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वेतन नहीं मिलने पर टीडीसी कर्मियों ने की तालाबंदी
अमर उजाला ब्यूरो पंतनगर
Updated Sat, 15 Oct 2016 12:40 AM IST
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टीडीसी मुख्यालय पर तालाबंदी करने के बाद धरना देते कर्मचारी एवं उनके परिजन।
- फोटो : अमर उजाला
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पिछले पांच महीने से वेतन न मिलने से क्षुब्ध उत्तराखंड बीज निगम (टीडीसी) के कर्मचारियों ने शुक्रवार को हल्दी स्थित मुख्यालय पर तालाबंदी कर दी। तालाबंदी के बाद कर्मचारी गेट पर धरने पर बैठ गए। कर्मचारियों के साथ उनके परिजन भी धरने में शामिल हुए। तालाबंदी के चलते अधिकारी भी कार्यालयों में नहीं पहुंच सके। पूरे दिन तालाबंदी के बाद उन्होंने अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान किया है।
गौरतलब है कि घाटे में चल रहा बीज निगम पिछले पांच महीने से अपने कर्मचारियों, अधिकारियों एवं श्रमिकों को वेतन का भुगतान नहीं कर सका है। वेतन न होने की वजह से टीडीसी प्रबंधन ने पिछले एक सप्ताह से स्कूली बस भी बंद कर दी है।
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कर्मचारी नेता ज्वाला प्रसाद मिश्रा ने बताया कि वेतन न मिलने के कारण टीडीसी कर्मियों का दशहरा पर्व सूना रहा। कर्मचारियों पर बच्चों की फीस, खाद्यान्न, दूध, पानी, बिजली का कर्ज बढ़ता जा रहा है। धरना प्रदर्शन करने वालों में अध्यक्ष विनोद कुमार सिंह, महामंत्री ज्वाला प्रसाद मिश्रा, बैरिस्टर राय, राम किशोर यादव, गंगा देवी, इंद्रावती, सुगंधी, जीसी तिवारी, आरएस तिवारी, विनोद पांडेय, अतुल पांडेय आदि थे।
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टीडीसी के गोदामों में लगभग दो लाख क्विंटल गेहूं का प्रमाणित बीज बिक्री के लिए उपलब्ध है। इसे बिहार और यूपी में बेचा जाता है। प्रबंध व्यवस्था दुरुस्त नहीं होने की वजह से बीज की बिक्री नहीं हो रही है। यदि एक माह के भीतर यह बीज नहीं बेचा गया तो बुवाई का समय निकल जाएगा और टीडीसी को लगभग सौ करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है। दिलचस्प बात यह है कि टीडीसी के प्रबंध निदेशक देहरादून में बैठते हैं। उनके पास हल्दी मुख्यालय पर बैठने का समय नहीं है। निगम के अधिकारी एमडी के बगैर कोई भी फैसला लेने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में नीतिगत फैसले न होने से कारपोरेशन की स्थिति दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। इस संबंध में टीडीसी अधिकारियों से वार्ता करने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
गौरतलब है कि घाटे में चल रहा बीज निगम पिछले पांच महीने से अपने कर्मचारियों, अधिकारियों एवं श्रमिकों को वेतन का भुगतान नहीं कर सका है। वेतन न होने की वजह से टीडीसी प्रबंधन ने पिछले एक सप्ताह से स्कूली बस भी बंद कर दी है।
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कर्मचारी नेता ज्वाला प्रसाद मिश्रा ने बताया कि वेतन न मिलने के कारण टीडीसी कर्मियों का दशहरा पर्व सूना रहा। कर्मचारियों पर बच्चों की फीस, खाद्यान्न, दूध, पानी, बिजली का कर्ज बढ़ता जा रहा है। धरना प्रदर्शन करने वालों में अध्यक्ष विनोद कुमार सिंह, महामंत्री ज्वाला प्रसाद मिश्रा, बैरिस्टर राय, राम किशोर यादव, गंगा देवी, इंद्रावती, सुगंधी, जीसी तिवारी, आरएस तिवारी, विनोद पांडेय, अतुल पांडेय आदि थे।
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टीडीसी के गोदामों में लगभग दो लाख क्विंटल गेहूं का प्रमाणित बीज बिक्री के लिए उपलब्ध है। इसे बिहार और यूपी में बेचा जाता है। प्रबंध व्यवस्था दुरुस्त नहीं होने की वजह से बीज की बिक्री नहीं हो रही है। यदि एक माह के भीतर यह बीज नहीं बेचा गया तो बुवाई का समय निकल जाएगा और टीडीसी को लगभग सौ करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है। दिलचस्प बात यह है कि टीडीसी के प्रबंध निदेशक देहरादून में बैठते हैं। उनके पास हल्दी मुख्यालय पर बैठने का समय नहीं है। निगम के अधिकारी एमडी के बगैर कोई भी फैसला लेने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में नीतिगत फैसले न होने से कारपोरेशन की स्थिति दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। इस संबंध में टीडीसी अधिकारियों से वार्ता करने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।