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माघ मेले को लेकर पीसीबी ने शुरू की नदियों की निगरानी 19-06-53
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काशीपुर। माघ मेले को लेकर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नदियों की निगरानी शुरू कर दी है। माघ स्नान के लिए गंगा का पानी दूषित न हो इसके लिए पीसीबी एक जनवरी से 15 मार्च तक रोजाना सभी नदियों से पानी का सैंपल लेकर उसकी जांच करेगा। नदियों में दूषित पानी छोड़ने वाले उद्योगों पर भी पीसीबी की नजर रहेगी।
14 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर देशभर की नदियों में श्रद्धालु स्नान करते हैं। काशीपुर में भी गंगा की कई सहायक नदियां हैं और इसी क्षेत्र में कई छोटे-बड़े उद्योग भी संचालित होते हैं। उद्योगों के कैमिकल आदि से नदियों का पानी दूषित न हो इसके लिए पीसीबी समय-समय पर पानी की सैंपलिंग करता है। माघ महीने में पीसीबी की ओर से इसके लिए विशेष तौर पर अभियान चलाया जाता है। इस वर्ष भी पीसीबी ने एक जनवरी से अभियान शुरू किया है जो 15 मार्च तक चलेगा। इस दौरान पीसीबी रोजाना नदियों के पानी का सैंपल लेकर उसकी जांच करेेगा। इसके साथ ही उद्योगों की जांच भी पीसीबी की ओर से की जाएगी। शासन से इसके लिए पीसीबी को नदियों की विशेष निगरानी करने के निर्देश जारी हुए हैं। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस ढाई महीने में संयुक्त रूप से नदियों की निगरानी करेगा।
दूषित पानी छोड़ने वाले उद्योगों पर बंदी की कार्रवाई
काशीपुर। नदियों का पानी दूषित होने का सबसे बड़ा कारण उद्योगों को माना गया है। यूपी और उत्तराखंड मेें कई पेपर मिल के साथ ही अन्य छोटे- बड़े उद्योग हैं जिनका दूषित पानी नदियों में छोड़ दिया जाता है। माघ मेले के स्नान को सुरक्षित करने के लिए पीसीबी नदियों में दूषित पानी छोड़ने वाले उद्योगों को किसी तरह की छूट नहीं देगा। ऐसे उद्योगों के खिलाफ बंदी की कार्रवाई की जाएगी।
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माघ मेले को देखते हुए एक जनवरी से 15 मार्च तक नदियों की निगरानी कर रोजाना पानी के सैंपल लिए जाऐंगे। सैंपल की रिपोर्ट के आधार पर नदियों में दूषित पानी छोड़ने वाले उद्योगों के खिलाफ बंदी की कार्रवाई की जाएगी।
- नरेश गोस्वामी, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड काशीपुर
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14 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर देशभर की नदियों में श्रद्धालु स्नान करते हैं। काशीपुर में भी गंगा की कई सहायक नदियां हैं और इसी क्षेत्र में कई छोटे-बड़े उद्योग भी संचालित होते हैं। उद्योगों के कैमिकल आदि से नदियों का पानी दूषित न हो इसके लिए पीसीबी समय-समय पर पानी की सैंपलिंग करता है। माघ महीने में पीसीबी की ओर से इसके लिए विशेष तौर पर अभियान चलाया जाता है। इस वर्ष भी पीसीबी ने एक जनवरी से अभियान शुरू किया है जो 15 मार्च तक चलेगा। इस दौरान पीसीबी रोजाना नदियों के पानी का सैंपल लेकर उसकी जांच करेेगा। इसके साथ ही उद्योगों की जांच भी पीसीबी की ओर से की जाएगी। शासन से इसके लिए पीसीबी को नदियों की विशेष निगरानी करने के निर्देश जारी हुए हैं। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस ढाई महीने में संयुक्त रूप से नदियों की निगरानी करेगा।
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दूषित पानी छोड़ने वाले उद्योगों पर बंदी की कार्रवाई
काशीपुर। नदियों का पानी दूषित होने का सबसे बड़ा कारण उद्योगों को माना गया है। यूपी और उत्तराखंड मेें कई पेपर मिल के साथ ही अन्य छोटे- बड़े उद्योग हैं जिनका दूषित पानी नदियों में छोड़ दिया जाता है। माघ मेले के स्नान को सुरक्षित करने के लिए पीसीबी नदियों में दूषित पानी छोड़ने वाले उद्योगों को किसी तरह की छूट नहीं देगा। ऐसे उद्योगों के खिलाफ बंदी की कार्रवाई की जाएगी।
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माघ मेले को देखते हुए एक जनवरी से 15 मार्च तक नदियों की निगरानी कर रोजाना पानी के सैंपल लिए जाऐंगे। सैंपल की रिपोर्ट के आधार पर नदियों में दूषित पानी छोड़ने वाले उद्योगों के खिलाफ बंदी की कार्रवाई की जाएगी।
- नरेश गोस्वामी, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड काशीपुर