{"_id":"594ea45d4f1c1bc4198b46bb","slug":"uproar-on-encroachment-removal","type":"story","status":"publish","title_hn":"बैगुल किनारे अतिक्रमण हटाने को लेकर बवाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बैगुल किनारे अतिक्रमण हटाने को लेकर बवाल
अमर उजाला ब्यूरो, सितारगंज/किच्छा।
Updated Sun, 25 Jun 2017 12:22 PM IST
विज्ञापन
सितारगंज बैगुल डैम के किनारे दिलीपनगर गांव में वन विभाग की कार्रवाई का विरोध जताती महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वन विभाग की टीम ने शनिवार को फिरोजपुर ग्रामसभा के वनकुइयां तोक (मंझरे) में बैगुल तटबंध किनारे अतिक्रमण हटाया। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग की टीम ने झोपड़ियां तोड़कर उनमें आग लगा दी। एक बाइक भी फूंकी गई। वनकर्मियों ने लाठियां भी भांजी।
इससे एक बुजुर्ग महिला घायल हो गई। हालांकि, वनाधिकारी उनके आरोपों को नकार रहे हैं। रेंजर का आरोप है कि ग्रामीणों ने पथराव, आगजनी कर एक बाइक भी फूंक दी। बचाव में वनकर्मियों को तीन राउंड फायर करने पड़े। किच्छा के एसडीएम, सीओ ने घटनास्थल का मुआयना किया।
वरिष्ठ भाजपा नेता सुरेश गंगवार ने गांव पहुंचकर पीड़ित परिवारों की पीड़ा जानी और ग्रामीणों के साथ बरा पुलिस चौकी पहुंचकर वन विभाग के रेंजर, कर्मियों खिलाफ तहरीर दी। बैगुल जलाशय तराई पूर्वी वन प्रभाग की बाराकोली रेंज की सीमा से सटा है।
विज्ञापन
इसी डैम के किनारे अतिक्रमण हुआ है। इसे हटाने के लिए बाराकोली के रेंजर प्रदीप धौलाखंडी शनिवार को वन कर्मियों की टीम के साथ मौके पर पहुंचे। यह बस्ती किच्छा तहसील की फिरोजपुर ग्रामसभा के तोक/मंझरा वनकुइयां दिलीपनगर के नाम पर बसी है।
बस्ती में तटबंध किनारे 80 परिवार बसे हैं। वनकर्मियों ने इनमें से करीब 20 परिवारों की झोपड़ियां तोड़ दीं। झोपड़ी में जल रहे चूल्हों से झोपड़ियों में आग भी लग गई। इससे ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। कई परिवार तो झोपड़ियों से सामान भी बाहर नहीं निकाल सके।
ग्रामीणों ने वन विभाग पर झोपड़ियां फूंकने का आरोप लगाया। ग्रामीणों ने इसका विरोध किया तो वन कर्मी लाठियां बरसाने लगे और कई राउंड फायरिंग भी की। इससे अफरातफरी मच गई। लाठीचार्ज में गांव की बुजुर्ग महिला बसंती देवी (70) पत्नी स्व. रमीराम घायल हो गई।
उसे आपातकालीन 108 एंबुलेंस से किच्छा के सीएचसी में भर्ती कराया गया है। सूचना मिलते ही किच्छा के एसडीएम नरेश चंद दुर्गापाल, सीओ हिमांशु शाह, तहसीलदार सुदेश चौहान, कोतवाल योगेशनाथ पांडे भी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी ली।
जिला पंचायत सदस्य और वरिष्ठ भाजपा नेता सुरेश गंगवार ने भी ग्रामीणों की पीड़ा सुनी और अधिकारियों से बाराकोली वन रेंजर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की। रेंजर का आरोप है कि अतिक्रमण हटाने पहुंचते ही ग्रामीणों ने टीम पर पथराव कर दिया।
बचाव में उन्होंने तीन राउंड हवाई फायरिंग की थी। बताया कि ग्रामीणों ने एक वन कर्मी की बाइक भी फूंक डाली। ग्रामीणों ने गंगवार के साथ बरा पुलिस चौकी में रेंजर समेत अन्य वन कर्मियों के खिलाफ तहरीर देकर कानूनी कार्रवाई की मांग की। एसडीएम दुर्गापाल ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
बैगुल जलाशय की नापजोख होगी : एसडीएम
किच्छा के एसडीएम नरेश चंद दुर्गापाल ने कहा कि बैगुल जलाशय के किनारे अतिक्रमण की जद में आई जमीन की नापजोख होगी ताकि यह साफ हो कि यह जमीन सिंचाई विभाग की है या वन विभाग की।
वन विभाग और सिंचाई विभाग दोनों की टीमों को साथ लेकर अतिक्रमण का चिन्हीकरण करवाया जाएगा। बताया कि शनिवार को आगजनी, पथराव की जो घटना हुई उसकी पूरी जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
वनकर्मियों ने दो दिन पहले भी अतिक्रमण हटाया था
रेंजर प्रदीप धौलाखंडी ने बताया कि दो दिन पहले उन्होंने इस क्षेत्र से अतिक्रमण हटवाया गया था। बताया कि अतिक्रमणकारियों ने दोबारा झोपड़ियां बना लीं। बताया कि शनिवार सुबह वह पुलभट्ठा थाने से पुलिस फोर्स लेकर अतिक्रमण हटाने पहुंचे थे।
टीम ने जैसे ही अतिक्रमण हटाने का काम शुरू किया तो वहां खड़ी भीड़ ने पथराव कर दिया। आरोप लगाया कि भीड़ में से किसी ने झोपड़ी में आग लगा दी। भीड़ ने वन दरोगा केशव सिंह धौनी पर हमले का प्रयास किया तो धौनी ने अपने बचाव में हवाई फायरिंग की। तभी वनकर्मियों की टीम शक्तिफार्म किच्छा रोड पर सुरक्षित पहुंच सकी।
बैगुल डैम और नाले में फेंका खाना
ग्रामीणों के अनुसार अतिक्रमण हटाने के दौरान वन विभाग ने ग्रामीणों पर जरा भी रहम नहीं किया। जब सुबह करीब 11 बजे टीम वहां पहुंची तो इन परिवारों में से कुछ घरों में दोपहर का भोजन पक रहा था। टीम ने झोपड़ियां तो ढहाई ही, उनके चूल्हों से भोजन उठाकर पास के जलाशय और नाले में फेंक दिया।
आठ नल भी उखाड़ फेंके
अतिक्रमण हटाने गई वन टीम ने ग्रामीणों के घरों में लगे करीब आठ नल भी उखाड़ फेंके। इससे गांव में पीने के पानी की किल्लत हो गई है। ग्रामीणों ने कहा कि वन विभाग ने झोपड़ियों में आग लगाकर उन्हें सामान निकालने तक का मौका नहीं दिया। इस कारण 20 परिवारों में रहने वाले करीब 100 लोग बेघर हो गए हैं।
ट्रैक्टर के टायर में गोली लगी
अतिक्रमण हटाने के दौरान बवाल होने पर फायरिंग के बाद एक गोली ट्रैक्टर के टायर में जा लगी। इससे टायर फट गया। हवाई फायरिंग से बिजली की लाइन भी क्षतिग्रस्त हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि फायरिंग हवा में नहीं बल्कि सीधे दागी गई थी। इसी कारण ट्रैक्टर का टायर फटा। गनीमत रही कि गोलियां किसी ग्रामीण को नहीं लगीं।
ग्रामीण सिंचाई भूमि पर काबिज : गंगवार
जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी प्रसाद गंगवार के पुत्र और वरिष्ठ भाजपा नेता सुरेश गंगवार ने कहा कि जिस भूमि से अतिक्रमण हटाया गया वह सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश की जमीन है। बस्ती के पीछे स्थित नाले के पार वन विभाग की भूमि है। बताया कि हटाए गए परिवार करीब 25 साल से सिंचाई भूमि पर काबिज हैं।
पर्वतीय समाज के तमाम लोग वर्ष 2000 में यहां बसाए गए थे। करीब आठ साल पहले उन्होंने यहां राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत बिजली पहुंचाई थी। इस पर वन विभाग ने रोक लगा दी थी। इसके बाद सिंचाई विभाग की जमीन पर लाइन खींचकर पोल लगाए गए थे।
दैवी आपदा प्रभावित परिवार हैं पीड़ित
बैगुल डैम किनारे बसे दलीपनगर के ये पीड़ित परिवार दैवी आपदा के प्रभावित परिवार हैं। पर्वतीय समाज के पीड़ित परिवारों ने बताया कि वर्ष 2000 में बागेश्वर जिले के माल्सा गांव में दैवी आपदा ने उनका सब कुछ छीन लिया था।
इसके बाद उन्हें यहां बैगुल डैम के किनारे बसाया गया था। फफकते हुए महिलाओं ने कहा कि बागेश्वर में आपदा ने मार डाला और अब वन विभाग ने उन्हें बेघर कर दिया।
विज्ञापन
इससे एक बुजुर्ग महिला घायल हो गई। हालांकि, वनाधिकारी उनके आरोपों को नकार रहे हैं। रेंजर का आरोप है कि ग्रामीणों ने पथराव, आगजनी कर एक बाइक भी फूंक दी। बचाव में वनकर्मियों को तीन राउंड फायर करने पड़े। किच्छा के एसडीएम, सीओ ने घटनास्थल का मुआयना किया।
विज्ञापन
वरिष्ठ भाजपा नेता सुरेश गंगवार ने गांव पहुंचकर पीड़ित परिवारों की पीड़ा जानी और ग्रामीणों के साथ बरा पुलिस चौकी पहुंचकर वन विभाग के रेंजर, कर्मियों खिलाफ तहरीर दी। बैगुल जलाशय तराई पूर्वी वन प्रभाग की बाराकोली रेंज की सीमा से सटा है।
विज्ञापन
इसी डैम के किनारे अतिक्रमण हुआ है। इसे हटाने के लिए बाराकोली के रेंजर प्रदीप धौलाखंडी शनिवार को वन कर्मियों की टीम के साथ मौके पर पहुंचे। यह बस्ती किच्छा तहसील की फिरोजपुर ग्रामसभा के तोक/मंझरा वनकुइयां दिलीपनगर के नाम पर बसी है।
बस्ती में तटबंध किनारे 80 परिवार बसे हैं। वनकर्मियों ने इनमें से करीब 20 परिवारों की झोपड़ियां तोड़ दीं। झोपड़ी में जल रहे चूल्हों से झोपड़ियों में आग भी लग गई। इससे ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। कई परिवार तो झोपड़ियों से सामान भी बाहर नहीं निकाल सके।
ग्रामीणों ने वन विभाग पर झोपड़ियां फूंकने का आरोप लगाया। ग्रामीणों ने इसका विरोध किया तो वन कर्मी लाठियां बरसाने लगे और कई राउंड फायरिंग भी की। इससे अफरातफरी मच गई। लाठीचार्ज में गांव की बुजुर्ग महिला बसंती देवी (70) पत्नी स्व. रमीराम घायल हो गई।
उसे आपातकालीन 108 एंबुलेंस से किच्छा के सीएचसी में भर्ती कराया गया है। सूचना मिलते ही किच्छा के एसडीएम नरेश चंद दुर्गापाल, सीओ हिमांशु शाह, तहसीलदार सुदेश चौहान, कोतवाल योगेशनाथ पांडे भी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी ली।
जिला पंचायत सदस्य और वरिष्ठ भाजपा नेता सुरेश गंगवार ने भी ग्रामीणों की पीड़ा सुनी और अधिकारियों से बाराकोली वन रेंजर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की। रेंजर का आरोप है कि अतिक्रमण हटाने पहुंचते ही ग्रामीणों ने टीम पर पथराव कर दिया।
बचाव में उन्होंने तीन राउंड हवाई फायरिंग की थी। बताया कि ग्रामीणों ने एक वन कर्मी की बाइक भी फूंक डाली। ग्रामीणों ने गंगवार के साथ बरा पुलिस चौकी में रेंजर समेत अन्य वन कर्मियों के खिलाफ तहरीर देकर कानूनी कार्रवाई की मांग की। एसडीएम दुर्गापाल ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
बैगुल जलाशय की नापजोख होगी : एसडीएम
किच्छा के एसडीएम नरेश चंद दुर्गापाल ने कहा कि बैगुल जलाशय के किनारे अतिक्रमण की जद में आई जमीन की नापजोख होगी ताकि यह साफ हो कि यह जमीन सिंचाई विभाग की है या वन विभाग की।
वन विभाग और सिंचाई विभाग दोनों की टीमों को साथ लेकर अतिक्रमण का चिन्हीकरण करवाया जाएगा। बताया कि शनिवार को आगजनी, पथराव की जो घटना हुई उसकी पूरी जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
वनकर्मियों ने दो दिन पहले भी अतिक्रमण हटाया था
रेंजर प्रदीप धौलाखंडी ने बताया कि दो दिन पहले उन्होंने इस क्षेत्र से अतिक्रमण हटवाया गया था। बताया कि अतिक्रमणकारियों ने दोबारा झोपड़ियां बना लीं। बताया कि शनिवार सुबह वह पुलभट्ठा थाने से पुलिस फोर्स लेकर अतिक्रमण हटाने पहुंचे थे।
टीम ने जैसे ही अतिक्रमण हटाने का काम शुरू किया तो वहां खड़ी भीड़ ने पथराव कर दिया। आरोप लगाया कि भीड़ में से किसी ने झोपड़ी में आग लगा दी। भीड़ ने वन दरोगा केशव सिंह धौनी पर हमले का प्रयास किया तो धौनी ने अपने बचाव में हवाई फायरिंग की। तभी वनकर्मियों की टीम शक्तिफार्म किच्छा रोड पर सुरक्षित पहुंच सकी।
बैगुल डैम और नाले में फेंका खाना
ग्रामीणों के अनुसार अतिक्रमण हटाने के दौरान वन विभाग ने ग्रामीणों पर जरा भी रहम नहीं किया। जब सुबह करीब 11 बजे टीम वहां पहुंची तो इन परिवारों में से कुछ घरों में दोपहर का भोजन पक रहा था। टीम ने झोपड़ियां तो ढहाई ही, उनके चूल्हों से भोजन उठाकर पास के जलाशय और नाले में फेंक दिया।
आठ नल भी उखाड़ फेंके
अतिक्रमण हटाने गई वन टीम ने ग्रामीणों के घरों में लगे करीब आठ नल भी उखाड़ फेंके। इससे गांव में पीने के पानी की किल्लत हो गई है। ग्रामीणों ने कहा कि वन विभाग ने झोपड़ियों में आग लगाकर उन्हें सामान निकालने तक का मौका नहीं दिया। इस कारण 20 परिवारों में रहने वाले करीब 100 लोग बेघर हो गए हैं।
ट्रैक्टर के टायर में गोली लगी
अतिक्रमण हटाने के दौरान बवाल होने पर फायरिंग के बाद एक गोली ट्रैक्टर के टायर में जा लगी। इससे टायर फट गया। हवाई फायरिंग से बिजली की लाइन भी क्षतिग्रस्त हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि फायरिंग हवा में नहीं बल्कि सीधे दागी गई थी। इसी कारण ट्रैक्टर का टायर फटा। गनीमत रही कि गोलियां किसी ग्रामीण को नहीं लगीं।
ग्रामीण सिंचाई भूमि पर काबिज : गंगवार
जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी प्रसाद गंगवार के पुत्र और वरिष्ठ भाजपा नेता सुरेश गंगवार ने कहा कि जिस भूमि से अतिक्रमण हटाया गया वह सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश की जमीन है। बस्ती के पीछे स्थित नाले के पार वन विभाग की भूमि है। बताया कि हटाए गए परिवार करीब 25 साल से सिंचाई भूमि पर काबिज हैं।
पर्वतीय समाज के तमाम लोग वर्ष 2000 में यहां बसाए गए थे। करीब आठ साल पहले उन्होंने यहां राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत बिजली पहुंचाई थी। इस पर वन विभाग ने रोक लगा दी थी। इसके बाद सिंचाई विभाग की जमीन पर लाइन खींचकर पोल लगाए गए थे।
दैवी आपदा प्रभावित परिवार हैं पीड़ित
बैगुल डैम किनारे बसे दलीपनगर के ये पीड़ित परिवार दैवी आपदा के प्रभावित परिवार हैं। पर्वतीय समाज के पीड़ित परिवारों ने बताया कि वर्ष 2000 में बागेश्वर जिले के माल्सा गांव में दैवी आपदा ने उनका सब कुछ छीन लिया था।
इसके बाद उन्हें यहां बैगुल डैम के किनारे बसाया गया था। फफकते हुए महिलाओं ने कहा कि बागेश्वर में आपदा ने मार डाला और अब वन विभाग ने उन्हें बेघर कर दिया।