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सुरई रेंज में घूम रहा हमलावर बाघ पकड़ा गया
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खटीमा। शारदा सागर किनारे आबादी क्षेत्र में आतंक का पर्याय बना खूंखार बाघ एक महीने बाद पकड़ा गया। सोमवार को वाइल्ड लाइफ चीफ से बाघ को ट्रेंकुलाइज कर पकड़ने की अनुमति मिलने के बाद वन विभाग के डॉक्टरों और एक्सपर्ट की टीमों के साथ प्रशिक्षु आईएफएस ने रेस्क्यू अभियान चलाया। झाऊपरसा गांव की सड़क पर बाघ दिखाई दिया तो टीम ने उसे ट्रेंकुलाइज कर पिंजरे में कैद कर दिया। बाघ को देखने के लिए हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी।
बीते एक महीने से सुरई रेंज के शारदा सागर बैराज किनारे बसे बगुलिया, झाऊपरसा, सिसैया, बंधा, बलुुआ खैरानी समेत कई गांवों में बाघ ने दहशत थी। बाघ बीती 13 मई को झाऊपरसा के रोहित और 25 मई को उमाशंकर को अपना शिकार बना चुका था और कई जानवरों को भी अपना निवाला बनाया था। ग्रामीण वन विभाग के साथ ही शासन-प्रशासन से खूंखार बाघ को पकड़ने की मांग को लेकर प्रदर्शन भी कर चुके हैं।
ग्रामीणों की मांग पर सोमवार को वाइल्ड लाइफ के चीफ ने भी बाघ को ट्रेंकुलाइज कर पकड़ने की अनुमति दी थी। इसके बाद वन विभाग ने बाघ को पकड़ने के लिए मंगलवार सुबह रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। शाम करीब चार बजे झाऊपरसा में सड़क पर गश्त कर रही टीम को बाघ दिखाई दिया। इस पर वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. आयुष उनियाल, डॉ. हिमांशु पांगती ने बाघ को ट्रेंकुलाइज कर दिया और फिर बाघ वहां से भाग गया।
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इस पर टीम बख्तरबंद वाहन लेकर जंगल में उसे तलाशने लगी। कुछ देर बाद बाघ अचेतावस्था में बेहोश मिला। टीम ने बाघ को पिंजरे में कैद कर रेंज कार्यालय ले आई। रेंजर सुधीर कुमार ने बताया कि बाघ की आयु करीब आठ साल है और पिंजरे में सुरक्षित है। उसे रेस्क्यू सेंटर भेजा गया है। टीम में डिप्टी रेंजर सतीश रेखाड़ी, सुखदेव मुनि, वन दरोगा अजमत खान, बाबूराम यादव, आरडी वर्मा, अमर सिंह बिष्ट, सुंदर लाल वर्मा, मुकेश कुमार, त्रिलोक राम आदि थे।
बाघ की निगरानी के लिए लगाए थे कैमरा ट्रैप और ड्रोन
पिछले एक महीने से रेंजर सुधीर कुमार अपनी टीम के साथ जंगल में बाघ की तलाश में जुटे थे। यहां तक कि बाघ के पंजे दिखाई देने पर वन विभाग ने जगह-जगह कैमरा ट्रैप लगाए और ड्रोन की मदद से भी जंगल की खाक छानी। मंगलवार को भी ड्रोन से नजर रखी गई जब बाघ को ट्रेंकुलाइज किया गया तो उसके पीछे-पीछे ड्रोन भी उड़ाया गया।
न सो पा रहे थे ग्रामीण और न दिन में होती थी आवाजाही
बाघ के दो लोगों की जान लेने के बाद से ग्रामीण न रात को सो पा रहे थे और न ही दिन में घरों से निकल रहे थे। कई परिवार तो गांवों से पलायन कर अपने रिश्तेदारों के घर रहने लगे थे। आज जब वन टीम ने बाघ को पकड़ा तो ग्रामीणों के चेहरों पर मुस्कान खिली।
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बीते एक महीने से सुरई रेंज के शारदा सागर बैराज किनारे बसे बगुलिया, झाऊपरसा, सिसैया, बंधा, बलुुआ खैरानी समेत कई गांवों में बाघ ने दहशत थी। बाघ बीती 13 मई को झाऊपरसा के रोहित और 25 मई को उमाशंकर को अपना शिकार बना चुका था और कई जानवरों को भी अपना निवाला बनाया था। ग्रामीण वन विभाग के साथ ही शासन-प्रशासन से खूंखार बाघ को पकड़ने की मांग को लेकर प्रदर्शन भी कर चुके हैं।
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ग्रामीणों की मांग पर सोमवार को वाइल्ड लाइफ के चीफ ने भी बाघ को ट्रेंकुलाइज कर पकड़ने की अनुमति दी थी। इसके बाद वन विभाग ने बाघ को पकड़ने के लिए मंगलवार सुबह रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। शाम करीब चार बजे झाऊपरसा में सड़क पर गश्त कर रही टीम को बाघ दिखाई दिया। इस पर वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. आयुष उनियाल, डॉ. हिमांशु पांगती ने बाघ को ट्रेंकुलाइज कर दिया और फिर बाघ वहां से भाग गया।
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इस पर टीम बख्तरबंद वाहन लेकर जंगल में उसे तलाशने लगी। कुछ देर बाद बाघ अचेतावस्था में बेहोश मिला। टीम ने बाघ को पिंजरे में कैद कर रेंज कार्यालय ले आई। रेंजर सुधीर कुमार ने बताया कि बाघ की आयु करीब आठ साल है और पिंजरे में सुरक्षित है। उसे रेस्क्यू सेंटर भेजा गया है। टीम में डिप्टी रेंजर सतीश रेखाड़ी, सुखदेव मुनि, वन दरोगा अजमत खान, बाबूराम यादव, आरडी वर्मा, अमर सिंह बिष्ट, सुंदर लाल वर्मा, मुकेश कुमार, त्रिलोक राम आदि थे।
बाघ की निगरानी के लिए लगाए थे कैमरा ट्रैप और ड्रोन
पिछले एक महीने से रेंजर सुधीर कुमार अपनी टीम के साथ जंगल में बाघ की तलाश में जुटे थे। यहां तक कि बाघ के पंजे दिखाई देने पर वन विभाग ने जगह-जगह कैमरा ट्रैप लगाए और ड्रोन की मदद से भी जंगल की खाक छानी। मंगलवार को भी ड्रोन से नजर रखी गई जब बाघ को ट्रेंकुलाइज किया गया तो उसके पीछे-पीछे ड्रोन भी उड़ाया गया।
न सो पा रहे थे ग्रामीण और न दिन में होती थी आवाजाही
बाघ के दो लोगों की जान लेने के बाद से ग्रामीण न रात को सो पा रहे थे और न ही दिन में घरों से निकल रहे थे। कई परिवार तो गांवों से पलायन कर अपने रिश्तेदारों के घर रहने लगे थे। आज जब वन टीम ने बाघ को पकड़ा तो ग्रामीणों के चेहरों पर मुस्कान खिली।