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Udham Singh Nagar News: जेसीबी के आगे लेटे ग्रामीण, विरोध दरकिनार कर मत्स्य विभाग ने जमीन पर लिया कब्जा

Fri, 14 Nov 2025 01:39 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर Updated Fri, 14 Nov 2025 01:39 AM IST
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Villagers lay down in front of JCB, Fisheries Department took possession of the land by ignoring the protest
सितारगंज। मत्स्य पालन विभाग ने विरोध के बीच प्रहलाद पलसिया में करीब 11 एकड़ जमीन को कब्जे में ले लिया। टीम का ग्रामीणों ने कड़ा विरोध किया और उनकी पुलिस प्रशासन से तीखी नोकझोक भी हुई। टीम ने कब्जेधारियों के आशियाने तोड़ने की कोशिश की तो ग्रामीण जेसीबी के सामने लेट गए। भारी हंगामे के बाद टीम जमीन पर काबिज छह परिवारों को घर खाली करने के लिए तीन दिन का अल्टीमेटम देकर लौट आई।
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शक्तिफार्म के पास ग्राम प्रहलाद पलसिया में राजस्व विभाग ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहतत इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क और फिश मार्केट बनाने के लिए साल 2022 में करीब 41 एकड़ जमीन मत्स्य विभाग को दी थी। जमीन पर सात परिवार करीब 35 साल से काबिज होकर खेती कर रहे हैं। पिछले साल मत्स्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए कुछ एकड़ जमीन को कब्जे में लिया था। इसके बाद पीड़ित परिवारों ने न्यायालय की शरण ली थी। न्यायालय ने पीड़ित परिवारों को फसल काटने तक का समय दिया था। इसके बाद पीड़ित परिवारों को न्यायालय से राहत न मिलने के बाद विभाग ने बृहस्पतिवार को कार्रवाई करते हुए शेष बची जमीन को भी कब्जे में ले लिया।
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वहीं मत्स्य विभाग के उपनिदेशक संजय छिम्वाल ने बताया कि विभाग ने प्रशासन की मदद से करीब 11 एकड़ जमीन को कब्जे में लिया है। ग्रामीणों ने हंगामे के बीच मत्स्य विभाग के अधिकारी, प्रशासन और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की तो पुलिस ने पीड़ित परिवारों को खदेड़ दिया। पीड़ित परिवार लगातार अधिकारियों से उनके आशियाने न तोड़ने की गुहार लगाते रहे। वहां एसडीएम रविंद्र जुवांठा, कोतवाल सुंदरम शर्मा सहित अनेक मौजूद रहे।
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पीडितों को उजड़ने से पहले बसाने की मांग


सितारगंज।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव नवतेज पाल सिंह, पूर्व पालिकाध्यक्ष हरीश दुबे, पूर्व जिला पंचायत सदस्य उत्तम आचार्य, नपं अध्यक्ष सुमित मंडल, भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष सत्येंद्र कुमार और विनय विश्वास ने कब्जा लेने गई टीम का कड़ा विरोध किया। उन्होंने सरकार से पीड़ित परिवारों को उजाड़ने से पहले बसाने की मांग की।
आरोप लगाया कि स्थानीय अधिकारियों ने दबाव में रिपोर्ट बनाई है। उन्होंने शासन को भेजे गए प्रपोजल में जमीन को बंजर दर्शाया जबकि वहां कई परिवार बसे है। वह 35 साल से उक्त ज़मीन पर वास कर खेती कर रहे हैं। उन्होंने चेताया कि यदि पीड़ित परिवार को नहीं बसाया गया तो वे सरकार के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना करने को बाध्य होंगे। संवाद
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हम करीब 40 साल से इस जमीन पर रह रहे हैं। उनकी दो बेटियां है। अचानक से इस जमीन से हटा दिया जा रहा है। अब हम कहां जाएंगे। हमारे पास ना कोई जमीन है और ना ही कोई घर है। विभाग की कार्रवाई से हम हम सड़क पर आ गए। - संध्या राय, पीड़ित
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बचपन से हम इस जमीन पर खेल-पले और बड़े हुए हैं। बच्चों की शादी भी इसी घर से की। सरकार ने हमारा घर, दो एकड़ जमीन, खेत सब छीन लिया। हमें बसने के लिए कोई दूसरी जगह भी नहीं दी। - अनिमा राय, पीड़ित
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मेरी उम्र 65 वर्ष हो गई है। तबीयत भी ठीक नहीं रहती है। बुढ़ापे में सरकार हम पर अति अत्याचार कर रही है। पहले हमसे जमीन छीन ली। अब हमारे रहने की जगह पर भी जेसीबी चलाने आ गए।

सुभाष राय, पीड़ित

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मंत्री ने पांच साल पहले हमें एक एकड़ जमीन, रहने की जगह देने का वादा किया था, लेकिन उन्होंने कोई भी वादा पूरा नहीं किया। हमसे हमारा खेत छीन लिया गया। अब हमारे घर पर भी बुलडोजर चलने को उतारू है। हमारे बच्चों की परीक्षा चल रही है। उन्हें प्रैक्टिकल की परीक्षा देने जाना था। इन सबके बीच उनकी परीक्षा छूट गई। -
बसंती राय, पीड़ित
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