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Kashipur News: लापरवाही की फिसलन से रपट गई जिंदगी, राजमिस्त्री बीमार पत्नी के इलाज के लिए जुटा रहा था रकम

Tue, 24 Jun 2025 04:18 PM IST
हीरा मेहरा राजीव कुमार, संवाद
राजीव कुमार, संवाद Published by: हीरा मेहरा Updated Tue, 24 Jun 2025 04:18 PM IST
सार

जेजेएम योजना के तहत सुल्तानगढ़ में निर्माणाधीन ओवरहेड टैंक की छत पर कार्य करते वक्त पैर फिसलने से सोमवार को मिस्त्री वीरपाल (35) गिर गया। श्रमिक उसे 108 एंबुलेंस से उप जिला अस्पताल लाए, जहां चिकित्सकों ने वीरपाल को मृत घोषित कर दिया।

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Uttarakhand News: Mechanic dies after falling from JJM under-construction overhead tank in kashipur
जेजेएम निर्माणाधीन ओवरहेड टैंक से गिरकर मिस्त्री की मौत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पत्नी की जिंदगी बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल वीरपाल पाई-पाई जोड़ रहा था। बांस के डंडों पर वह परिवार के सदस्यों के साथ दिन-रात मेहनत कर रहा था। जिम्मेदारों की लापरवाही का नतीजा रहा कि 70 फुट की ऊंचाई से गिरकर वह जिंदगी की जंग हार गया।

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बरेली के परा बहुद्दीनपुर निवासी मुनीश ने बताया कि उसके भाई वीरपाल के दो व चार साल के दो बेटे और छह वर्षीय बेटी है। भाभी लंबे समय से बीमार हैं। इलाज में वीरपाल ने अब तक करीब दो लाख रुपये खर्च किए लेकिन स्वास्थ्य में सुधार नहीं आ रहा। वीरपाल हमेशा पत्नी के स्वास्थ्य और बच्चों के भविष्य के लिए चिंतित रहता था लेकिन उसने कभी हौसला नहीं खोया। वह कहता था कि चाहे जितना रुपया लग जाए, पत्नी को कुछ नहीं होने देगा। इसलिए वह मेहनत-मजदूरी करने 150 किमी दूर आया था। जब यहां काम रुक जाता था तब घर जाकर परिवार की देखभाल करता था।

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भाइयों के नहीं थमे बेबसी के आंसू
वीरपाल करीब आठ महीने पहले ओवरहेड टैंक का निर्माण करने ग्राम लालपुर कॉलोनी सुल्तानगढ़ आया था। हादसे के चश्मदीद और वीरपाल के भाई मुनीश, अजयपाल व हरिओम के अलावा अन्य परिजन अमन, पुष्पेंद्र, विजय व विद्याराम भी काम करते थे। भाइयों ने बताया कि जिस वक्त वीरपाल गिरा वे लोग टैंक के चारों ओर बंधे बांस के ढांचे पर अलग-अलग काम कर रहे थे। आंखों के सामने भाई की सांसें थम गईं और वे कुछ नहीं कर सके। इसका उन्हें जीवनभर मलाल रहेगा। खुद को बेबस महसूस कर रहे भाइयों की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। बेटे की मौत की खबर सुन काशीपुर पहुंची मां का रो-रोकर बुरा हाल था। परिजनों का कहना था यदि ठेकेदार कंपनी ने सुरक्षा उपकरण दिए होते तो वीरपाल उनके साथ होता।

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ऊंचाई पर सुरक्षा जाल, हार्नेस और हेलमेट है जरूरी
50 फुट से अधिक ऊंचाई पर चल रहे निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। सुरक्षा में चूक होने पर व्यक्ति की जान तक जा सकती है। इसी के चलते कई सुरक्षा मानकों को निर्माण कार्य के दौरान नियमों में शामिल किया गया है। हालांकि इन नियमों की धज्जियां खुलेआम उड़ती हैं, जिस पर कोई जिम्मेदार ध्यान नहीं देता है। इसका खामियाजा किसी मजबूर को भुगतना पड़ता है।

कोई भी निर्माण कार्य जो 50 फुट से अधिक ऊंचाई पर किया जा रहा है, वहां सुरक्षा के लिए सुरक्षा जाल, रेलिंग, सुरक्षा हार्नेस, हेल्मेट और गिरने से रोकने वाले उपकरणों का उपयोग करना अनिवार्य होता है। गिरने से बचाव के लिए सुरक्षा जाल का उपयोग करना चाहिए, ताकि गिरने की स्थिति में चोट लगने से बचा जा सके। साथ ही सुरक्षा हार्नेस पहनना चाहिए। इसकी सही ढंग से फिटनेस और मजबूती की जांच करनी चाहिए।

सबसे महत्वपूर्ण कर्मचारियों को ऊंचाई पर काम करने के लिए उचित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, जिसमें सुरक्षा प्रक्रियाओं, उपकरणों का उपयोग और आपातकालीन प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण शामिल हो। साथ ही नाजुक सतहों या उनके पास काम करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ठेकेदारों व निर्माण कंपनी को इन नियमों का पालन करवाना अनिवार्य है। 

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