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टीडीसी कर्मियों को पंत विवि व अन्य संस्थानों में समायोजित करने का प्रस्ताव
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पंतनगर टीडीसी मुख्यालय का फाइल फोटो। संवाद
- फोटो : RUDRAPUR
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पंतनगर। यदि सबकुछ ठीक रहा तो घाटे की मार झेल रहे उत्तराखंड बीज एवं तराई विकास निगम लिमिटेड (टीडीसी) के कर्मचारी पंतनगर विवि व अन्य संबंधित विभागों में समायोजित किए जाएंगे अथवा कम से कम पांच वर्ष के लिए प्रतिनियुक्ति पर भेजे जा सकते हैं। इस आशय का पत्र कृषि मंत्री गणेश जोशी ने शासन के सचिव कृषि एवं कृषक कल्याण को भेजा है।
कृषि मंत्री जोशी ने बीते 10 जून को कृषि सचिव को भेजे पत्र में तीन जून के टीडीसी में कार्यरत कार्मिकों के संलग्न विस्तृत प्रस्ताव का हवाला दिया है। इसके माध्यम से टीडीसी की पृष्ठभूमि, उसकी वर्तमान समस्या व घाटे में चल रहे निगम के कार्मिकों में से उपयोगितानुसार पंतनगर विवि व अन्य संबंधित विभागों में समायोजित करते हुए टीडीसी का आकार छोटा कर उसे लाभ की ओर ले जाने संबंधी दो सुझाव दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि कृषि विभाग का दायित्व संभालने के बाद उन्होंने दो बार टीडीसी की विस्तृत समीक्षा बैठक ली है। इन दोनों ही बैठकों की चिंता व प्राथमिकता टीडीसी को नुकसान से उबारने की रही। राज्य हित में यह अच्छा होगा कि उत्तराखंड सरकार के नियंत्रण में राज्य के एकमात्र बीज निगम (टीडीसी) की आर्थिक स्थिति सुधार कर उसे उसकी पुरानी ख्याति दिलाई जाए।
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यह भी आवश्यक है कि उत्तराखंड के तराई के किसानों के साथ ही पर्वतीय क्षेत्र के किसानों के लिए पारंपरिक फसलों जैसे मडुआ, मादिरा (झिंगोरा), रामदाना व अन्य मिलट उत्पादों के उन्नत बीज भी उपलब्ध करवाए जाएं ताकि पर्वतीय कृषि के प्रति स्थानीय नागरिकों को प्रोत्साहित कर किसानों की आय में बढ़ोतरी की जा सके।
एक चौथाई हो टीडीसी का आकार
पंतनगर। कृषि मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के अपने किसानों की बीज आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए निगम के आकार को वर्तमान आकार का चौथाई कर अधिक बेहतर ढंग से संचालित किया जा सकता है। अवशेष कार्मिकों, जिनमें अधिकतर श्रमिक श्रेणी के हैं, उन्हें अन्य विभागों जैसे पंतनगर विवि, कृषि विभाग, उद्यान विभाग व मंडी परिषद आदि में समायोजित करने या कम से कम पांच वर्ष के लिए प्रतिनियुक्ति पर समाहित करने का प्रस्ताव रखा गया है। संवाद
उत्तराखंड पर्वतीय एवं तराई बीज विकास निगम हो टीडीसी का नाम
पंतनगर। कृषि मंत्री जोशी ने सुझाव पत्र में दूसरे विकल्प के तौर पर दिए गए प्रस्ताव के अनुसार टीडीसी का नया नाम ‘उत्तराखंड पर्वतीय एवं तराई बीज विकास निगम लिमिटेड’ किए जाने का प्रस्ताव दिया है। साथ ही यह भी बताया कि संलग्न प्रस्ताव का अध्ययन कर निगम के नाम व काम दोनों को राज्य की मूल भावना के अनुरूप किए जाने के लिए निर्णायक पत्रावली प्रस्तुत करें। संवाद
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कृषि मंत्री जोशी ने बीते 10 जून को कृषि सचिव को भेजे पत्र में तीन जून के टीडीसी में कार्यरत कार्मिकों के संलग्न विस्तृत प्रस्ताव का हवाला दिया है। इसके माध्यम से टीडीसी की पृष्ठभूमि, उसकी वर्तमान समस्या व घाटे में चल रहे निगम के कार्मिकों में से उपयोगितानुसार पंतनगर विवि व अन्य संबंधित विभागों में समायोजित करते हुए टीडीसी का आकार छोटा कर उसे लाभ की ओर ले जाने संबंधी दो सुझाव दिए गए हैं।
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उन्होंने बताया कि कृषि विभाग का दायित्व संभालने के बाद उन्होंने दो बार टीडीसी की विस्तृत समीक्षा बैठक ली है। इन दोनों ही बैठकों की चिंता व प्राथमिकता टीडीसी को नुकसान से उबारने की रही। राज्य हित में यह अच्छा होगा कि उत्तराखंड सरकार के नियंत्रण में राज्य के एकमात्र बीज निगम (टीडीसी) की आर्थिक स्थिति सुधार कर उसे उसकी पुरानी ख्याति दिलाई जाए।
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यह भी आवश्यक है कि उत्तराखंड के तराई के किसानों के साथ ही पर्वतीय क्षेत्र के किसानों के लिए पारंपरिक फसलों जैसे मडुआ, मादिरा (झिंगोरा), रामदाना व अन्य मिलट उत्पादों के उन्नत बीज भी उपलब्ध करवाए जाएं ताकि पर्वतीय कृषि के प्रति स्थानीय नागरिकों को प्रोत्साहित कर किसानों की आय में बढ़ोतरी की जा सके।
एक चौथाई हो टीडीसी का आकार
पंतनगर। कृषि मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के अपने किसानों की बीज आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए निगम के आकार को वर्तमान आकार का चौथाई कर अधिक बेहतर ढंग से संचालित किया जा सकता है। अवशेष कार्मिकों, जिनमें अधिकतर श्रमिक श्रेणी के हैं, उन्हें अन्य विभागों जैसे पंतनगर विवि, कृषि विभाग, उद्यान विभाग व मंडी परिषद आदि में समायोजित करने या कम से कम पांच वर्ष के लिए प्रतिनियुक्ति पर समाहित करने का प्रस्ताव रखा गया है। संवाद
उत्तराखंड पर्वतीय एवं तराई बीज विकास निगम हो टीडीसी का नाम
पंतनगर। कृषि मंत्री जोशी ने सुझाव पत्र में दूसरे विकल्प के तौर पर दिए गए प्रस्ताव के अनुसार टीडीसी का नया नाम ‘उत्तराखंड पर्वतीय एवं तराई बीज विकास निगम लिमिटेड’ किए जाने का प्रस्ताव दिया है। साथ ही यह भी बताया कि संलग्न प्रस्ताव का अध्ययन कर निगम के नाम व काम दोनों को राज्य की मूल भावना के अनुरूप किए जाने के लिए निर्णायक पत्रावली प्रस्तुत करें। संवाद