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...तो तराई में 95 हजार हेक्टेयर फसल पर लग जाएगा ग्रहण
अमर उजाला ब्यूरो, रुद्रपुर
Updated Fri, 18 Nov 2016 10:36 PM IST
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बगवाड़ा क्षेत्र स्थित रुद्रपुर किसान सेवा केंद्र वीरान पड़ा हुआ
- फोटो : अमर उजाला
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500 और 1000 के नोट बंदी की मार इस बार तराई के किसानों पर भी पड़ रही है। सहकारी समितियों से खाद खरीदने के लिए करेंसी की कमी के चलते इस बार 95 हजार हेक्टेयर में पैदा होने वाली गेहूं की फसल पर ग्रहण लगने के पूरे आसार बनने लगे हैं।
वर्तमान में धान बेचने के बाद किसानों के पास साल भर की कमाई मौजूद है। लेकिन 500 और 1000 के नोटों का चलन बंद होने से किसान परेशान हैं। अब गेहूं की फसल के लिए खाद कहां से खरीदें यह उनके सामने एक बड़ा संकट पैदा हो गया है। एक किसान आठ हजार से लेकर 20 हजार रुपये तक की खाद अपने खेतों में डालता है। ऐसे में पर्याप्त मात्रा में खाद खरीदने के लिए रुपयों की किल्लत के चलते रबी की फसल बर्बाद होने का संकट सताने लगा है।
वैज्ञानिकों का भी कहना है कि यह बुवाई का पीक समय है। ऐसे में अगर खेती को उर्वरा, सूक्ष्म पोषक तत्व और कृषि रसायन पर्याप्त मात्रा में नहीं मिला तो किसान बर्बाद हो जाएगा। हालांकि केंद्र सरकार ने शुक्रवार से किसानों को हर सप्ताह 25 हजार रुपये निकालने की छूट दी है। इसके बाद भी शुक्रवार को खाद बिक्री के किसान सेवा केंद्रों पर सन्नाटा ही पसरा है।
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गेहूं बुवाई के इस पीक सीजन में जिले के किसान सेवा सहकारी केंद्रों में खाद के लिए मारामारी होती थी। जिला प्रशासन अपनी देखरेख में खाद की बिक्री करवाता था, इसके बावजूद खाद ब्लैक में भी बिकती थी। आज जिले के किसान सेवा केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है।
किसान इस समय अपनी मेहनत की पूंजी को किसी तरह भुनाने के लिए धक्के खा रहा है। बैंकों के चक्कर काटने के बाद भी उन्हें इस समय सिर्फ निराशा ही हाथ लग रही है। जिला प्रशासन भी करेंसी के अभाव में लाचार हो गया है। उधर गेहूं की बुआई का यह सबसे अच्छा समय होता है। ऐसे में वर्तमान हालात किसानों को परेशान और चिंता में डुबोए हुए हैं। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के किसान सेवा केंद्रों पर सिर्फ सन्नाटा ही पसरा है।
यह समयबद्ध बुआई का पीक समय है। ऐसे में किसानों को आवश्यक सेवा में शामिल करते हुए उन्हें खाद खरीदने के लिए छूट दी जानी चाहिए। चूंकि ये सामूहिक परेशानी है, खेती प्रभावित होने से आम आदमी भी प्रभावित होगा। जिला ऊधमसिंह नगर में करीब 95 हजार हेक्टेयर में गेहूं की पैदावार होती है। समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिलने से फसल बर्बादी की ओर है। करेंसी बदलाव में किसानों को भारी छूट मिलनी चाहिए।
हालांकि अभी 20-22 दिन गेहूं बुआई के लिए बचे हैं, लेकिन यह सही है कि इस समय गेहूं की बुवाई के लिए अगर खाद नहीं मिली तो निश्चित तौर पर तराई में 50 प्रतिशत फसल बर्बाद हो जाएगी जो कि किसान पर भारी मार है। किसानों को थोड़ा इंतजार करना चाहिए, कुछ दिनों में स्थिति सामान्य हो जाएगी। हालांकि इस समय बुवाई का यह सीजन भी उचित माना जाता है, इसलिए किसानों को खाद की व्यवस्था की जानी चाहिए।
वर्तमान में धान बेचने के बाद किसानों के पास साल भर की कमाई मौजूद है। लेकिन 500 और 1000 के नोटों का चलन बंद होने से किसान परेशान हैं। अब गेहूं की फसल के लिए खाद कहां से खरीदें यह उनके सामने एक बड़ा संकट पैदा हो गया है। एक किसान आठ हजार से लेकर 20 हजार रुपये तक की खाद अपने खेतों में डालता है। ऐसे में पर्याप्त मात्रा में खाद खरीदने के लिए रुपयों की किल्लत के चलते रबी की फसल बर्बाद होने का संकट सताने लगा है।
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वैज्ञानिकों का भी कहना है कि यह बुवाई का पीक समय है। ऐसे में अगर खेती को उर्वरा, सूक्ष्म पोषक तत्व और कृषि रसायन पर्याप्त मात्रा में नहीं मिला तो किसान बर्बाद हो जाएगा। हालांकि केंद्र सरकार ने शुक्रवार से किसानों को हर सप्ताह 25 हजार रुपये निकालने की छूट दी है। इसके बाद भी शुक्रवार को खाद बिक्री के किसान सेवा केंद्रों पर सन्नाटा ही पसरा है।
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गेहूं बुवाई के इस पीक सीजन में जिले के किसान सेवा सहकारी केंद्रों में खाद के लिए मारामारी होती थी। जिला प्रशासन अपनी देखरेख में खाद की बिक्री करवाता था, इसके बावजूद खाद ब्लैक में भी बिकती थी। आज जिले के किसान सेवा केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है।
किसान इस समय अपनी मेहनत की पूंजी को किसी तरह भुनाने के लिए धक्के खा रहा है। बैंकों के चक्कर काटने के बाद भी उन्हें इस समय सिर्फ निराशा ही हाथ लग रही है। जिला प्रशासन भी करेंसी के अभाव में लाचार हो गया है। उधर गेहूं की बुआई का यह सबसे अच्छा समय होता है। ऐसे में वर्तमान हालात किसानों को परेशान और चिंता में डुबोए हुए हैं। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के किसान सेवा केंद्रों पर सिर्फ सन्नाटा ही पसरा है।
यह समयबद्ध बुआई का पीक समय है। ऐसे में किसानों को आवश्यक सेवा में शामिल करते हुए उन्हें खाद खरीदने के लिए छूट दी जानी चाहिए। चूंकि ये सामूहिक परेशानी है, खेती प्रभावित होने से आम आदमी भी प्रभावित होगा। जिला ऊधमसिंह नगर में करीब 95 हजार हेक्टेयर में गेहूं की पैदावार होती है। समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिलने से फसल बर्बादी की ओर है। करेंसी बदलाव में किसानों को भारी छूट मिलनी चाहिए।
हालांकि अभी 20-22 दिन गेहूं बुआई के लिए बचे हैं, लेकिन यह सही है कि इस समय गेहूं की बुवाई के लिए अगर खाद नहीं मिली तो निश्चित तौर पर तराई में 50 प्रतिशत फसल बर्बाद हो जाएगी जो कि किसान पर भारी मार है। किसानों को थोड़ा इंतजार करना चाहिए, कुछ दिनों में स्थिति सामान्य हो जाएगी। हालांकि इस समय बुवाई का यह सीजन भी उचित माना जाता है, इसलिए किसानों को खाद की व्यवस्था की जानी चाहिए।