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सात माह के कार्यकाल में यूएस नगर को दी थी नई पहचान 

Sun, 05 Jun 2016 11:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर Updated Sun, 05 Jun 2016 11:38 PM IST
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The seven-month stint in the US gave to the city a new identity
अक्ष्‍ात गुप्‍ता - फोटो : अमर उजाला

हंसमुख स्वभाव और विवेकशील कार्यशैली के लिए जाने जाने वाले अक्षत गुप्ता ने बतौर डीएम अपने यूएस नगर में 7 माह के कार्यकाल में जनपद को एक अलग पहचान दिलाई थी। अनाथ, गरीबों और बेसहारा लोगों के उत्थान पर उनका विशेष फोकस रहा। उन्होने जब से जनपद में कार्यभार संभाला तभी से अनाथ और दीन हीन बच्चों को एक अभिभावक के रूप में मसीहा मिल गया था। 

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वर्तमान में गरीब बच्चों के लिए कई जिलों में चलाई जा रही मिशन आरोहण पोषण योजना अक्षत गुप्ता की ही देन है। अक्षत गुप्ता बेसहारा बच्चों की शिक्षा और उनके पोषण को लेकर इतने चिंतित रहते थे कि वह स्वयं तो समय समय पर इन बच्चों से मिलते ही थे साथ ही अपनी धर्म पत्नी रिद्धिम अग्रवाल को भी इन बच्चों का हाल जानने के लिए भेजते थे। 
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इन बच्चों के लिए उनके भागीरथ प्रयासों का ही परिणाम है कि आज जनपद के सैकड़ों अनाथ और बेसहारा बच्चों का सही पालन पोषण हो रहा है और वह शिक्षा के क्षेत्र में क,ख,ग से लेकर ए,बी,सी,डी की लकीर को पार करके उसे शब्दों में जोड़ने लगे हैं।  
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एसएसपी ताकवाले के साथ की थी ट्रेनिंग
वर्तमान में यूएस नगर के एसएसपी अनंत शंकर ताकवाले के साथ ही आईपीएस अक्षत गुप्ता ने देहरादून के मसूरी में वर्ष 2006 में ट्रेनिंग ली थी। एसएसपी ताकवाले को जैसे ही यह दुखद सूचना मिली उनकी भी आंखें नम हो गईं। उन्होंने बताया कि अक्षत जी के साथ उन्होंने देहरादून के मसूरी में 2006 में ट्रेनिंग की थी। 

अक्षत गुप्ता के बारे में बताते हुए एसएसपी ताकवाले भरे मन से कहते हैं कि उनका शुरू से ही हंशमुख व्यवहार और काम के प्रति गंभीरता रहती थी। कई बार ट्रेनिंग में उन्हें अहम बिंदुओं पर गंभीरता से सोचते हुए भी देखा था। अपनी ट्रेनिंग टीम में वह बेहद स्मार्ट और काफी मिलनसार थे। 


दयाभाव और न्याय प्रिय शैली भी थी विशेष पहचान
दया भाव और न्यायप्रिय शैली आईएएस अक्षत गुप्ता की विशेष पहचान थी। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान श्रमिकों को न्याय दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। गरीब और श्रमिक वर्ग जो भी उनके पास न्याय की आस लेकर आया उसे कभी भी उन्होंने निराश नहीं किया। कलेक्ट्रेट पहुंचने वाले लोग उनके दयाभाव के कायल थे। 

जितने समय भी वह कार्यालय में रहे उन्हें किसी ने कभी गुस्से में नहीं देखा। हमेशा चेहरे पर मुस्कुराहट रखने वाले अक्षत गुप्ता का अचानक इस दुनिया से विदा हो जाना आज जिले के हर शख्स को खल रहा है। 


औद्योगिक शांति बनाने में निभाई थी अहम भूमिका
जिले में औद्योगिक शांति बनाने में भी अक्षत गुप्ता ने अहम भूमिका निभायी थी। 6.11.2015 को जिलाधिकारी के रूप में जनपद की कमान संभालने के बाद उन्होने यहां के औद्योगिक परिवेश को देखते हुए औद्योगिक शांति बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया। आये दिन होने वाली श्रमिकों की हड़ताल को उन्होने न सिर्फ गंभीरता से लिया बल्कि मुद्दों की तह तक जाकर मामलों को सावधानी से निपटाया। 

उनके कार्यकाल के दौरान कई फैक्टरियों में श्रमिकों की मांगें पूरी हुयी और हड़ताल खत्म हुई। श्री गुप्ता हमेशा प्रबंध तंत्र और श्रमिकों के बीच तालमेल के पक्ष में रहते थे। वे श्रमिकों के साथ साथ फैक्ट्री प्रबंधकों के हितों का ध्यान रखने में भी कभी पीछे नहीं रहे। समय समय पर होने वाली उद्योग बंधु की बैठकों में उद्यमियों द्वारा उठाई जाने वाली समस्याओं के निराकरण के लिए उन्होने हमेशा तत्परता दिखाई। उनके प्रयासों से उद्यमियों की कई समस्याएं भी हल हुई। औद्योगिक शांति के लिए उनके प्रयासों से फैक्ट्री प्रबंधन और श्रमिक दोनों ही संतुष्ट रहते थे।

कुशल नेतृत्व से अधीनस्थ भी थे प्रभावित
अक्षत गुप्ता का नाम आते ही जेहन में एक हंसमुख चेहरा सामने आ जाता है। अक्षत गुप्ता की कायशैली आम जनता को तो प्रभावित करती ही थी, साथ ही जिले की अफसरशाही भी उनके कुशल नेतृत्व से खासी प्रभावित थी। उन्होंने कभी भी अपने किसी अधीनस्थ को निराश और हतोत्साहित नहीं होने दिया। 

वह अधीनस्थों के साथ भी बेहतर तालमेल से काम करते थे। अधिकारी वर्ग उनकी कार्यशैली से संतुष्ट था यही वजह है कि पिछले दिनों जब उनके स्थानांतरण की खबर आयी तो हर अधिकारी हैरान था अब जब वह असमय दुनिया से विदा हुए हैं तो किसी को भी इस दुखद घटना पर यकीन नहीं हो रहा।


प्रदेश पर भी छोड़ी थी अमिट छाप
आईएएस अक्षत गुप्ता ने बतौर डीएम जनपद ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में अपनी अमिट छाप छोड़ी थी। हाल ही में प्रदेश में पैदा हुए राजनैतिक संकट के दौरान जब दो माह तक राष्ट्रपति शासन लागू रहा तो उन्होने अपनी कुशल कार्यशैली से जनपद के विकास की गति को थमने नहीं दिया। उनकी कुशल कार्यशैली के चलते ही जनपद में राष्ट्रपति शासन के दौरान विकास की रफतार जारी रही। उन्होने विकास के मामले में जनपदवासियों को यह महसूस नहीं होने दिया कि प्रदेश में राजनैतिक उठापठक चल रही है। 

..और रो पड़े टीम के साथी 
डीएम अक्षत गुप्त का मृद स्वभाव और अपनी टीम के प्रति उनका लगाव ऐसा था कि रविवर देर शाम जैसे उनकी कलेक्ट्रेट की टीम को जानकारी मिली वह फूट-फूटकर रो पड़े और सीधे नोएडा की ओर रवाना हो गए। जिस भी अधिकारी से फोन पर जानकारी लेनी चाहिए वही कहता मिला कि बहुत बुरा हो गया है, मैं रास्ते में हूं, नोएडा पहुंच रहे हैं। उनकी टीम में एडीएम दीप्ति वैश्य, एडमीएम आशीष भटगई, एसडीएम एपी बाजपेई, एसडीएम डीपी सिंह सहित तमाम जिले के पीसीएस अधिकारी बेहतर दुखी होकर नोएडा के लिए रवाना हो गए। 


बेहड़ के भी छलके आंसू
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तिलकराज बेहड़ को भी जैसे ही यह जानकारी मिली, वह भी हैरान और दुखी हो पड़े। कई कांग्रेसी जानकारी के लिए जब उनके आवास की ओर पहुंचे तो वहां मीडिया से बातचीत में बेहड़ कुछ भी नहीं कह पाए और रो पड़े। उन्होंन बस इतना ही कहा कि ऊधम सिंह नगर के इतिहास में इससे बड़ी दुखद घटना नहीं हो सकती, प्रदेश ने एक होनहार आईएएस अधिकारी खो दिया है, यह इस प्रदेश का बहुत बड़ा दुर्भाग्य है।

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