प्रशासनिक चूक से बिगड़ी कल्याणी की सेहत

ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर Updated Sun, 15 May 2016 10:35 PM IST
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कल्याण्ाी नदी
कल्‍याण्‍ाी नदी - फोटो : अमर उजाला

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तराई की लाइफ लाइन कल्याणी की बिगड़ी सेहत के लिए प्रशासनिक चूक भी काफी हद तक जिम्मेदार है। रही सही कसर वोट बैंक की राजनीति ने पूरी कर दी। जहां नदी के बहाव का रास्ता हुआ करता था वहीं उसके रास्ते में दीवार खड़ी कर उसे अव्यवस्थित कर दिया गया। नदी के दोनों किनारों को कब्जा कर वहां मकान खड़े कर दिए गए। 
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कल्याणी नदी के किनारों पर कब्जा जमाने की होड़ की शुरूआत अटरिया मंदिर से ही शुरू हो जाती है। भूमाफिया ने नदी किनारे की जमीन पर कब्जा जमाना शुरू कर दिया जिसका नतीजा यह हुआ कि नदी अपने मूल स्थान से ही खिसक गई। पहले नदी अटरिया मंदिर से महज डेढ़ सौ मीटर की दूरी पर बहा करती थी। 
मंदिर में आने वाले श्रद्धालु यही डुबकी लगाकर मां के मंदिर में मत्था टेकने के लिए जाया करते थे, लेकिन धीरे-धीरे भू माफियाओं ने नदी किनारे कब्जा डाले। मकान बने तो लोगों ने घरों का कूड़ा भी नदी में डालना शुरू कर दिया। बस यहीं से कल्याणी की सेहत बिगड़ने लगी। कल्याणी की बिगड़ती सेहत को दुरुस्त करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर पहले ही कवायद शुरू कर दी गई होती तो शायद कल्याणी आज भी सदानीरा ही रहती है। 
जानकारों के मुताबिक लगभग दो दशक पहले तक नदी में पानी का बहाव भी काफी तेज हुआ करता था। तब नदी की चौड़ाई तकरीबन ढाई सौ मीटर के आसपास हुआ करती थी। लेकिन धीरे-धीरे अवैध कब्जों ने नदी के स्वरूप को बुरी तरह से बिगाड़ डाला। 

नहाने के लिए आते थे शहर के लोग
दो दशक पहले शहर के लोग गर्मी के मौसम में नदी में नहाने के लिए आया करते थे। तब न ज्यादा आबादी थी और न आज की तरह बेतहाशा प्रदूषण। गर्मी के मौसम में नदी का स्वच्छ और निर्मल जल लोगों के लिए अमृत समान हुआ करता था। ऐसा कोई दिन नहीं होता था जब नदी किनारे लोगों का हुजूम न उमड़ता हो। लेकिन जब से तराई में इंसानी बसासत विकराल रूप धरती गई तभी से कल्याणी भी बीमार पड़ने लगी।

पीने के लिए प्रयोग में लाया जाता था पानी
किसी जमाने में कल्याणी नदी को एक पावन नदी का दर्जा दिया था। मां अटरिया देवी मंदिर के किनारे से बहने के कारण इसके प्रति लोगों में आस्था भी देखने को मिलती थी। बिना कल्याणी में डुबकी लगाए बिना श्रद्धालु मंदिर के दर्शन तक नहीं करता था। इतना ही नहीं नदी के पानी का उपयोग पीने के लिए भी किया जाता था, लेकिन इंसानी कारस्तानी ने आज कल्याणी को जहरीला बना दिया है।

जगतपुरा के लोगों ने किया कल्याणी को बीमार
जगतपुरा के लोग कल्याणी की सेहत बिगाड़ने के लिए सबसे ज्यादा दोषी हैं। यहीं के वाशिंदों ने कल्याणी से ऐसा खिलवाड़ किया कि नदी हमेशा के बीमार पड़ गई। घरों का कूड़ा आए दिन नदी में डाला जाने लगा। इतना ही नहीं सीवेज पाइप भी सीधे नदी में डाल दिए गए। जगतपुरा में प्रवेश करने के बाद नदी में इस कदर कूड़ा समाया हुआ है कि कहीं-कहीं तो नदी का पानी ही अंडरग्राउंड बह रहा है। यहां के लोगों ने कल्याणी के महत्व को समझा होता तो शायद कल्याणी की ऐसी दुर्दशा नहीं होती।

कल्याणी नदी के किनारे जहां भी अवैध रूप से कब्जा हो रहा है उसके लिए एसडीएम को मौका मुआयना करने को कहा गया है। जहां भी अवैध रूप से लोग नदी के किनारों पर कब्जा जमाए हुए हैं उन्हें वहां से हटाया जाएगा। नदी के आसपास जो भी अवैैध रूप से निर्माण हो रहे हैं उसे ध्वस्त करने की कार्रवाई भी जल्द की जाएगी। नदी के स्वरूप को बचाने का प्रयास होगा। 
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