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Udham Singh Nagar News: रिंकू राणा ने थारू लोक संस्कृति को पहुंचाया शिखर पर
Tue, 10 Mar 2026 01:14 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Tue, 10 Mar 2026 01:14 AM IST
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खटीमा। थारू जनजाति की लोक गायिका स्व. रिंकू राणा को सोमवार को थारू विकास भवन के सभागार में श्रद्धांजलि अर्पित की गई। साथ ही थारू लोक संस्कृति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए उनके योगदान को याद किया गया।
श्रद्धांजलि सभा के दौरान लोक गायक बंटी राणा ने कहा कि स्व. रिंकू राणा ने थारू लोक संस्कृति को नई पहचान दी थी। वह न सिर्फ थारू लोक संस्कृति बल्कि थारू समाज को भी आगे ले जाने और विकास के लिए प्रयासरत रहती थीं। उन्होंने अपनी आवाज के जरिये थारू संस्कृति को बड़ी ऊंचाई तक पहुंचाया। थारू लोक संस्कृति को नई पहचान देने के लिए स्व. रिंकू को हमेशा याद किया जाएगा।
स्व. रिंकू राणा के भाई गौतम राणा ने कहा कि उनकी बहन ने नेपाली फिल्म के लिए भी गीत गाए। रिंकू को बचपन से ही गायन में रुचि थी। वह थारू लोक संस्कृति को लोक गीतों के माध्यम से नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना चाहती थी। वहां राणा थारू परिषद के अध्यक्ष दान सिंह राणा, सांसद प्रतिनिधि रविंद्र राणा, महेश सिंह, निशांत, बाल कुमारी देवी, ऊषा राणा, कोमल राणा, श्याम सिंह आदि थे।
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रिंकू राणा ने कुमाऊंनी और जौनसारी गीत भी गाए थे
खटीमा। थारू जनजाति की लोक गायिका रिंकू राणा ने थारू लोक गीतों के अलावा कुमाऊंनी, गढ़वाली, जौनसारी और नेपाली गीत भी गाए। वह जय भूमसेन होलिका उत्थान समिति खटीमा की अध्यक्ष भी थीं। लोक गायक बंटी राणा ने बताया कि होली, झीझी लोक गायन, कुमाऊंनी, गढ़वाली और जौनसारी में कई गीत गाए। उनका होरी खेल रहे नंदलाल... गीत काफी प्रसिद्ध हुआ था। उनके करीब 12 गीतों का वीडियो रिकॉर्ड भी है।
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श्रद्धांजलि देने पहुंचे कई गावों के लोग
लोक गायिका स्व. रिंकू राणा को श्रद्धांजलि देने के लिए खटीमा के अलावा नानकमत्ता, मझोला और झनकट से भी लोग पहुंचे। विडोरी, नौगजा, भुड़ाई, बिरिया मझोला, भिलैय्या, उमरकला, बिसौटा, नौगवांठग्गू, चारूबेटा, नगला तराई, बिगराबाग, सुजिया महोलिया, सड़ासडिया, फुलैया, बानूसा आदि गांवों से पहुंचे लोगों ने लोक गायिका को श्रद्धांजलि अर्पित की।
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कैंडल मार्च निकाला
श्रद्धांजलि सभा के बाद लोगों ने थारू विकास भवन के द्वार से परिसर में कैंडल मार्च निकाला। लोगों ने मोमबत्तियां जलाकर लोक गायिका स्व. रिंकू राणा को श्रद्धांजलि दी।
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श्रद्धांजलि सभा के दौरान लोक गायक बंटी राणा ने कहा कि स्व. रिंकू राणा ने थारू लोक संस्कृति को नई पहचान दी थी। वह न सिर्फ थारू लोक संस्कृति बल्कि थारू समाज को भी आगे ले जाने और विकास के लिए प्रयासरत रहती थीं। उन्होंने अपनी आवाज के जरिये थारू संस्कृति को बड़ी ऊंचाई तक पहुंचाया। थारू लोक संस्कृति को नई पहचान देने के लिए स्व. रिंकू को हमेशा याद किया जाएगा।
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स्व. रिंकू राणा के भाई गौतम राणा ने कहा कि उनकी बहन ने नेपाली फिल्म के लिए भी गीत गाए। रिंकू को बचपन से ही गायन में रुचि थी। वह थारू लोक संस्कृति को लोक गीतों के माध्यम से नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना चाहती थी। वहां राणा थारू परिषद के अध्यक्ष दान सिंह राणा, सांसद प्रतिनिधि रविंद्र राणा, महेश सिंह, निशांत, बाल कुमारी देवी, ऊषा राणा, कोमल राणा, श्याम सिंह आदि थे।
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रिंकू राणा ने कुमाऊंनी और जौनसारी गीत भी गाए थे
खटीमा। थारू जनजाति की लोक गायिका रिंकू राणा ने थारू लोक गीतों के अलावा कुमाऊंनी, गढ़वाली, जौनसारी और नेपाली गीत भी गाए। वह जय भूमसेन होलिका उत्थान समिति खटीमा की अध्यक्ष भी थीं। लोक गायक बंटी राणा ने बताया कि होली, झीझी लोक गायन, कुमाऊंनी, गढ़वाली और जौनसारी में कई गीत गाए। उनका होरी खेल रहे नंदलाल... गीत काफी प्रसिद्ध हुआ था। उनके करीब 12 गीतों का वीडियो रिकॉर्ड भी है।
श्रद्धांजलि देने पहुंचे कई गावों के लोग
लोक गायिका स्व. रिंकू राणा को श्रद्धांजलि देने के लिए खटीमा के अलावा नानकमत्ता, मझोला और झनकट से भी लोग पहुंचे। विडोरी, नौगजा, भुड़ाई, बिरिया मझोला, भिलैय्या, उमरकला, बिसौटा, नौगवांठग्गू, चारूबेटा, नगला तराई, बिगराबाग, सुजिया महोलिया, सड़ासडिया, फुलैया, बानूसा आदि गांवों से पहुंचे लोगों ने लोक गायिका को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कैंडल मार्च निकाला
श्रद्धांजलि सभा के बाद लोगों ने थारू विकास भवन के द्वार से परिसर में कैंडल मार्च निकाला। लोगों ने मोमबत्तियां जलाकर लोक गायिका स्व. रिंकू राणा को श्रद्धांजलि दी।