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सीईटीपी के टैंक में जहरीली गैसों से प्लांट हेड समेत तीन की मौत
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रुद्रपुर सिडकुल के सीईटीपी प्लांट परिसर में रोती प्लांट हैड की पत्नी अनीता को ढाढ़स बंधाती महिल?
- फोटो : RUDRAPUR
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रुद्रपुर। सिडकुल पंतनगर स्थित कॉमन एंफ्यूलेंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) के टैंक की सफाई करते समय जहरीली गैसों (कार्बन मोनोक्साइड, मीथेन और अमोनिया) से दम घुटने की वजह प्लांट हेड समेत तीन लोगों की मौत हो गई। तीनों की मौत के बाद रस्सियों के सहारे टैंक में उतरे वाहन चालक की भी गैस के संपर्क में आने से तबियत बिगड़ गई, जिसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इधर पुलिस, एनडीआरएफ और दमकल कर्मियों ने डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद तीनों शवों को टैैंक से बाहर निकालने के बाद मोर्चरी भेज दिया। घटना की सूचना मृतकों के परिजनों को दी गई है।
जानकारी के अनुसार सिडकुल के सेक्टर सात में रेमके इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड सीईटीपी का संचालन करती है। प्लांट में उद्योगों के प्रदूषित पानी का ट्रीटमेंट किया जाता है। सोमवार की शाम करीब साढ़े तीन बजे कंपनी में तैनात हेल्पर हरिपाल (38) निवासी ग्राम चंपतपुर बरेली हाल निवासी सिडकुल ढाल ट्रांजिट कैंप सीईटीपी के स्टोरेज टैंक की दीवार की सफाई कर रहा था। इसी बीच वह टैंक में जमा प्रदूषित पानी से निकली जहरीली गैस के संपर्क में आकर टैंक में गिर गया। इसके बाद उसे बचाने के लिए प्लांट हेड रमन उर्फ रमनजी मेकाला (43) मूल निवासी हैदराबाद और हाल निवासी ओमेक्स रिवेरा रुद्रपुर और मार्केटिंग कर्मचारी अवधेश (34) निवासी ग्राम पलहनी आजमगढ़ यूपी और हाल निवासी मेट्रोपोलिस कालोनी रुद्रपुर भी टैंक में घुस गए और दम घुटने से उनकी भी मौत हो गई। इससे कंपनी के अन्य कर्मियों में हड़कंप मच गया।
उन्होंने सूचना सिडकुल पुलिस को देने के साथ ही कंपनी के वाहन चालक विजेंद्र गोस्वामी (28) निवासी ग्राम रदौरी रामपुर को रस्सियां बांधकर टैंक में उतारा, लेकिन गैस के संपर्क में आने की वजह से वह छटपटाए तो उसे बाहर निकालकर जिला अस्पताल भेज दिया गया। सूचना पर सीएफओ वंश बहादुर, आरएम सिडकुल कमल किशोर कफल्टिया, सीओ आशीष भारद्वाज के साथ पुलिस और दमकल कर्मी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने एसडीआरएफ कर्मियों के साथ रेस्क्यू अभियान चलाया और डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद तीनों शवों को बाहर निकाल लिया गया। इसके बाद एडीएम डॉ. ललित नारायण मिश्र, एसडीएम प्रत्यूष सिंह और एनडीआरएफ की टीम भी पहुंच गई थी।
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सिडकुल चौकी के माध्यम से कंपनी के तीन कर्मचारियों के टैंक में गिरने से मौत होने की सूचना मिली थी। जब घटनास्थल पर पहुंचे तो टैंक में तीन लोगों के शव दिख रहे थे। इसके बाद एसडीआरएफ, फायर और जिला पुलिस ने शवों को निकाला। कंपनी कर्मचारियों ने बताया कि एक कर्मचारी पहले सफाई करने गया था और उसके चिल्लाने पर प्लांट हेड, मार्केटिंग कर्मचारी मदद के लिए पहुंचे थे। चौथे कर्मी के बेहोश होने पर उसे अन्य कर्मचारियों ने बाहर निकाल दिया था। आशीष भारद्वाज, सीओ पंतनगर।
हेल्पर की जान बचाने को भावुकतावश उठाया कदम बना जानलेवा
रुद्रपुर। सीईटीपी के स्टोरेज प्लांट में बिना सुरक्षा इंतजाम के सफाई करने उतरे हेल्पर को बचाने के लिए भावुकतावश उठाया गया कदम प्लांट हेड और मार्केटिंग कर्मचारी के लिए जानलेवा साबित हो गया। टैंक में जहरीली गैस की चपेट में आकर एक कर्मचारी की जान आफत में पड़ने पर उसको बचाने की कोशिश में दो और लोगों मौत के मुंह में चले गए। चौथा कर्मचारी रस्सियों के सहारे टैंक में उतरा था वरना उसको भी जान के लाले पड़ जाते। पूरी घटना में बड़ी लापरवाही सामने आई है।
दरअसल सिडकुल के उद्योगों का पानी सीईटीपी के स्टोरेज टैंक में जमा होता है और वहां से पानी को ट्रीटमेंट के लिए प्लांट में भेजा जाता है। स्टोरेज टैंक में सफाई और अन्य कार्यों के लिए सावधानी बरतने के साथ ही हाइड्रा का इस्तेमाल किया जाता था। टैंक में जहरीली गैस की स्थिति का पता लगाने के बाद ही कर्मचारी हाइड्रा में बंधी रस्सियों के सहारे टैंक में उतरकर कार्य करते थे। लेकिन सोमवार की शाम बिना सुरक्षा इंतजाम के हेल्पर हरीपाल टैंक में उतरा था। जहरीली गैस के प्रभाव में आने पर वह चिल्लाते हुए टैंक में गिर गया था। बताया जा रहा है कि प्लांट हेड रमन और अवधेश भी सुरक्षा इंतजामों को दरकिनार कर एक-एक कर टैंक में बचाव के लिए उतरे और काल के ग्रास बन गए। चौथे कर्मचारी विजेंदर को रस्सियों से बांधकर टैंक में उतारा गया और इसी वजह से उसकी जान बच गई। सीएफओ वंश बहादुर ने बताया कि अगर सुरक्षा इंतजामों का प्रयोग किया होता तो तीन लोगों को जान नहीं गंवानी पड़ती। तीनों की मौत जहरीली अमोनिया गैस में दम घुटने से हुई है।
दमकल वाहन से टैंक में पानी डालकर गैस का प्रभाव किया कम
रुद्रपुर। तीन लोगों की स्टोरेज टैंक में मौत के बाद एसडीआरएफ, पुलिस और दमकल के जवान सीईटीपी में पहुंच गए थे। सीएफओ वंश बहादुर ने बताया कि टैंक से गैस का रिसाव काफी हो रहा था। यह गैस प्लांट के प्रवेश गेट तक महसूस हो रही थी। ऐेसे में रेस्क्यू अभियान चलाना संभव नहीं था। एक वाहन से टैंक में पानी डालकर गैस के प्रभाव को बेहद कम किया गया। इसके बाद रेस्क्यू अभियान चलाकर शव निकाले गए। (संवाद)
रेस्क्यू कांटे और रोप की मदद से निकाले गए
रुद्रपुर। स्टोरेज टैंक में प्लांट हेड सहित तीन कर्मचारियों के शव निकालने के लिए संयुक्त टीम को खासी मशक्कत करनी पड़ी। रेस्क्यू कांटों में शवों के अंगों को फंसाकर बमुश्किल टैंक से बाहर निकाला गया। जहरीली गैस की वजह से टैंक के बाहर से ही शवों को निकालने का अभियान चलाया गया। एसडीआरएफ टीम की अगुवाई कर रहे एसआई अर्जुन सिंह ने बताया कि अमोनिया गैस का रिसाव होने की वजह से सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। इन परिस्थितियों में भी टीम ने डेढ़ घंटे में टैंक से शवों को बाहर निकाल लिया। दम घुटने से तीनों की मौत हुई है। टीम में सुरेंद्र सिंह, सुनील चंद्र, राकेश चंद्र, संतोष सहित अनेक मौजूद रहे। संवाद
बेटे का था जन्मदिन, पति की मौत से पत्नी बदहवास
रुद्रपुर। स्टोरेज टैंक में गिरकर जान गंवाने वाले तीन लोगों ने शामिल प्लांट हेड रमनजी मेकाला के बेटे का सोमवार को जन्मदिन था। रमन के दो बच्चे हैं। जन्मदिन मनाने के लिए घर में तैयारी चल रही थी लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था। सहयोगी को बचाने की कोशिश में रमनजी और अन्य की मौत हो गई। रमन की मौत से जन्मदिन की खुशियां मातम में बदल गईं। सूचना मिलने पर बदहवास हालत में रमनजी की पत्नी अनीता घटनास्थल पर पहुंच गई। उसके साथ आए लोगों ने किसी तरह रोती बिलखती अनिता को ढाढ़स बंधाया। संवाद
भावुक होकर टैंक में गया था
रुद्रपुर। जिला अस्पताल में भर्ती विजेंदर ने बताया कि उसे पता चला कि कंपनी के तीन कर्मचारी टैंक में गिर गए हैं। उसे यह नहीं पता कि कौन पहले गिरा था। वह भावुक होकर खुद पर रस्सियां बांधकर टैंक में गया था। इस दौरान वह बेहोश हो गया। इसके बाद अन्य लोगों ने उसे बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। घटना में तीन लोगों की जान चली गई। संवाद
गैस मीटर हो ताकि गैस लेवल की हो जानकारी
रुद्रपुर। सीएफओ वंश बहादुर ने बताया कि इस प्रकार के सीवर टैंकों में गैस मीटर होना चाहिए ताकि उसमें गैस की मात्रा का पता लग सके। इसके साथ ही वाटर स्प्रे सिस्टम होना चाहिए। स्प्रे करके सावधानियां बरतने के साथ ही मास्क पहनकर टैंक में उतरना चाहिए। हादसे से पहले तीनों ने सुरक्षा के इंतजामों का प्रयोग नहीं किया जो उनके लिए जानलेवा साबित हुआ। संवाद
पुलिस प्रशासन के साथ ही कंपनियों के अधिकारी भी पहुंचे
रुद्रपुर। सीईटीपी में हुए हादसे की जानकारी होने पर पुलिस प्रशासन के साथ कईं कंपनियों के अधिकारी और सिडकुल इंटरप्रिन्योर सोसायटी के पदाधिकारी भी वहां पहुंच गए। सोसायटी के उपाध्यक्ष श्रीकर सिन्हा, संरक्षक अजय तिवारी, राजेश मिश्रा सहित अन्य ने रेस्क्यू अभियान में संयुक्त टीमों की मदद भी की। बताया कि प्लांट हेड बेहद व्यावहारिक थे लेकिन हादसा बेहद दुखदाई है। घातक टैंक में जाने से पहले सुरक्षा इंतजाम किए जाने चाहिए थे।
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जानकारी के अनुसार सिडकुल के सेक्टर सात में रेमके इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड सीईटीपी का संचालन करती है। प्लांट में उद्योगों के प्रदूषित पानी का ट्रीटमेंट किया जाता है। सोमवार की शाम करीब साढ़े तीन बजे कंपनी में तैनात हेल्पर हरिपाल (38) निवासी ग्राम चंपतपुर बरेली हाल निवासी सिडकुल ढाल ट्रांजिट कैंप सीईटीपी के स्टोरेज टैंक की दीवार की सफाई कर रहा था। इसी बीच वह टैंक में जमा प्रदूषित पानी से निकली जहरीली गैस के संपर्क में आकर टैंक में गिर गया। इसके बाद उसे बचाने के लिए प्लांट हेड रमन उर्फ रमनजी मेकाला (43) मूल निवासी हैदराबाद और हाल निवासी ओमेक्स रिवेरा रुद्रपुर और मार्केटिंग कर्मचारी अवधेश (34) निवासी ग्राम पलहनी आजमगढ़ यूपी और हाल निवासी मेट्रोपोलिस कालोनी रुद्रपुर भी टैंक में घुस गए और दम घुटने से उनकी भी मौत हो गई। इससे कंपनी के अन्य कर्मियों में हड़कंप मच गया।
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उन्होंने सूचना सिडकुल पुलिस को देने के साथ ही कंपनी के वाहन चालक विजेंद्र गोस्वामी (28) निवासी ग्राम रदौरी रामपुर को रस्सियां बांधकर टैंक में उतारा, लेकिन गैस के संपर्क में आने की वजह से वह छटपटाए तो उसे बाहर निकालकर जिला अस्पताल भेज दिया गया। सूचना पर सीएफओ वंश बहादुर, आरएम सिडकुल कमल किशोर कफल्टिया, सीओ आशीष भारद्वाज के साथ पुलिस और दमकल कर्मी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने एसडीआरएफ कर्मियों के साथ रेस्क्यू अभियान चलाया और डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद तीनों शवों को बाहर निकाल लिया गया। इसके बाद एडीएम डॉ. ललित नारायण मिश्र, एसडीएम प्रत्यूष सिंह और एनडीआरएफ की टीम भी पहुंच गई थी।
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सिडकुल चौकी के माध्यम से कंपनी के तीन कर्मचारियों के टैंक में गिरने से मौत होने की सूचना मिली थी। जब घटनास्थल पर पहुंचे तो टैंक में तीन लोगों के शव दिख रहे थे। इसके बाद एसडीआरएफ, फायर और जिला पुलिस ने शवों को निकाला। कंपनी कर्मचारियों ने बताया कि एक कर्मचारी पहले सफाई करने गया था और उसके चिल्लाने पर प्लांट हेड, मार्केटिंग कर्मचारी मदद के लिए पहुंचे थे। चौथे कर्मी के बेहोश होने पर उसे अन्य कर्मचारियों ने बाहर निकाल दिया था। आशीष भारद्वाज, सीओ पंतनगर।
हेल्पर की जान बचाने को भावुकतावश उठाया कदम बना जानलेवा
रुद्रपुर। सीईटीपी के स्टोरेज प्लांट में बिना सुरक्षा इंतजाम के सफाई करने उतरे हेल्पर को बचाने के लिए भावुकतावश उठाया गया कदम प्लांट हेड और मार्केटिंग कर्मचारी के लिए जानलेवा साबित हो गया। टैंक में जहरीली गैस की चपेट में आकर एक कर्मचारी की जान आफत में पड़ने पर उसको बचाने की कोशिश में दो और लोगों मौत के मुंह में चले गए। चौथा कर्मचारी रस्सियों के सहारे टैंक में उतरा था वरना उसको भी जान के लाले पड़ जाते। पूरी घटना में बड़ी लापरवाही सामने आई है।
दरअसल सिडकुल के उद्योगों का पानी सीईटीपी के स्टोरेज टैंक में जमा होता है और वहां से पानी को ट्रीटमेंट के लिए प्लांट में भेजा जाता है। स्टोरेज टैंक में सफाई और अन्य कार्यों के लिए सावधानी बरतने के साथ ही हाइड्रा का इस्तेमाल किया जाता था। टैंक में जहरीली गैस की स्थिति का पता लगाने के बाद ही कर्मचारी हाइड्रा में बंधी रस्सियों के सहारे टैंक में उतरकर कार्य करते थे। लेकिन सोमवार की शाम बिना सुरक्षा इंतजाम के हेल्पर हरीपाल टैंक में उतरा था। जहरीली गैस के प्रभाव में आने पर वह चिल्लाते हुए टैंक में गिर गया था। बताया जा रहा है कि प्लांट हेड रमन और अवधेश भी सुरक्षा इंतजामों को दरकिनार कर एक-एक कर टैंक में बचाव के लिए उतरे और काल के ग्रास बन गए। चौथे कर्मचारी विजेंदर को रस्सियों से बांधकर टैंक में उतारा गया और इसी वजह से उसकी जान बच गई। सीएफओ वंश बहादुर ने बताया कि अगर सुरक्षा इंतजामों का प्रयोग किया होता तो तीन लोगों को जान नहीं गंवानी पड़ती। तीनों की मौत जहरीली अमोनिया गैस में दम घुटने से हुई है।
दमकल वाहन से टैंक में पानी डालकर गैस का प्रभाव किया कम
रुद्रपुर। तीन लोगों की स्टोरेज टैंक में मौत के बाद एसडीआरएफ, पुलिस और दमकल के जवान सीईटीपी में पहुंच गए थे। सीएफओ वंश बहादुर ने बताया कि टैंक से गैस का रिसाव काफी हो रहा था। यह गैस प्लांट के प्रवेश गेट तक महसूस हो रही थी। ऐेसे में रेस्क्यू अभियान चलाना संभव नहीं था। एक वाहन से टैंक में पानी डालकर गैस के प्रभाव को बेहद कम किया गया। इसके बाद रेस्क्यू अभियान चलाकर शव निकाले गए। (संवाद)
रेस्क्यू कांटे और रोप की मदद से निकाले गए
रुद्रपुर। स्टोरेज टैंक में प्लांट हेड सहित तीन कर्मचारियों के शव निकालने के लिए संयुक्त टीम को खासी मशक्कत करनी पड़ी। रेस्क्यू कांटों में शवों के अंगों को फंसाकर बमुश्किल टैंक से बाहर निकाला गया। जहरीली गैस की वजह से टैंक के बाहर से ही शवों को निकालने का अभियान चलाया गया। एसडीआरएफ टीम की अगुवाई कर रहे एसआई अर्जुन सिंह ने बताया कि अमोनिया गैस का रिसाव होने की वजह से सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। इन परिस्थितियों में भी टीम ने डेढ़ घंटे में टैंक से शवों को बाहर निकाल लिया। दम घुटने से तीनों की मौत हुई है। टीम में सुरेंद्र सिंह, सुनील चंद्र, राकेश चंद्र, संतोष सहित अनेक मौजूद रहे। संवाद
बेटे का था जन्मदिन, पति की मौत से पत्नी बदहवास
रुद्रपुर। स्टोरेज टैंक में गिरकर जान गंवाने वाले तीन लोगों ने शामिल प्लांट हेड रमनजी मेकाला के बेटे का सोमवार को जन्मदिन था। रमन के दो बच्चे हैं। जन्मदिन मनाने के लिए घर में तैयारी चल रही थी लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था। सहयोगी को बचाने की कोशिश में रमनजी और अन्य की मौत हो गई। रमन की मौत से जन्मदिन की खुशियां मातम में बदल गईं। सूचना मिलने पर बदहवास हालत में रमनजी की पत्नी अनीता घटनास्थल पर पहुंच गई। उसके साथ आए लोगों ने किसी तरह रोती बिलखती अनिता को ढाढ़स बंधाया। संवाद
भावुक होकर टैंक में गया था
रुद्रपुर। जिला अस्पताल में भर्ती विजेंदर ने बताया कि उसे पता चला कि कंपनी के तीन कर्मचारी टैंक में गिर गए हैं। उसे यह नहीं पता कि कौन पहले गिरा था। वह भावुक होकर खुद पर रस्सियां बांधकर टैंक में गया था। इस दौरान वह बेहोश हो गया। इसके बाद अन्य लोगों ने उसे बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। घटना में तीन लोगों की जान चली गई। संवाद
गैस मीटर हो ताकि गैस लेवल की हो जानकारी
रुद्रपुर। सीएफओ वंश बहादुर ने बताया कि इस प्रकार के सीवर टैंकों में गैस मीटर होना चाहिए ताकि उसमें गैस की मात्रा का पता लग सके। इसके साथ ही वाटर स्प्रे सिस्टम होना चाहिए। स्प्रे करके सावधानियां बरतने के साथ ही मास्क पहनकर टैंक में उतरना चाहिए। हादसे से पहले तीनों ने सुरक्षा के इंतजामों का प्रयोग नहीं किया जो उनके लिए जानलेवा साबित हुआ। संवाद
पुलिस प्रशासन के साथ ही कंपनियों के अधिकारी भी पहुंचे
रुद्रपुर। सीईटीपी में हुए हादसे की जानकारी होने पर पुलिस प्रशासन के साथ कईं कंपनियों के अधिकारी और सिडकुल इंटरप्रिन्योर सोसायटी के पदाधिकारी भी वहां पहुंच गए। सोसायटी के उपाध्यक्ष श्रीकर सिन्हा, संरक्षक अजय तिवारी, राजेश मिश्रा सहित अन्य ने रेस्क्यू अभियान में संयुक्त टीमों की मदद भी की। बताया कि प्लांट हेड बेहद व्यावहारिक थे लेकिन हादसा बेहद दुखदाई है। घातक टैंक में जाने से पहले सुरक्षा इंतजाम किए जाने चाहिए थे।

रुद्रपुर सिडकुल के सीईटीपी प्लांट के स्टोरेज टैंक से शवों को निकालकर ले जाते एनडीआरएफ के जवान।- फोटो : RUDRAPUR

रुद्रपुर सिडकुल के सीईटीपी प्लांट में घटना के बाद लगी भीड़।- फोटो : RUDRAPUR

रुद्रपुर सिडकुल के सीईटीपी प्लांट में घटना की जानकारी लेते एडीएम।- फोटो : RUDRAPUR

रुद्रपुर सिडकुल में सीईटीपी के स्टोरेज टैंक से शवों को निकालते एनडीआरएफ व पुलिस के जवान।- फोटो : RUDRAPUR