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कोरोना के बाद बच्चों के व्यवहार में आया बदलाव
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लीला फर्त्याल।
- फोटो : KASHIPUR
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काशीपुर। कोरोना महामारी के दौरान कई महीने तक बच्चे स्कूल से दूर रहे। लंबे समय बाद स्कूल पहुंचने पर बच्चों के व्यवहार में खासा परिवर्तन दिखाई दे रहा है।
वैश्विक महामारी के दौरान ऑनलाइन कक्षाएं चलने के कारण अधिकतर बच्चे मोबाइल के आदी हो गए हैं। अब घर में मोबाइल नहीं मिलने और स्कूल में ऑफलाइन पढ़ाई शुरू होने से कई बच्चों में चिड़चिड़ापन हो गया है। छोटे बच्चों का पढ़ाई में कम और खेलकूद में ज्यादा मन लगता है।
शिक्षाविदों का मत है कि दो साल तक बच्चे ज्यादातर समय घर में रहे। उनका नाता स्कूलों से टूटा रहा। अब वह कक्षाओं में पहुंचे हैं तो उनका मन नहीं लग रहा है। छोटे बच्चे स्कूल तो आ रहे हैं लेकिन कई घंटे बैठकर पढ़ाई करना नहीं चाहते हैं। वहीं बड़ी कक्षाओं के बच्चे तो स्कूल खुलने के बाद पठन-पाठन को लेकर गंभीर हो गए हैं और पुराने माहौल में घुलने-मिलने लगे हैं। छोटी कक्षाओं के बच्चे अभी पढ़ाई के लिए इतने गंभीर नहीं हुए हैं।
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ऑनलाइन पढ़ाई के चलते बच्चों में अब ऑफलाइन के प्रति उदासीनता आ गई है। ऑफलाइन के प्रति जागरूकता का अभाव दिखाई दे रहा है। इस नए सत्र में छात्रों के साथ आत्मसात होकर उनकी कमियों को दूर करते हुए पठन-पाठन को और अधिक प्रभावशाली बनाया जाएगा।
लीला फर्त्याल, शिक्षिका
पाठ्यक्रम को लचीला व रोचक बनाकर अपनी शिक्षण विधियों में नवाचार को दृष्टिगत रखते हुए पठन-पाठन पर जोर दिया जा रहा है। छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षकों, छात्रों व अभिभावकों का सहयोग बेहद जरूरी है ताकि उनके शैक्षिक, मनोवैज्ञानिक गुणों में सुधार हो सके।
मनोज विश्नोई, सहायक अध्यापक
कोरोना काल के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई होती थी। मैं इस वर्ष इंटरमीडिएट की परीक्षा दे रही हूं, मन में थोड़ा डर तो लग रहा है। स्कूल में शिक्षकों ने काफी मनोबल बढ़ाया है कि प्रश्नपत्र में जितना आता है उसे पहले करना। उसके बाद कठिन प्रश्नों को हल करने का प्रयास करना। मेरा पूरा प्रयास है कि अच्छे अंक लेकर आऊं।
विशाखा, कक्षा 12वीं
कोरोना काल के दौरान पढ़ाई पर बुरा असर पड़ा है। अब स्कूल खुलने पर मैंने पूरी लगन और मेहनत के साथ पढ़ाई शुरू कर दी है। शुरुआत में कोरोना संक्रमण को लेकर थोड़ा डर लगा लेकिन अब जैसे-जैसे स्थिति सामान्य हो रही है उतना डर नहीं लगता है। मैंने संक्रमण से बचाव के लिए वैक्सीन भी लगवा ली है।
अर्पित कुमार, कक्षा 11वीं
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वैश्विक महामारी के दौरान ऑनलाइन कक्षाएं चलने के कारण अधिकतर बच्चे मोबाइल के आदी हो गए हैं। अब घर में मोबाइल नहीं मिलने और स्कूल में ऑफलाइन पढ़ाई शुरू होने से कई बच्चों में चिड़चिड़ापन हो गया है। छोटे बच्चों का पढ़ाई में कम और खेलकूद में ज्यादा मन लगता है।
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शिक्षाविदों का मत है कि दो साल तक बच्चे ज्यादातर समय घर में रहे। उनका नाता स्कूलों से टूटा रहा। अब वह कक्षाओं में पहुंचे हैं तो उनका मन नहीं लग रहा है। छोटे बच्चे स्कूल तो आ रहे हैं लेकिन कई घंटे बैठकर पढ़ाई करना नहीं चाहते हैं। वहीं बड़ी कक्षाओं के बच्चे तो स्कूल खुलने के बाद पठन-पाठन को लेकर गंभीर हो गए हैं और पुराने माहौल में घुलने-मिलने लगे हैं। छोटी कक्षाओं के बच्चे अभी पढ़ाई के लिए इतने गंभीर नहीं हुए हैं।
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ऑनलाइन पढ़ाई के चलते बच्चों में अब ऑफलाइन के प्रति उदासीनता आ गई है। ऑफलाइन के प्रति जागरूकता का अभाव दिखाई दे रहा है। इस नए सत्र में छात्रों के साथ आत्मसात होकर उनकी कमियों को दूर करते हुए पठन-पाठन को और अधिक प्रभावशाली बनाया जाएगा।
लीला फर्त्याल, शिक्षिका
पाठ्यक्रम को लचीला व रोचक बनाकर अपनी शिक्षण विधियों में नवाचार को दृष्टिगत रखते हुए पठन-पाठन पर जोर दिया जा रहा है। छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षकों, छात्रों व अभिभावकों का सहयोग बेहद जरूरी है ताकि उनके शैक्षिक, मनोवैज्ञानिक गुणों में सुधार हो सके।
मनोज विश्नोई, सहायक अध्यापक
कोरोना काल के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई होती थी। मैं इस वर्ष इंटरमीडिएट की परीक्षा दे रही हूं, मन में थोड़ा डर तो लग रहा है। स्कूल में शिक्षकों ने काफी मनोबल बढ़ाया है कि प्रश्नपत्र में जितना आता है उसे पहले करना। उसके बाद कठिन प्रश्नों को हल करने का प्रयास करना। मेरा पूरा प्रयास है कि अच्छे अंक लेकर आऊं।
विशाखा, कक्षा 12वीं
कोरोना काल के दौरान पढ़ाई पर बुरा असर पड़ा है। अब स्कूल खुलने पर मैंने पूरी लगन और मेहनत के साथ पढ़ाई शुरू कर दी है। शुरुआत में कोरोना संक्रमण को लेकर थोड़ा डर लगा लेकिन अब जैसे-जैसे स्थिति सामान्य हो रही है उतना डर नहीं लगता है। मैंने संक्रमण से बचाव के लिए वैक्सीन भी लगवा ली है।
अर्पित कुमार, कक्षा 11वीं

मनोज विश्नोई।- फोटो : KASHIPUR