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सिडकुल के श्रमिक प्रभावित कर सकते हैं दो विधानसभाओं के मतदान
अमर उजाला ब्यूरो, रुद्रपुर
Updated Mon, 09 Jan 2017 11:59 PM IST
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नोटबंदी का असर रुद्रपुर और किच्छा विधानसभा चुनाव में चुनाव लड़ने वाले दावेदारों पर भी पड़ रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण पंतनगर सिडकुल से जुड़े एक लाख 26 हजार से अधिक श्रमिक हैं। पिछले डेढ़ माह से इनमें से करीब 30 फीसदी श्रमिक जो पलायन कर गए थे वह अभी वापस नहीं लौटे हैं। यह सभी श्रमिक रुद्रपुर विधानसभा और किच्छा विधानसभा क्षेत्रों में किराए के भवनों में पिछले एक दशक से अधिक समय से रह रहे हैं। इनके वोटर कार्ड भी बने हैं।
राज्य में जबसे विधानसभा चुनाव का बिगुल बजा है तब से दोनों बड़ी पार्टियों के नेता (भाजपा और कांग्रेस) पलायन कर चुके करीब 39 हजार सिडकुल के श्रमिक मतदाताओं के लौटने का इंतजार कर रहे हैं। सिडकुल प्रबंधन की मानें तो नोटबंदी के बाद पंतनगर सिडकुल से एकाएक 60 फीसदी से अधिक श्रमिक पलायन कर गए थे। वर्तमान में 30 फीसदी श्रमिकों के लौटने से फैक्ट्रियों का उत्पादन पटरी पर आ गया है, वहीं अभी कुछ कारखानों को अब भी श्रमिकों के लौटने का इंतजार है।
अब भाजपा और कांग्रेस दोनों के ही दावेदारों की चिंता इस बात को लेकर है कि ये मतदाता मतदान से पहले अपने कर्मस्थल पर लौट आएं। अगर श्रमिक समय पर नहीं लौटे तो मतदान प्रभावित हो सकता है। भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के समर्थक मकान मालिकों से संपर्क साधकर मतदाताओं को बुलाने की जुगत लगा रहे हैं। वर्तमान में पंतनगर सिडकुल के अधिकांश श्रमिक रुद्रपुर विधानसभा के ट्रांजिट कैंप, अटरिया रोड, दिनेशपुर रोड, छतरपुर, द्वारिका एंक्लेव आदि क्षेत्रों और किच्छा विधानसभा क्षेत्र के गंगापुर रोड, पंतनगर नगला, शांतिपुरी खुरपिया, लालपुर आदि में बसे हैं। रुद्रपुर के भाजपा विधायक राजकुमार ठुकराल का कहना है कि सिडकुल की स्थापना के बाद से हजारों लोगों को रोजगार मुहैया हुआ है। उनके विधानसभा क्षेत्र में लगभग सभी लोगों के मतदाता पहचान पत्र बनाए गए हैं, जो वोटर श्रमिक इधर उधर गए हैं उन्हें चुनाव से पहले बुलाने के लिए उनके मकान मालिकों और परिचितों के माध्यम से संपर्क किया जा रहा है।
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नोटबंदी से निश्चित तौर पर सिडकुल के उत्पादन पर असर पड़ने के साथ ही कुछ श्रमिकों का पलायन हुआ था। अब स्थिति सामान्य होने के चलते श्रमिक सिडकुल में काम पर लौटने लगे हैं। बड़ी फैक्ट्रियों के श्रमिकों पर तो नोटबंदी का असर नहीं पड़ा है, लेकिन जो छोटे कारखाने हैं उनमें अब भी 30 फीसदी श्रमिक काम पर नहीं आए हैं। फैक्ट्रियों के प्रबंधन के अनुसार सभी श्रमिक धीरे-धीरे काम पर लौट रहे हैं और वर्तमान में सिडकुल का उत्पादन भी पूरी तरह से पटरी पर है। छोटे कारखानों के प्रबंधन से भी बातचीत कर जानकारी जुटाई जा रही है, श्रमिकों के काम पर बुलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
- जीएस रावत, आरएम सिडकुल
राज्य में जबसे विधानसभा चुनाव का बिगुल बजा है तब से दोनों बड़ी पार्टियों के नेता (भाजपा और कांग्रेस) पलायन कर चुके करीब 39 हजार सिडकुल के श्रमिक मतदाताओं के लौटने का इंतजार कर रहे हैं। सिडकुल प्रबंधन की मानें तो नोटबंदी के बाद पंतनगर सिडकुल से एकाएक 60 फीसदी से अधिक श्रमिक पलायन कर गए थे। वर्तमान में 30 फीसदी श्रमिकों के लौटने से फैक्ट्रियों का उत्पादन पटरी पर आ गया है, वहीं अभी कुछ कारखानों को अब भी श्रमिकों के लौटने का इंतजार है।
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अब भाजपा और कांग्रेस दोनों के ही दावेदारों की चिंता इस बात को लेकर है कि ये मतदाता मतदान से पहले अपने कर्मस्थल पर लौट आएं। अगर श्रमिक समय पर नहीं लौटे तो मतदान प्रभावित हो सकता है। भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के समर्थक मकान मालिकों से संपर्क साधकर मतदाताओं को बुलाने की जुगत लगा रहे हैं। वर्तमान में पंतनगर सिडकुल के अधिकांश श्रमिक रुद्रपुर विधानसभा के ट्रांजिट कैंप, अटरिया रोड, दिनेशपुर रोड, छतरपुर, द्वारिका एंक्लेव आदि क्षेत्रों और किच्छा विधानसभा क्षेत्र के गंगापुर रोड, पंतनगर नगला, शांतिपुरी खुरपिया, लालपुर आदि में बसे हैं। रुद्रपुर के भाजपा विधायक राजकुमार ठुकराल का कहना है कि सिडकुल की स्थापना के बाद से हजारों लोगों को रोजगार मुहैया हुआ है। उनके विधानसभा क्षेत्र में लगभग सभी लोगों के मतदाता पहचान पत्र बनाए गए हैं, जो वोटर श्रमिक इधर उधर गए हैं उन्हें चुनाव से पहले बुलाने के लिए उनके मकान मालिकों और परिचितों के माध्यम से संपर्क किया जा रहा है।
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नोटबंदी से निश्चित तौर पर सिडकुल के उत्पादन पर असर पड़ने के साथ ही कुछ श्रमिकों का पलायन हुआ था। अब स्थिति सामान्य होने के चलते श्रमिक सिडकुल में काम पर लौटने लगे हैं। बड़ी फैक्ट्रियों के श्रमिकों पर तो नोटबंदी का असर नहीं पड़ा है, लेकिन जो छोटे कारखाने हैं उनमें अब भी 30 फीसदी श्रमिक काम पर नहीं आए हैं। फैक्ट्रियों के प्रबंधन के अनुसार सभी श्रमिक धीरे-धीरे काम पर लौट रहे हैं और वर्तमान में सिडकुल का उत्पादन भी पूरी तरह से पटरी पर है। छोटे कारखानों के प्रबंधन से भी बातचीत कर जानकारी जुटाई जा रही है, श्रमिकों के काम पर बुलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
- जीएस रावत, आरएम सिडकुल