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शौचालयों के प्रति लाभार्थियों में दिलचस्पी नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
Updated Tue, 14 Jun 2016 12:11 AM IST
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शौचालय
- फोटो : अमर उजाला
नगर निगम क्षेत्र को शौच मुक्त करने में योजना फिलहाल परवान चढ़ती नहीं दिखाई पड़ रही है। शहर में चिन्हित शौचालय विहीन 138 परिवारों में से 38 के ही शौचालय बन सके हैं।
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इससे केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत अभियान को झटका लगा है। दरअसल एक साल पहले महापौर योजना के तहत घर-घर शौचालय बनाने का अभियान शुरू किया गया था। इसमें लाभार्थी को दस हजार रुपये देने थे जबकि पांच हजार रुपये नगर निगम को वहन करना है। यह योजना शुरू ही हुई थी कि केंद्र सरकार की स्वच्छ भारत अभियान योजना शुरू हो गई।
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इस योजना में दो हजार रुपये केंद्र सरकार, तीन हजार तीन सौ रुपया राज्य सरकार और पांच हजार रुपये लाभार्थी को देने होते हैं। इस योजना में 163 परिवार चिन्हित किए गए थे। जबकि वास्तविक संख्या काफी अधिक बताई जा रही है। इनमें से भी केवल 38 शौचालय ही बन सके हैं। इससे नगर को स्वच्छ बनाने का अभियान सिरे नहीं चढ़ रहा है। केंद्र सरकार का स्वच्छ भारत अभियान को झटका लगा है।
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सुधरेगी निगम के पार्कों की दशा
नगर निगम के पार्कों की दशा सुधरने की उम्मीद बंधी है। सरकार ने पार्कों के सुंदरीकरण के लिए साढ़े पांच करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। नगर के सभी 23 पार्कों की हालत खस्ता है। केवल आवास विकास स्थित सुभाष पार्क की दशा इसलिए ठीक है क्योंकि उसे फैक्ट्री ने गोद लिया था। किसी पार्क में लोगों के वाहन खड़े रहते तो किसी में झाड़ियां खड़ी हैं।
ज्यादातर पार्कों में फूल ही नहीं दिखाई देते। रख रखाव का जिम्मा केवल एक माली पर है। सभी पार्कों की चारदीवारी टूटी हुई है। सहायक नगर अधिकारी संजीव मेहरोत्रा ने कहा कि पार्कों के सुंदरीकरण का काम जल्दी शुरू किया जाएगा। इसके लिए साढ़े पांच करोड़ रुपये सरकार से मंजूर हुए हैं।
घर-घर महापौर शौचालय योजना को ही स्वच्छ भारत अभियान योजना में तब्दील किया गया। चिन्हित किए गए 163 शौचालय विहीन परिवारों में से अभी तक केवल 38 ने ही बनवाया है। कार्यालय अधीक्षक विकास शर्मा ने बताया कि जिन लोगों ने अभी तक शौचालय नहीं बनाए है उनके भी शौचालय बनाने की प्रक्रिया चल रही है।
- संजीव मेहरोत्रा, सहायक नगर अधिकारी