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वैज्ञानिक सोच के अभाव में बढ़ती हैं सामाजिक कुरीतियां
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रुद्रपुर कॉलेज में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर व्याख्यान के दौरान मौजूद वक्ता।
- फोटो : RUDRAPUR
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रुद्रपुर। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर सोमवार को एसबीएस डिग्री कॉलेज में विज्ञान प्रदर्शनी व विज्ञान के महत्व पर व्याख्यान हुआ। इसमें पंतनगर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के साथ ही विशेषज्ञों व प्रोफेसरों ने दैनिक जीवन में विज्ञान की महत्ता पर प्रकाश डाला।
विज्ञान संकाय में आयोजित व्याख्यान में प्राचार्य डॉ. केके पांडेय ने कहा कि जीवन के हर क्षेत्र में विज्ञान का दखल है। जीवन को सही दिशा में ले जाने के लिए वैज्ञानिक सोच जरूरी है। वैज्ञानिक सोच के अभाव में ही सामाजिक कुरीतियों को पनपने का मौका मिलता है। वैज्ञानिक सोच न होने के कारण ही कुरीतियों को परंपरा बनाकर उन्हें सामाजिक स्वीकृति दे दी जाती है।
जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. आशुतोष पंत ने विज्ञान के क्षेत्र में पर्यावरण और पौधों के महत्व पर प्रकाश डाला। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पीपी त्रिपाठी ने विज्ञान व मेडिकल की महंगी होती शिक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज मेडिकल की पढ़ाई मध्यम वर्ग के युवाओं के असंभव हो गई है। इधर कॉलेज में आयोजित विज्ञान प्रदर्शनी में छात्र-छात्राओं ने पोस्टरों के माध्यम से आम जीवन में विज्ञान की महत्ता को बताया। वहां वैज्ञानिक डॉ. मणिंद्र मोहन शर्मा, डॉ. रंजीत सिंह, डॉ. मनीषा तिवारी, डॉ. शलभ गुप्ता, डॉ. भारत पांडेय आदि थे।
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विज्ञान संकाय में आयोजित व्याख्यान में प्राचार्य डॉ. केके पांडेय ने कहा कि जीवन के हर क्षेत्र में विज्ञान का दखल है। जीवन को सही दिशा में ले जाने के लिए वैज्ञानिक सोच जरूरी है। वैज्ञानिक सोच के अभाव में ही सामाजिक कुरीतियों को पनपने का मौका मिलता है। वैज्ञानिक सोच न होने के कारण ही कुरीतियों को परंपरा बनाकर उन्हें सामाजिक स्वीकृति दे दी जाती है।
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जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. आशुतोष पंत ने विज्ञान के क्षेत्र में पर्यावरण और पौधों के महत्व पर प्रकाश डाला। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पीपी त्रिपाठी ने विज्ञान व मेडिकल की महंगी होती शिक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज मेडिकल की पढ़ाई मध्यम वर्ग के युवाओं के असंभव हो गई है। इधर कॉलेज में आयोजित विज्ञान प्रदर्शनी में छात्र-छात्राओं ने पोस्टरों के माध्यम से आम जीवन में विज्ञान की महत्ता को बताया। वहां वैज्ञानिक डॉ. मणिंद्र मोहन शर्मा, डॉ. रंजीत सिंह, डॉ. मनीषा तिवारी, डॉ. शलभ गुप्ता, डॉ. भारत पांडेय आदि थे।
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