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Udham Singh Nagar News: नदी–नाले, पहाड़ पार कर अंधेरी राहों में खींच ले गई नाैकरी की चाह

Sat, 22 Nov 2025 11:36 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर Updated Sat, 22 Nov 2025 11:36 PM IST
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The desire for a job dragged me across rivers, streams and mountains into dark paths.
रुद्रपुर। थाईलैंड के वीजा पर म्यांमार भेजने और वहां साइबर ठगी का काम कराने के मामले में दो मानव तस्करों के पकड़े जाने से कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। अच्छी नाैकरी की चाह इन युवकों को जोखिम भरे नदी–नाले, पहाड़ पार कर अपराध की राहों में खींच ले गई।
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बेहतर भविष्य की तलाश में निकले कुछ युवा यह नहीं जानते थे कि उनके सपनों की उड़ान उन्हें सीधे एक अंधेरी दुनिया में उतार देगी। ऐसी जगह जहां न उम्मीद की रोशनी थी, न बेहतर कल। बस ठगी का जाल और चारों ओर बंदिशें। नौकरी के नाम पर थाईलैंड का वीजा दिलाकर इन युवाओं को बैंकाक ले जाया गया। वहां से अलग-अलग लोगों ने उन्हें अपने वाहनों में और कई बार पैदल चलवाकर म्यांमार की सीमा में धकेल दिया। रास्ते की हर मुश्किल पर डर कसक की तरह साथ बैठा था। असली भय तो तब शुरू हुआ जब युवाओं को मायावाडी के कुख्यात केके पार्क क्षेत्र में ले जाकर बंद कर दिया गया।
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वहां चीन की कंपनियों के नाम पर चल रहे अड्डों में युवाओं को बंधक बनाकर साइबर ठगी का प्रशिक्षण दिया जाने लगा। मोबाइल नंबर ट्रेस करना, ऐप और वेबसाइट के जरिये ऑनलाइन छल करना और दुनिया भर के अनजान लोगों को फंसाना। कुछ ही दिनों में उन्हें समझ आ गया कि उनके हाथ नौकरी नहीं बल्कि छलावा आया है।
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इन हालातों में वे चाहकर भी बाहर कदम नहीं रख सकते थे। हर गेट पर हथियारबंद पहरेदार और हर कोने में षड्यंत्र का साया तैनात था। डर, बेबसी और घर लौटने की तड़प ने उन्हें तोड़ दिया। आखिरकार उन्होंने किसी तरह अपने परिवारों को खबर भेजी। परिजनों ने गुहार लगाई तो भारतीय सरकार हरकत में आई। कई दिनों की कोशिशों और समन्वय के बाद जसपुर, काशीपुर, पिथौरागढ़ और बागेश्वर के इन युवाओं मो. आज़म, मो. मोईन, मो. दानिश, जुनैद, मो. अयाज, इंद्रदेव, दीपक, अनुज और आशुतोष को म्यांमार से सुरक्षित निकालकर भारत वापस लाया गया। दिल्ली में पहली सांस लेते ही उन्हें ऐसा लगा मानो माैत के मुहाने से लौटे आए हों। देहरादून साइबर पुलिस की टीम ने इन युवाओं को दिल्ली से लाकर परिवारों के हवाले किया। इस मामले में गुजरात और उत्तराखंड में प्राथमिकियां पंजीकृत हुई थीं।

भरोसा जीतकर फंसा लिया
युवाओं ने जांच एजेंसियों को बताया कि भारत के ही कुछ एजेंट जसपुर के सुनील व अशोक, पिंकी, काशीपुर के नीरव व प्रदीप, मुंबई के धनंजय और अन्य ने टेलीग्राम, व्हाट्सऐप और मोबाइल ऐप के जरिये उनसे संपर्क किया। कुछ ही बातों में भरोसा जीत लिया। पैसा लेकर टिकट और कागजात भेज दिए। फिर उन्हें मौके पर छोड़कर गायब हो गए। आगे की सारी डोर म्यांमार के गिरोहों के हाथों में थी जो इन्हें अवैध कॉल सेंटरों में फंसा कर दुनिया भर की साइबर ठगी कराते थे।


इन युवकों की कहानी अब उन सैकड़ों लोगों के लिए चेतावनी है जो लालच का शिकार बन रहे हैं। विदेश में नौकरी के झांसे से सावधान रहें। किसी एजेंट या कागजात पर भी संदेह हो तो तुरंत पुलिस मदद लें। -अरुण कुमार, साइबर थाना प्रभारी
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