{"_id":"60e73b528ebc3ee2201d970e","slug":"tb-patients-test-in-district-hospital-rudrapur-news-hld430506938","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिला अस्पताल में टीबी मरीजों की जांच, संक्रमण फैलने का डर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिला अस्पताल में टीबी मरीजों की जांच, संक्रमण फैलने का डर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिला क्षय नियंत्रण केंद्र में तीन माह से डॉक्टर का पद रिक्त है। इस कारण टीबी रोगियों को स्वास्थ्य जांच के लिए जिला अस्पताल जाना पड़ रहा है। इससे टीबी रोग के संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है।
डीएम रंजना राजगुरू ने बुधवार को जिला टीबी फोरम की बैठक में अधिकारियों को टीबी की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान में ग्राम प्रधानों, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का सहयोग लेने के निर्देश दिए थे। लेकिन जिला क्षय नियंत्रण केंद्र में डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। पुराना जिला अस्पताल परिसर स्थित जिला क्षय रोग केंद्र में सेवा विस्तार पर कार्य कर रहे डॉक्टर की उम्र 65 वर्ष होने पर अगस्त 2019 को उनके स्थान संविदा पर महिला डॉक्टर की तैनात हुई थी। मार्च 2021 को डॉक्टर को नियमित नियुक्ति मिलने पर उनका स्थानांतरण हो गया। इसके बाद से जिला क्षय नियंत्रण केंद्र में टीबी मरीजों की स्वास्थ्य जांच नहीं हो पा रही है।
इधर, जिला क्षय नियंत्रण केंद्र में प्रतिदिन जांच के लिए पहुंचने वाले 20 से 30 टीबी मरीज अब जिला अस्पताल की ओपीडी में पहुंच रहे हैं। यहां फिजिशियन उनकी स्वास्थ्य जांच तो कर रहे हैं लेकिन ओपीडी में अन्य मरीजों की भीड़ होने के कारण इससे टीबी का संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ रहा है। इस संबंध में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. हरेंद्र मलिक कहते हैं कि जिला क्षय नियंत्रण केंद्र में रिक्त पर संविदा पर फिजिशियन अथवा चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती की तैयारी की जा रही है। शीघ्र ही नियुक्ति होने की संभावना है।
विज्ञापन
जिले में मिले पिछले साढ़े तीन सालों में टीबी के रोगी
वर्ष टीबी रोगी रिकवरी रेट
2018 3,166 85 प्रतिशत
2019 4,271 87 प्रतिशत
2020 3,413 88 प्रतिशत
2021 (जून तक) 1,844-- 91 प्रतिशत
विज्ञापन
डीएम रंजना राजगुरू ने बुधवार को जिला टीबी फोरम की बैठक में अधिकारियों को टीबी की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान में ग्राम प्रधानों, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का सहयोग लेने के निर्देश दिए थे। लेकिन जिला क्षय नियंत्रण केंद्र में डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। पुराना जिला अस्पताल परिसर स्थित जिला क्षय रोग केंद्र में सेवा विस्तार पर कार्य कर रहे डॉक्टर की उम्र 65 वर्ष होने पर अगस्त 2019 को उनके स्थान संविदा पर महिला डॉक्टर की तैनात हुई थी। मार्च 2021 को डॉक्टर को नियमित नियुक्ति मिलने पर उनका स्थानांतरण हो गया। इसके बाद से जिला क्षय नियंत्रण केंद्र में टीबी मरीजों की स्वास्थ्य जांच नहीं हो पा रही है।
विज्ञापन
इधर, जिला क्षय नियंत्रण केंद्र में प्रतिदिन जांच के लिए पहुंचने वाले 20 से 30 टीबी मरीज अब जिला अस्पताल की ओपीडी में पहुंच रहे हैं। यहां फिजिशियन उनकी स्वास्थ्य जांच तो कर रहे हैं लेकिन ओपीडी में अन्य मरीजों की भीड़ होने के कारण इससे टीबी का संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ रहा है। इस संबंध में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. हरेंद्र मलिक कहते हैं कि जिला क्षय नियंत्रण केंद्र में रिक्त पर संविदा पर फिजिशियन अथवा चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती की तैयारी की जा रही है। शीघ्र ही नियुक्ति होने की संभावना है।
विज्ञापन
जिले में मिले पिछले साढ़े तीन सालों में टीबी के रोगी
वर्ष टीबी रोगी रिकवरी रेट
2018 3,166 85 प्रतिशत
2019 4,271 87 प्रतिशत
2020 3,413 88 प्रतिशत
2021 (जून तक) 1,844-- 91 प्रतिशत