति की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है जिससे उद्यमियों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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इसलिए ऑनलाइन प्रक्रिया में बदलाव के लिए अनुमोदन का प्रावधान होना चाहिए। बंसल की ओर से मांग की गई कि औद्योगिक इकाइयों में जांच के दौरान पाई गई त्रुटियों में पर्यावरण क्षतिपूर्ति की गणना की विधि को सरल और पारदर्शी बनाया जाए। इसके तहत इकाई की ओर से प्रथम बार त्रुटिवश हुए किसी नियम के उल्लंघन को अपराध न मानते हुए इकाई को चेतावनी देकर भूल सुधार का अवसर दिया जाना चाहिए।
उत्तराखंड में पीसीबी की ओर से निर्धारित एनओसी एवं नवीनीकरण की फीस अन्य राज्यों की तुलना में अधिक है। इनके शुल्क में 50 प्रतिशत की कटौती कर उद्योगों को राहत दी जानी चाहिए। कहा कि पीसीबी की ओर से लागू नए कठोर नियमों के कारण उद्यमी सिडकुल, पंतनगर में अपने कार्यरत उद्योगों का विस्तारीकरण एवं नए उद्योग स्थापित नहीं कर पा रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण के नए मानकों को शिथिल करते हुए पुराने मानकों को ही लागू किया जाए ताकि सिडकुल में उद्यमी अपने उद्योगों का विस्तारीकरण व नए उद्योग स्थापित कर सकें।
वेबिनार में पीसीबी सदस्य सचिव एसपी सुबुद्धि ने क्षेत्रीय कार्यालयों की कंसेन्ट का अधिकार पांच करोड़ से बढ़ाकर 25 करोड़ किए जाने के संबंध में बताया कि कुमाऊं एवं गढ़वाल मंडल में अलग-अलग दो मुख्य पर्यावरण अधिकारी नियुक्त करने की योजना है जिसका प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया गया है। उन्हें 100 करोड़ तक पूंजी निवेश की इकाइयों को कंसेन्ट देने के लिए अधिकृत किया जाएगा।
बताया कि कुमाऊं में हर्जाड्स वेस्ट के निस्तारण के लिए वह एक यूनिट लगवाने के लिए प्रयासरत हैं इससे क्षेत्र के उद्योगों को काफी राहत मिलेगी। वेबिनार में विनीत कुमार, विकास जिंदल, पवन अग्रवाल, शरत गोयल, विवेक जैन, कुलदीप सिंह, अनूप सिंह, संजीव तोमर समेत अन्य उद्योगपति शामिल थे।
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इस एकाधिकार प्राप्त संस्था की ओर से इकाइयों के कचरे का निस्तारण मनमानी दरों पर करने के कारण उत्तराखंड की इकाइयों को अन्य राज्यों की अपेक्षाकृत ई-वेस्ट का बहुत कम मूल्य प्राप्त होता है। इसलिए हजार्ड्स एवं ई-वेस्ट के निस्तारण को और अधिक संस्थाओं को अधिकृत किया जाना चाहिए।
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शनिवार को उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) के सदस्य सचिव एसपी सुबुद्धि के साथ केजीसीसीआई की ओर से वेबिनार का आयोजन किया गया। इस दौरान अध्यक्ष बंसल ने कहा कि जब किसी उद्यमी की ओर से अपनी इकाई में कुछ बदलाव किया जाता है या जेनरेटर या बॉयलर की क्षमता बढ़ाई जाती है तो बोर्ड में संशोधन किए जाने के लिए संपूर्ण स्थापना अनुमति की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है जिससे उद्यमियों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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इसलिए ऑनलाइन प्रक्रिया में बदलाव के लिए अनुमोदन का प्रावधान होना चाहिए। बंसल की ओर से मांग की गई कि औद्योगिक इकाइयों में जांच के दौरान पाई गई त्रुटियों में पर्यावरण क्षतिपूर्ति की गणना की विधि को सरल और पारदर्शी बनाया जाए। इसके तहत इकाई की ओर से प्रथम बार त्रुटिवश हुए किसी नियम के उल्लंघन को अपराध न मानते हुए इकाई को चेतावनी देकर भूल सुधार का अवसर दिया जाना चाहिए।
उत्तराखंड में पीसीबी की ओर से निर्धारित एनओसी एवं नवीनीकरण की फीस अन्य राज्यों की तुलना में अधिक है। इनके शुल्क में 50 प्रतिशत की कटौती कर उद्योगों को राहत दी जानी चाहिए। कहा कि पीसीबी की ओर से लागू नए कठोर नियमों के कारण उद्यमी सिडकुल, पंतनगर में अपने कार्यरत उद्योगों का विस्तारीकरण एवं नए उद्योग स्थापित नहीं कर पा रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण के नए मानकों को शिथिल करते हुए पुराने मानकों को ही लागू किया जाए ताकि सिडकुल में उद्यमी अपने उद्योगों का विस्तारीकरण व नए उद्योग स्थापित कर सकें।
वेबिनार में पीसीबी सदस्य सचिव एसपी सुबुद्धि ने क्षेत्रीय कार्यालयों की कंसेन्ट का अधिकार पांच करोड़ से बढ़ाकर 25 करोड़ किए जाने के संबंध में बताया कि कुमाऊं एवं गढ़वाल मंडल में अलग-अलग दो मुख्य पर्यावरण अधिकारी नियुक्त करने की योजना है जिसका प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया गया है। उन्हें 100 करोड़ तक पूंजी निवेश की इकाइयों को कंसेन्ट देने के लिए अधिकृत किया जाएगा।
बताया कि कुमाऊं में हर्जाड्स वेस्ट के निस्तारण के लिए वह एक यूनिट लगवाने के लिए प्रयासरत हैं इससे क्षेत्र के उद्योगों को काफी राहत मिलेगी। वेबिनार में विनीत कुमार, विकास जिंदल, पवन अग्रवाल, शरत गोयल, विवेक जैन, कुलदीप सिंह, अनूप सिंह, संजीव तोमर समेत अन्य उद्योगपति शामिल थे।