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Udham Singh Nagar News: बीमार बेजुबानों के लिए देश की पहली जीवनरक्षा किट तैयार
Sun, 12 Oct 2025 10:54 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Sun, 12 Oct 2025 10:54 PM IST
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पंतनगर (ऊधमसिंह नगर)। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय पंतनगर के वैज्ञानिकों ने पशुपालकों की दशकों पुरानी चिंता का समाधान निकाल लिया है। एक ऐसी पशु फर्स्ट एड किट तैयार कर ली गई है जो बीमार या घायल जानवरों का तुरंत प्राथमिक उपचार करने में सक्षम है। इसकी खासियत यह है कि इसे डॉक्टर और पशुपालक दोनों आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं।
भारत ही नहीं बल्कि विश्व स्तर पर भी यह पहली संपूर्ण वेटरनरी फर्स्ट एड किट है। यह हर तरह के पशु रोगों के प्राथमिक उपचार में काम आ सकती है। इसके प्रमुख विकासकर्ता प्रोफेसर डॉ. जवाहर लाल सिंह ने अमर उजाला से खास बातचीत में कहा कि जानवरों के शरीर में भी मनुष्यों की तरह 14 सिस्टम होते हैं। यह किट उन सभी सिस्टम से जुड़ीं बीमारियों के इलाज के लिए तैयार की गई है। छोटी बीमारियों के लिए अब पशुपालकों को डॉक्टर का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
इस किट में विषैले पदार्थों या सांप-कीड़ों के काटने की स्थिति में इलाज के लिए आवश्यक दवाएं मौजूद हैं। जानवरों में गैस बनने से पेट फूलने जैसी सामान्य लेकिन जानलेवा स्थिति में भी यह किट मददगार है। ऐसे मामलों में अक्सर समय पर इलाज न मिलने से जानवर मर जाता है। इस किट की मदद से वैज्ञानिक तरीके से प्राथमिक उपचार किया जा सकता है। आपात समय में यह जानवरों की जान बचाने में कारगर साबित हो सकती है।
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पंतनगर विश्वविद्यालय का यह शोध देश में वेटरनरी साइंस की दिशा बदलने वाला मील का पत्थर माना जा रहा है। प्रोफेसर सिंह ने नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय जबलपुर में 8-10 अक्तूबर तक आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में इस किट को विशेषज्ञों के सामने पहली बार पेश किया। देश भर के 400 से अधिक पशु वैज्ञानिकों की माैजूदगी में इसे सराहा गया।
72 उपकरणों और दवाओं से लैस मिनी क्लिनिक
लगभग 3000 रुपये की लागत वाली यह किट पोर्टेबल, किफायती और आसान उपयोग वाली है। महंगे पशुओं के मालिकों के लिए यह कम लागत में बड़ी सुरक्षा देती है। इस फर्स्ट एड किट को एक मिनी वेटरनरी क्लिनिक कहा जा सकता है। इसमें 72 आइटम शामिल हैं। दवाओं के साथ-साथ ऐसे उपकरण भी हैं जिनसे बीमारी की पहचान और प्रारंभिक उपचार दोनों किए जा सकते हैं।
डॉक्टरों के लिए भी मददगार
देश के मशहूर पशु वैज्ञानिक और नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के पूर्व निदेशक डॉ. आरके बघरवाल का कहना है कि अभी तक हमारे देश के पशु चिकित्सकों के पास ऐसी कोई फर्स्ट एड किट नहीं थी जो फील्ड में तुरंत रोग की पहचान और इलाज दोनों की सुविधा दे सके। यह किट पशुपालकों के साथ-साथ डॉक्टरों के लिए भी बेहद उपयोगी साबित होगी। यह नवाचार न सिर्फ पशुपालकों की आर्थिक हानि कम करेगा बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में पशु स्वास्थ्य सुरक्षा को भी मजबूत करेगा।
कोट
भारत में खेती के बाद सबसे बड़ा रोजगार पशुपालन से मिलता है मगर जब कोई जानवर बीमार पड़ता है तो वह अपनी तकलीफ कह नहीं पाता। यही वजह है कि सही समय पर इलाज न मिलने से कई बार बेजुबानों की मौत हो जाती है। इस किट का मकसद ऐसी स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाना है। -प्रोफेसर डॉ. जवाहर लाल सिंह, गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर
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भारत ही नहीं बल्कि विश्व स्तर पर भी यह पहली संपूर्ण वेटरनरी फर्स्ट एड किट है। यह हर तरह के पशु रोगों के प्राथमिक उपचार में काम आ सकती है। इसके प्रमुख विकासकर्ता प्रोफेसर डॉ. जवाहर लाल सिंह ने अमर उजाला से खास बातचीत में कहा कि जानवरों के शरीर में भी मनुष्यों की तरह 14 सिस्टम होते हैं। यह किट उन सभी सिस्टम से जुड़ीं बीमारियों के इलाज के लिए तैयार की गई है। छोटी बीमारियों के लिए अब पशुपालकों को डॉक्टर का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
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इस किट में विषैले पदार्थों या सांप-कीड़ों के काटने की स्थिति में इलाज के लिए आवश्यक दवाएं मौजूद हैं। जानवरों में गैस बनने से पेट फूलने जैसी सामान्य लेकिन जानलेवा स्थिति में भी यह किट मददगार है। ऐसे मामलों में अक्सर समय पर इलाज न मिलने से जानवर मर जाता है। इस किट की मदद से वैज्ञानिक तरीके से प्राथमिक उपचार किया जा सकता है। आपात समय में यह जानवरों की जान बचाने में कारगर साबित हो सकती है।
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पंतनगर विश्वविद्यालय का यह शोध देश में वेटरनरी साइंस की दिशा बदलने वाला मील का पत्थर माना जा रहा है। प्रोफेसर सिंह ने नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय जबलपुर में 8-10 अक्तूबर तक आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में इस किट को विशेषज्ञों के सामने पहली बार पेश किया। देश भर के 400 से अधिक पशु वैज्ञानिकों की माैजूदगी में इसे सराहा गया।
72 उपकरणों और दवाओं से लैस मिनी क्लिनिक
लगभग 3000 रुपये की लागत वाली यह किट पोर्टेबल, किफायती और आसान उपयोग वाली है। महंगे पशुओं के मालिकों के लिए यह कम लागत में बड़ी सुरक्षा देती है। इस फर्स्ट एड किट को एक मिनी वेटरनरी क्लिनिक कहा जा सकता है। इसमें 72 आइटम शामिल हैं। दवाओं के साथ-साथ ऐसे उपकरण भी हैं जिनसे बीमारी की पहचान और प्रारंभिक उपचार दोनों किए जा सकते हैं।
डॉक्टरों के लिए भी मददगार
देश के मशहूर पशु वैज्ञानिक और नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के पूर्व निदेशक डॉ. आरके बघरवाल का कहना है कि अभी तक हमारे देश के पशु चिकित्सकों के पास ऐसी कोई फर्स्ट एड किट नहीं थी जो फील्ड में तुरंत रोग की पहचान और इलाज दोनों की सुविधा दे सके। यह किट पशुपालकों के साथ-साथ डॉक्टरों के लिए भी बेहद उपयोगी साबित होगी। यह नवाचार न सिर्फ पशुपालकों की आर्थिक हानि कम करेगा बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में पशु स्वास्थ्य सुरक्षा को भी मजबूत करेगा।
कोट
भारत में खेती के बाद सबसे बड़ा रोजगार पशुपालन से मिलता है मगर जब कोई जानवर बीमार पड़ता है तो वह अपनी तकलीफ कह नहीं पाता। यही वजह है कि सही समय पर इलाज न मिलने से कई बार बेजुबानों की मौत हो जाती है। इस किट का मकसद ऐसी स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाना है। -प्रोफेसर डॉ. जवाहर लाल सिंह, गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर