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दुर्घटना में जवान की मौत बताने पर ग्रामीणों ने थाना घेरा

Sat, 24 Jun 2017 11:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नानकमत्ता। 
अमर उजाला ब्यूरो, नानकमत्ता।  Updated Sat, 24 Jun 2017 11:27 PM IST
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villagers surrounded police for declaring murder as accident
नानकमत्ता थाने में आक्रोशित भीड़ को नियंत्रित करती पुलिस। - फोटो : अमर उजाला
एक सप्ताह पूर्व सेना के जवान की मृत्यु के मामले में पुलिस ने हत्या की धारा को दुर्घटना की धारा में तब्दील करते हुए एक व्यक्ति को साक्ष्य छिपाने के आरोप में जेल भेज दिया है। जवान की मौत को एसओजी और पुलिस के दुर्घटना बताने पर मृतक के परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया।
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सैकड़ों की संख्या में आक्रोशित महिला एवं पुरुषों ने थाने का घेराव कर पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों व पुलिस के बीच तीखी झड़प भी हुई। परिजनों के प्रार्थना पत्र पर एएसपी ने सीबीसीआईडी जांच की अनुशंसा कर प्रार्थना पत्र पुलिस मुख्यालय भेजकर लोगों को शांत किया। सवा दो घंटे बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने थाने का घेराव समाप्त किया। 
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शनिवार को ग्राम सड़ासड़िया एवं मृतक की ससुराल जसारी थाना खटीमा के सैकड़ों लोगों ने थाने का घेराव कर पुलिस के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। इस दौरान आक्रोशित महिलाओं और ग्रामीणों ने सुरक्षा पंक्ति को लांघकर थाने में घुसने का प्रयास किया। महिलाएं हत्यारोपियों को अपने हवाले करने की मांग कर रही थी।
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इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस में कई बार तीखी झड़प भी हुई। खटीमा और सितारगंज कोतवाली से भारी पुलिस बल थाने पहुंच गया। एएसपी देवेंद्र पिंचा भी सितारगंज की मीटिंग छोड़कर तत्काल थाने पहुंच गए।

परिजनों की ओर से नवीन बोरा मृतक के ससुर शेर सिंह बोरा, खड़क सिंह बोरा, कल्याण बोरा, पुष्कर जेठी और कल्याण धामी ने पुलिस की जांच पर संदेह जताकर मामले की जांच सीबीसीआईडी से कराने की मांग की।  सवा दो घंटे प्रदर्शन और घेराव के बाद मृतक के परिजनों के प्रार्थना पत्र पर एएसपी द्वारा सीबीसीआईडी जांच की संस्तुति करने के उपरांत ही प्रदर्शनकारियों ने धरना समाप्त किया।

सड़ासड़िया निवासी नौ कुमाऊं रेजीमेंट के जवान महेंद्र सिंह जेठी का शव 18 जून को एनएच 125 के किनारे पुलिस को मिला था। परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने गांव के ही सीआरपीएफ के जवान पुष्कर चंद, भूपेंद्र सिंह बोरा, खटीमा निवासी दीपक मनोला और अरुण के खिलाफ हत्या की धारा 302 में मुकदमा पंजीकृत कर लिया था।

सैनिक की मौत को गंभीरता से लेते हुए मौत के कारणों की जांच के खुलासे के लिए एसओजी के साथ ही थाना पुलिस लगी हुई थी। एसओजी व पुलिस की जांच तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण दुर्घटना सामने आई। जांच में दुर्घटना के साक्षी मृतक के मित्र गांव के ही सीआरपीएफ के जवान पुष्कर चंद द्वारा साक्ष्य छिपाने की बात आई।

पुलिस ने हत्या की धारा 302 को आईपीसी की धारा 379, 401ए में तब्दील करते हुए हिरासत में लिए गए पुष्कर चंद को आईपीसी की धारा 201 और 202 में जेल भेज दिया। वहीं, हिरासत में लिए अन्य लोगों को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।

महिलाओं का आक्रोश सुरक्षा व्यवस्था पर रहा भारी
नानकमत्ता। प्रदर्शन व घेराव की जानकारी मिलते ही थाना पुलिस द्वारा सुरक्षा की चाक चौबंद व्यवस्था की गई थी। एक प्लाटून पीएसी के साथ ही खटीमा सितारगंज कोतवाली की फोर्स व महिला पुलिस कर्मी तैनात की गई थी। फोर्स को महिलाओं को कार्यालय से दूर रखने के निर्देश दिए गए थे।

परंतु सिर पर काले फीते बांधी आक्रोशित महिलाएं सुरक्षा पंक्ति तोड़ते हुए थाने के अहाते तक पहुंच गई। इस दौरान पुलिस के साथ ही महिला पुलिस कर्मियों से प्रदर्शनकारियों की कई बार तीखी झड़प भी हुई। प्रदर्शनकारी आरोपियों को अपने हवाले करने की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकारी पुलिस के खिलाफ नारेबाजी के अलावा अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहे थे।

परंतु पुलिस ने संयम बरतते हुए लोगों के आक्रोश को शांत करने का प्रयास किया। वहां पर सीओ खटीमा हरीश मेहरा, खटीमा कोतवाल चंचल शर्मा, सितारगंज कोतवाल बीएस भाकुनी, थानाध्यक्ष अशोक कुमार आदि थे।

कई बार बेसुध हुई मृतक की पत्नी
नानकमत्ता। प्रदर्शन के दौरान मृतक महेंद्र सिंह जेठी की पत्नी कमला देवी कई बार बेसुध हो गई। आक्रोशित कमला देवी द्वारा कई बार थाना कार्यालय में जबरन घुसने का प्रयास किया गया।


जिस पर महिला पुलिस द्वारा उनको रोकने पर अन्य प्रदर्शनकारी महिलाएं महिला पुलिस कर्मियों से हाथापाई पर उतर आईं। इस दौरान कमला देवी दो बार बेसुध हुई, जिन्हें पानी की छींटें मार और पानी पिलाकर होश में लाया गया।
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