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डकैतों की पसंद थे नखासा बाजार के घोड़े

Tue, 09 Apr 2019 12:31 AM IST
yashwant yashwant अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: yashwant yashwant Updated Tue, 09 Apr 2019 12:31 AM IST
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The likes of dacoits were the horses of the Nakhasa market
काशीपुर के चैती मेले में पहुंचा पांच लाख की कीमत का घोड़ा। - फोटो : अमर उजाला
मां भगवती बाल सुंदरी के ऐतिहासिक चैती मेले में लगने वाला नखासा मेला उत्तरी भारत का प्रमुख मेला है। इस मेले में कभी चंबल के डाकू अपनी पसंद का घोड़ा खरीदकर ले जाते थे। घोड़ा व्यापारियों के अनुसार इस मेले से सुल्ताना डाकू, डाकू मान सिंह के अलावा फूलन देवी भी घोड़े खरीद कर ले जाते थे। बताया जाता है कि चैती मेला में नखासा मेला करीब चार सौ साल पहले रामपुर निवासी घोड़ों के बड़े व्यापारी हुसैन बख्श ने शुरू किया था।
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चैती मेले में लगे नखासा बाजार में पुराने घोड़ा व्यापारियों में से एक रामपुर निवासी चौधरी शौकत अली भी हैं। पांच पीढ़ियों से घोड़ों का कारोबार चौधरी शौकत अली का परिवार कर रहा हैं। अब छठी पीढ़ी में उनका बेटा सलमान ने खानदानी कारोबार को संभाल लिया है। अपने पुत्र के साथ कारोबार में हाथ बंटाने नखासा मेला में आए चौधरी शौकत अली ने बताया कि 400 साल पहले यहां भगवती बाल सुंदरी का मेला नहीं लगता था। सिर्फ मंदिर में पूजा होती थी, करीब 150 साल से मेला लगने लगा है। तब उनके दादा के पिता हुसैन बख्श ने पंडाओं से मिल कर यहां नखासा बाजार शुरू किया था।
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चौधरी शौकत अली ने बताया कि हुसैन बख्श के बाद उनके बेटे पुत्र मो. हुसैन, उनके पुत्र अली बहादुर, उनके पुत्र मेरे पिता चौधरी जफर और अब मेरा पुत्र सलमान घोड़ों के कारोबार को आगे बढ़ा रहा है। चौधरी शौकत अली ने बताया कि जब चैती मेला में नखासा मेला लगना शुरू हुआ। तब घोड़ों का कारोबार था। सबसे बड़े खरीददार सेना, पुलिस अधिकारी, राजा महाराजा और व्यापारी थे। जैसे-जैसे राजा रजवाड़ों का जमाना गया और कारों, मोटर साइकिलों का जमाना आया तो घोड़ों का यह कारोबार भी उतार पर आ गया है।
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अफगानिस्तान के व्यापारी लेकर आते थे घोड़े
काशीपुर। चौधरी शौकत अली ने बताया कि चैती नखासा मेला में अफगानिस्तान, पंजाब अविभाजित पंजाब, राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश के व्यापारी घोड़े लेकर आते और खरीद कर ले जाते थे। उसी दौरान उनके दादा अली बहादुर के समय डाकू मंगल सिंह, सुल्ताना डाकू और पिता चौधरी जाफर अली के समय डाकू फूलन देवी यहां से घोडे़ खरीद कर ले जाती थी। चौधरी ने बताया कि डाकू मेला में घोड़े खरीदने सामान्य खरीदार के वेश में आते थे और किसी को भी परेशान नहीं करते थे। चौधरी शौकत अली ने बताया कि फूलन देवी के बारे में तब पता चला जब वह मंदिर में देवी दर्शन कर घोड़े खरीद कर चली गई थी। उन्होंने बताया कि चैता मेला के नखासा मेला में इस साल मल्होत्रा (पंजाब) और पंजाब, गुजरात, बदायूं, बरेली से घोड़े बिक्री के लिए आए हैं।


नखासा मेला में पांच लाख कीमत का घोड़ा
काशीपुर। नखासा बाजार में पांच लाख रुपये कीमत का घोड़ा बिक्री के लिए लाया गया है। जिला मुरादाबाद के कुंदरकी निवासी मो. रजी ने दावा किया कि उनका घोड़ा पंजाब नस्ल का और उम्र तीन वर्ष है। इसकी ऊंचाई पांच फीट से ज्यादा है। दावा किया कि यह 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ता है। मो. रजी ने पांच लाख रुपये कीमत रखी है। मेले में अधिकतर घोड़े 50-60 हजार रुपये कीमत तक के बिकने के लिए लाए गए हैं। 

 
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